द सूत्र एक्सप्लेनर: क्यों बार-बार लीक होता है NEET का पेपर, क्या JEE है अधिक सुरक्षित?
Ashish Bhardwaj | May 14, 2026, 10:20 IST
Photograph: (the sootr)
नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में CBI की देशव्यापी कार्रवाई ने देश के 22 लाख से अधिक छात्रों और उनके अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है। आइए समझते हैं कि देश की दो सबसे बड़ी परीक्षाओं NEET-UG परीक्षा और JEE परीक्षा के संचालन में अंतर क्या है।
NEET और JEE क्या हैं?
JEE (Main & Advanced): यह प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों (NITs, IIITs और IITs) में प्रवेश के लिए है। जेईई मेन NTA आयोजित करता है, जबकि जेईई एडवांस की जिम्मेदारी IITs की होती है। यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित (Online) होती है।
आयोजन के तरीके में मुख्य अंतर
सुरक्षा का स्तर: ऑनलाइन परीक्षा (CBT) में प्रश्न पत्र के परिवहन (Transport) और वितरण के दौरान लीक होने का खतरा खत्म हो जाता है। इसमें प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्ट कंपनियों जैसे बाहरी एजेंटों की भूमिका न के बराबर होती है।
पारदर्शिता: कंप्यूटर आधारित टेस्ट में प्रश्न पत्र निर्धारित समय पर ही सिस्टम पर खुलता है, जिससे फिजिकल लीक की संभावना शून्य हो जाती है।
NEET को कंप्यूटर आधारित (Online) क्यों नहीं बनाया जा सकता?
बुनियादी ढांचे की कमी: देश में एक साथ इतने बड़े पैमाने पर ऑनलाइन परीक्षा कराने के लिए पर्याप्त केंद्र नहीं हैं। नीट में लगभग 23 लाख छात्र बैठते हैं, जबकि जेईई में करीब 14 लाख। NTA एक शिफ्ट में अधिकतम 1.5 लाख छात्रों की ऑनलाइन परीक्षा ले सकता है। नीट को ऑनलाइन करने का मतलब है इसे कई हफ्तों तक और कम से कम 15 शिफ्टों में आयोजित करना।
नॉर्मलाइजेशन (Normalization) की चुनौती: जब परीक्षा कई शिफ्टों में होती है, तो हर शिफ्ट के पेपर का कठिनाई स्तर अलग हो सकता है। इसे बराबर करने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है। अधिकारियों का मानना है कि मेडिकल सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि इस प्रक्रिया से कानूनी विवाद (Litigations) और प्रवेश में देरी हो सकती है।
NEET इतना 'हाई-स्टेक' और लीक के प्रति संवेदनशील क्यों है?
विशेषज्ञों ने नीट के बार-बार लीक होने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं:
भीषण प्रतिस्पर्धा: लगभग 1 लाख मेडिकल सीटों के लिए 23 लाख छात्र लड़ते हैं। इनमें से आधी सीटें सरकारी कॉलेजों की हैं, जहां फीस बहुत कम है। निजी कॉलेजों की करोड़ों की फीस से बचने के लिए लोग पेपर खरीदने के लिए मोटी रकम देने को तैयार हो जाते हैं।
कोचिंग इंडस्ट्री का दबाव: देशभर में फैले कोचिंग सेंटर्स के बीच रिजल्ट दिखाने की होड़ लगी है। अगले बैच के एडमिशन इस बात पर निर्भर करते हैं कि उनके कितने छात्र सफल हुए, जो कभी-कभी गलत रास्तों को बढ़ावा देता है।
फिजिकल ट्रांसपोर्टेशन: पेन-पेपर मोड होने के कारण पेपर को देशभर के केंद्रों तक ट्रकों और बैंक लॉकरों के जरिए पहुँचाया जाता है। इस लंबी चेन में प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र तक कई ऐसे बिंदु (Points) होते हैं जहाँ से गोपनीयता भंग हो सकती है।
इसलिए कौनसी परीक्षा बेस्ट
नीट-यूजी 2024 और 2026 की घटनाओं के बाद, अब विशेषज्ञों और छात्रों की ओर से यह मांग तेज हो रही है कि परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल बदलाव किए जाएं ताकि देश के भविष्य (छात्रों) के साथ बार-बार खिलवाड़ न हो।
वैसे, सरकार ने अब 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' लागू कर दिया है, जिसमें पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
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