बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन का बड़ा दावा: हर तीसरा वकील नकली डिग्री से पैरवी कर रहा
Pawan Modiya | May 23, 2026, 23:48 IST
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Bar Council of India के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने खुलासा किया कि 35 से 40% वकील नकली डिग्री लेकर अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। डिग्री सत्यापन प्रक्रिया में 40% अधिवक्ता फॉर्म भरने से गायब हो गए। CJI सूर्यकांत भी डिग्री जांच की मांग उठा चुके हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- BCI चेयरमैन ने कहा कि 35 से 40 प्रतिशत वकील नकली डिग्री से काम कर रहे हैं।
- डिग्री सत्यापन प्रक्रिया शुरू हुई तो 40 प्रतिशत वकीलों ने फॉर्म ही नहीं भरा।
- यह खुलासा CJI सूर्यकांत की उस टिप्पणी के बाद आया जिसमें उन्होंने CBI जांच की बात कही।
- CJI की "कॉकरोच" वाली टिप्पणी सोशल मीडिया पर विवाद बन गई थी।
- BCI ने कहा कि वह इस समस्या से वाकिफ है और कदम उठाए जा रहे हैं।
अदालत में काला कोट, लेकिन डिग्री नकली
उनकी डिग्रियां नकली हैं। किसी ने उन्हें कहीं से बनवाया, किसी ने खरीदा। और उसी के आधार पर वे अदालतों में मुवक्किलों के केस लड़ रहे हैं।
मिश्रा ने यह बात समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में कही। उन्होंने यह भी बताया कि BCI को यह बात उसी समय पता चली जब डिग्री सत्यापन यानी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू की गई।
40 प्रतिशत ने फॉर्म भरा ही नहीं
यह बयान उन्होंने 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से चले सोशल मीडिया आंदोलन के संदर्भ में दिया। यह आंदोलन CJI की एक टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था।
CJI ने क्या कहा था?
उन्होंने यहां तक कह दिया कि BCI से इस मामले में कोई कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, इसलिए वे CBI (Central Bureau of Investigation) से डिग्रियों की जांच कराने पर विचार कर रहे हैं। CJI ने यह भी कहा कि कुछ बेरोजगार युवा "कॉकरोच" की तरह हर व्यवस्था पर हमला करते हैं।
इस टिप्पणी पर ऑनलाइन हंगामा मच गया।
CJI ने बाद में अपनी बात स्पष्ट की
BCI चेयरमैन मिश्रा ने भी इसी को आगे बढ़ाते हुए कहा कि CJI का बयान उन लोगों के बारे में था जो नकली डिग्री लेकर काला कोट, बैंड और वस्त्र पहनकर अदालत में आते हैं।
यह समस्या नई नहीं है
बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने उस दौरान अपनी जांच में 112 ऐसे वकीलों को पकड़ा था जिनकी एलएलबी (LLB) डिग्रियां फर्जी निकलीं। उस समय भी 20,000 से अधिक डिग्रियों की जांच बाकी थी। 2025 में BCI ने एक अधिवक्ता जे. वसंथन को नामांकन सूची से हटाया था जिसने पैसे देकर बिचौलिए के जरिए फर्जी दस्तावेजों से नामांकन करवाया था।
अब क्या होगा?
यह मामला न्यायपालिका की विश्वसनीयता से सीधे जुड़ा है। जिस व्यक्ति पर लोग अपनी जमीन, परिवार और जिंदगी के केस सौंपते हैं, अगर उसकी डिग्री ही नकली हो तो न्याय का पूरा ढांचा खोखला हो जाता है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
जरूरी FAQ
BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के अनुसार देश की अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले 35 से 40 प्रतिशत अधिवक्ताओं की डिग्रियां फर्जी हैं। यह आंकड़ा डिग्री सत्यापन प्रक्रिया से सामने आया जब करीब 40 प्रतिशत वकीलों ने वेरिफिकेशन फॉर्म ही नहीं भरा। BCI को संदेह है कि यही वह वर्ग है जो नकली डिग्रियों के आधार पर काम कर रहा है।
फर्जी डिग्री लेकर वकालत करने पर क्या सजा हो सकती है?
फर्जी डिग्री से वकालत करना एक गंभीर अपराध है। ऐसे व्यक्तियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जाली दस्तावेज), 468 (धोखे के लिए जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल) के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है। इसमें सात साल तक की जेल का प्रावधान है। साथ ही BCI उनका नामांकन रद्द कर सकता है और उन्हें कभी भी वकालत करने से स्थायी रूप से वंचित किया जा सकता है।
आम नागरिक कैसे पता करे कि उनका वकील असली डिग्री वाला है या नहीं?
उत्तर: फिलहाल यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। लेकिन कुछ सावधानियां जरूरी हैं। पहला, वकील से उनकी एलएलबी डिग्री और बार काउंसिल एनरोलमेंट नंबर मांगें। दूसरा, संबंधित राज्य की बार काउंसिल की वेबसाइट पर उनका नाम जांचें। तीसरा, अगर कोई संदेह हो तो BCI या राज्य बार काउंसिल को शिकायत दें। BCI ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 26(1) के तहत सभी राज्य बार काउंसिलों को फर्जी नामांकन की सूचना देना अनिवार्य किया है।
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