ममता के गढ़ में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, अब बंगाली मुख्यमंत्री के चेहरे पर सस्पेंस
Manya Jain | May 04, 2026, 16:43 IST
The BJP has secured a majority in West Bengal next CM
पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के साथ ही अब इस बात पर सबकी नजर है कि मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा। हालांकि, चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बार—बार इस बात पर जोर दिया कि राज्य का सीएम एक बंगाली होगा।
कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया इतिहास दर्ज हो गया है। दशकों तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अभेद्य दुर्ग माने जाने वाले इस राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर भगवा फहरा दिया है।
इस जीत के साथ ही अब गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? चुनाव अभियान के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार हुंकार भरी थी कि भाजपा की सरकार बनने पर राज्य का नेतृत्व कोई भूमिपुत्र यानी बंगाली ही करेगा।
यह ममता बनर्जी के उस नैरेटिव का सीधा जवाब था, जिसमें उन्होंने भाजपा को 'बहिरागत' (बाहरी) लोगों की पार्टी करार दिया था। अब जबकि जनता ने भाजपा के पक्ष में जनादेश दे दिया है, मुख्यमंत्री पद की रेस में पांच बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
![BENGAL ELECTION]()
इस सूची में सबसे ऊपर और सबसे सशक्त नाम सुवेंदु अधिकारी का है। सुवेंदु केवल एक नेता नहीं, बल्कि बंगाल भाजपा के लिए एक युद्धक विमान की तरह साबित हुए हैं।
दिसंबर 2020 में जब सुवेंदु ने टीएमसी छोड़ी थी, तब इसे ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा झटका माना गया था। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की हाई-प्रोफाइल सीट पर खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पटखनी देकर जायंट किलर का तमगा हासिल किया था।
2021 की हार के बाद जब कई नेता हाशिए पर चले गए थे, तब सुवेंदु ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सदन से लेकर सड़क तक ममता सरकार की नाक में दम कर रखा था। चुनाव बाद हुई हिंसा के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं के रक्षक के रूप में अपनी छवि बनाई।
कांग्रेस के छात्र संगठन से राजनीति शुरू करने वाले सुवेंदु के पास सांगठनिक क्षमता और जमीनी पकड़ का अद्भुत मेल है। आज वे केवल पूर्वी मेदिनीपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे बंगाल में भाजपा के सबसे बड़े मास लीडर बनकर उभरे हैं।
यदि भाजपा नेतृत्व किसी ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो बंगाल के बौद्धिक वर्ग यानी 'भद्रलोक' को पूरी तरह स्वीकार्य हो, तो सामिक भट्टाचार्य एक आदर्श विकल्प हैं।
सामिक उस दौर से भाजपा के साथ हैं जब बंगाल में पार्टी का वोट शेयर दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंचता था। वे आरएसएस के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं।
2014 के उपचुनाव में बसीरहाट दक्षिण से जीतकर वे राज्य के पहले निर्वाचित भाजपा विधायक बने थे। उनकी छवि अटल बिहारी वाजपेयी की तर्ज पर एक शालीन और उदारवादी नेता की है, जो गठबंधन और सर्वसम्मति बनाने में माहिर माने जाते हैं।
भाजपा को शून्य से शिखर तक ले जाने का श्रेय अगर किसी एक व्यक्ति को जाता है तो वह दिलीप घोष हैं। उनके नेतृत्व में ही भाजपा ने 2019 में 18 लोकसभा सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था।
दिलीप घोष अपने बेबाक और ठेठ बंगाली अंदाज के लिए जाने जाते हैं। खड़गपुर सदर सीट से अपनी जीत के प्रति आश्वस्त घोष कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
हालांकि 2021 के बाद वे मुख्यधारा से कुछ दूर नजर आए थे, लेकिन इसी साल जनवरी में अमित शाह से उनकी मुलाकात के बाद यह साफ हो गया कि पार्टी उन्हें बड़ी भूमिका देने वाली है। संगठन को खड़ा करने का उनका अनुभव मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को मजबूती देता है।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार भी इस रेस में शामिल हैं। भाजपा की जीत में उत्तर बंगाल का हमेशा बड़ा योगदान रहा है। यदि पार्टी उत्तर बंगाल की जनता को यह संदेश देना चाहती है कि सत्ता में उनकी सीधी भागीदारी है, तो सुकांता मजूमदार सबसे फिट बैठते हैं।
मोदी कैबिनेट का हिस्सा होने के कारण उनके पास प्रशासनिक कार्यों का अनुभव भी है और उनकी छवि भी निष्कलंक रही है।
