CCTV कैमरा कैसे बना युद्ध का हथियार, जानें पूरी कहानी
Pawan Modiya | Apr 26, 2026, 21:12 IST
Photograph: (the sootr)
ईरान-इजराइल युद्ध में CCTV कैमरों को जासूसी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। इजराइल ने ईरान के ट्रैफिक कैमरों से खामेनेई को ट्रैक किया। अब साधारण दिखने वाला CCTV कैमरा भी जासूसी और हमले का हिस्सा बन सकता है
समझें क्या है पूरा मामला
- ईरान-इजराइल युद्ध में CCTV कैमरों को जासूसी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।
- इजराइल ने ईरान के अपने ट्रैफिक कैमरों से सुप्रीम लीडर खामेनेई की रूटीन ट्रैक की।
- ईरान ने वाइजमैन इंस्टीट्यूट पर मिसाइल दागने से पहले वहां का CCTV हैक किया।
- दुनियाभर में हिकविजन और दाहुआ जैसे चीनी कैमरे सबसे ज्यादा निशाने पर हैं।
- भारत ने 1 अप्रैल 2026 से इंटरनेट से जुड़े चीनी CCTV कैमरों की बिक्री पर रोक लगाई।
CCTV बना युद्ध का नया हथियार
वाइजमैन इंस्टीट्यूट पर मिसाइल से पहले हुई हैकिंग
करादी ने खासतौर पर रेहोवोत स्थित वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब ईरान ने इस संस्थान पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया, तो ठीक उसी से पहले उस इमारत के सामने लगे कैमरे का कंट्रोल हैकरों ने अपने हाथ में ले लिया था। इसके साथ ही संस्थान के स्टाफ को धमकी भरे ईमेल भी भेजे गए।
करादी ने कहा, "यह दुश्मन देशों के लिए अब फिजिकल हमले और साइबर हमले में कोई फर्क नहीं है।" उनका यह बयान दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
ईरान ने इजराइल के खिलाफ साइबर युद्ध कैसे चलाया
जून 2025 में ईरान से जुड़े हैकर समूहों ने इंटेलिजेंस मंत्रालय के इशारे पर जेरूसलम की सीसीटीवी स्ट्रीम का एक्सेस हासिल कर लिया था। मिसाइल हमले से कुछ दिन पहले ही यह काम किया गया था। चेक प्वाइंट रिसर्च (Check Point Research) के मुताबिक मार्च 2026 में नई शत्रुता की शुरुआत के पहले कुछ घंटों में ही इजराइल, यूएई, कतर, बहरीन और कुवैत में आईपी (IP यानी Internet Protocol) कैमरों पर हमलों की संख्या अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई।
हिकविजन और दाहुआ क्यों हैं सबसे आसान शिकार
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वाएज ने कहा कि कैमरों की हैकिंग अब एक बड़ी "जागने की घंटी" है। उनके मुताबिक कमजोरियों को पूरी तरह खत्म करने की सीमाएं हैं।
इजराइल ने ईरान के कैमरे से खामेनेई को ट्रैक किया
आईपीवीएम (IPVM यानी IP Video Market) के रिसर्च डायरेक्टर कोनर हीली ने बेहद सटीक बात कही। उन्होंने कहा, "विडंबना यह है कि सत्तावादी सरकारें अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जो निगरानी तंत्र बनाती हैं, वही उनके नेताओं को दुश्मनों के लिए सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला बना देता है।"
भारत ने क्यों लगाया चीनी CCTV पर बैन
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY (Ministry of Electronics and Information Technology) ने एसटीक्यूसी (STQC यानी Standardisation Testing and Quality Certification) नियमों के तहत सभी निगरानी उपकरणों के लिए सख्त सर्टिफिकेशन जरूरी कर दिया। जिन कैमरों में चीनी मूल के चिपसेट हैं, उन्हें सर्टिफिकेशन नहीं दिया जा रहा।
गाजियाबाद में मार्च 2026 में पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ। इसमें सुरक्षित नहीं किए गए सीसीटीवी फीड का इस्तेमाल किया गया था। रेलवे स्टेशन और सेना की आवाजाही वाले रास्तों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद देशभर में सीसीटीवी का ऑडिट शुरू किया गया।
बाजार में कौन आगे, कौन पीछे
नए नियमों से कैमरों की कीमतों में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस कदम को राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता की दिशा में जरूरी और देर से उठाया गया सही कदम बताया है।
अपने कैमरों को कैसे सुरक्षित रखें
कैमरों और एनवीआर (NVR यानी Network Video Recorder) का फर्मवेयर हमेशा अपडेट रखें। पुराने हो चुके कैमरे जिन्हें सुरक्षा अपडेट नहीं मिलते, उन्हें बदल दें। नेटवर्क में कैमरों को अलग वीएलएएन (VLAN यानी Virtual Local Area Network) पर रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
यह खबर क्यों जरूरी है
जरूरी FAQ
उत्तर: जब कोई हैकर किसी कैमरे का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेता है, तो वह उस जगह की लाइव फुटेज देख सकता है। इस फुटेज से वह किसी इमारत की सुरक्षा व्यवस्था, लोगों की आवाजाही और कमजोर पड़ोसी क्षेत्रों का नक्शा तैयार करता है। ईरान-इजराइल युद्ध में ठीक यही हुआ। ईरान ने वाइजमैन इंस्टीट्यूट पर मिसाइल हमले से ठीक पहले वहां का स्ट्रीट कैमरा हैक कर लिया था। इससे हमला करने वाले को रियल-टाइम में यह देखने को मिला कि मिसाइल कहां गिरी और कितना नुकसान हुआ। इसी तरह इजराइल ने ईरान के अपने ट्रैफिक कैमरों से खामेनेई की दिनचर्या ट्रैक की और उन्हें निशाना बनाया।
प्रश्न 2: भारत ने चीनी CCTV कंपनियों पर बैन क्यों लगाया?
उत्तर: भारत सरकार को चिंता थी कि हिकविजन और दाहुआ जैसी चीनी कंपनियों के कैमरों में छिपे बैकडोर यानी गुप्त रास्ते हो सकते हैं, जिससे डेटा विदेशी सर्वरों पर जा सकता है। ईरान-इजराइल युद्ध ने यह साबित कर दिया कि कैमरे जासूसी का सबसे आसान जरिया हो सकते हैं। गाजियाबाद में मार्च 2026 में एक पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जिसने असुरक्षित सीसीटीवी फीड का इस्तेमाल किया। इसलिए 1 अप्रैल 2026 से MeitY ने STQC सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया। जो कैमरे इसे पूरा नहीं करते या जिनमें चीनी चिपसेट है, उनकी बिक्री बंद हो गई है।
प्रश्न 3: अपने घर या दफ्तर के CCTV कैमरे को सुरक्षित कैसे रखें?
उत्तर: सबसे पहले कैमरे का डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें। "1234" या "admin" जैसे पासवर्ड हैकरों के लिए सबसे आसान शिकार हैं। कैमरे का फर्मवेयर हमेशा अपडेट रखें। कैमरे को सीधे इंटरनेट से न जोड़ें, बल्कि वीपीएन के जरिए उसे सुरक्षित करें। संस्थानों और दफ्तरों में कैमरों को एक अलग नेटवर्क यानी VLAN पर रखें, ताकि वे बाकी सिस्टम से जुड़े न हों। पुराने और बंद हो चुके मॉडलों को बदल दें, क्योंकि उन्हें सुरक्षा अपडेट नहीं मिलते।
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