पूर्व पत्रकार और राज्यसभा सांसद रहे स्वपन दासगुप्ता भाजपा के बौद्धिक चेहरे हैं। दासगुप्ता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का बेहद भरोसेमंद माना जाता है। 2021 के चुनावों में उन्होंने भाजपा के विजन डॉक्यूमेंट और रणनीतियों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
हालांकि, उनके पास सुवेंदु या दिलीप घोष जैसा प्रशासनिक और जमीनी चुनावी अनुभव नहीं है, लेकिन एक 'सॉफ्ट फेस' के तौर पर उनकी दावेदारी को नकारा नहीं जा सकता।
बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के बाद अब गेंद भाजपा के संसदीय बोर्ड के पाले में है। जहां एक ओर सुवेंदु अधिकारी का आक्रामक तेवर है, वहीं सामिक भट्टाचार्य और स्वपन दासगुप्ता जैसे सौम्य चेहरे भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं।
अमित शाह का वह वादा कि मुख्यमंत्री बंगाली ही होगा अब हकीकत बनने जा रहा है। देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व सुवेंदु के संघर्ष को इनाम देता है या किसी नए और चौंकाने वाले चेहरे को बंगाल की कमान सौंपता है।
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इस जीत के साथ ही अब गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? चुनाव अभियान के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार हुंकार भरी थी कि भाजपा की सरकार बनने पर राज्य का नेतृत्व कोई भूमिपुत्र यानी बंगाली ही करेगा।
यह ममता बनर्जी के उस नैरेटिव का सीधा जवाब था, जिसमें उन्होंने भाजपा को 'बहिरागत' (बाहरी) लोगों की पार्टी करार दिया था। अब जबकि जनता ने भाजपा के पक्ष में जनादेश दे दिया है, मुख्यमंत्री पद की रेस में पांच बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
BENGAL ELECTION
सुवेंदु अधिकारी : सबसे प्रबल दावेदार
दिसंबर 2020 में जब सुवेंदु ने टीएमसी छोड़ी थी, तब इसे ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा झटका माना गया था। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की हाई-प्रोफाइल सीट पर खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पटखनी देकर जायंट किलर का तमगा हासिल किया था।
2021 की हार के बाद जब कई नेता हाशिए पर चले गए थे, तब सुवेंदु ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सदन से लेकर सड़क तक ममता सरकार की नाक में दम कर रखा था। चुनाव बाद हुई हिंसा के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं के रक्षक के रूप में अपनी छवि बनाई।
कांग्रेस के छात्र संगठन से राजनीति शुरू करने वाले सुवेंदु के पास सांगठनिक क्षमता और जमीनी पकड़ का अद्भुत मेल है। आज वे केवल पूर्वी मेदिनीपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे बंगाल में भाजपा के सबसे बड़े मास लीडर बनकर उभरे हैं।
सामिक भट्टाचार्य: उदारवादी चेहरा
सामिक उस दौर से भाजपा के साथ हैं जब बंगाल में पार्टी का वोट शेयर दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंचता था। वे आरएसएस के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं।
2014 के उपचुनाव में बसीरहाट दक्षिण से जीतकर वे राज्य के पहले निर्वाचित भाजपा विधायक बने थे। उनकी छवि अटल बिहारी वाजपेयी की तर्ज पर एक शालीन और उदारवादी नेता की है, जो गठबंधन और सर्वसम्मति बनाने में माहिर माने जाते हैं।
दिलीप घोष: संगठन के निर्माता
दिलीप घोष अपने बेबाक और ठेठ बंगाली अंदाज के लिए जाने जाते हैं। खड़गपुर सदर सीट से अपनी जीत के प्रति आश्वस्त घोष कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
हालांकि 2021 के बाद वे मुख्यधारा से कुछ दूर नजर आए थे, लेकिन इसी साल जनवरी में अमित शाह से उनकी मुलाकात के बाद यह साफ हो गया कि पार्टी उन्हें बड़ी भूमिका देने वाली है। संगठन को खड़ा करने का उनका अनुभव मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को मजबूती देता है।
सुकांता मजूमदार: उत्तर बंगाल का प्रतिनिधित्व
मोदी कैबिनेट का हिस्सा होने के कारण उनके पास प्रशासनिक कार्यों का अनुभव भी है और उनकी छवि भी निष्कलंक रही है।
स्वपन दासगुप्ता: दिल्ली और बंगाल का सेतु
हालांकि, उनके पास सुवेंदु या दिलीप घोष जैसा प्रशासनिक और जमीनी चुनावी अनुभव नहीं है, लेकिन एक 'सॉफ्ट फेस' के तौर पर उनकी दावेदारी को नकारा नहीं जा सकता।
दिल्ली में होगा अंतिम फैसला
अमित शाह का वह वादा कि मुख्यमंत्री बंगाली ही होगा अब हकीकत बनने जा रहा है। देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व सुवेंदु के संघर्ष को इनाम देता है या किसी नए और चौंकाने वाले चेहरे को बंगाल की कमान सौंपता है।
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