730 से कम है सिबिल स्कोर, तो नहीं मिलेगा लोन, आरबीआई लाया नया ECL फ्रेमवर्क
Manya Jain | Aug 17, 2026, 11:48 IST
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आरबीआई अप्रैल 2027 से ईसीएल नियम लागू करेगा। 730 से कम सिबिल स्कोर वालों को लोन मिलना मुश्किल होगा। देश के 62% कर्जदारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
RBI अप्रैल 2027 से एक नया नियम लागू करने जा रहा है। इसका नाम है ECL यानी लोन डूबने के खतरे का पहले से अंदाज़ा लगाना। इस नियम से जिनका सिबिल स्कोर 730 से कम है, उन्हें लोन लेने में दिक्कत हो सकती है। देश में करीब 62% लोन लेने वालों का स्कोर इतना कम है। साथ ही RBI ने ब्याज दरों को लेकर भी एक नया मसौदा जारी किया है।
मुंबई. RBI अब एक नया तरीका लाने जा रहा है, जिससे बैंक कर्ज देने से पहले ज्यादा सावधानी बरतेंगे। इसे ECL फ्रेमवर्क कहा जा रहा है। साथ ही बैंकों के लिए पैसे अलग रखने के नियम भी बदलेंगे। यह सारे नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं।
इस बदलाव के बाद जिनका सिबिल स्कोर 730 से कम है, उन्हें लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि देश के करीब 62% लोन लेने वालों का स्कोर इतना कम है।
RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) ने अक्टूबर 2025 में यह नियम बनाने की बात कही थी। अप्रैल 2026 में इसके लिए पूरी जानकारी भी जारी कर दी गई। पुराने तरीके में बैंक नुकसान होने के बाद पैसे अलग रखते थे। अब बैंकों को कर्ज देने से पहले ही यह अंदाज़ा लगाना होगा कि पैसा डूब सकता है या नहीं। इसके लिए उन्हें पहले से पैसा अलग रखना होगा।
यह नियम बड़े बैंकों पर लागू होगा। छोटे फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और ग्रामीण बैंकों को अभी छूट दी गई है। बैंकों को इस बदलाव को झेलने के लिए मार्च 2031 तक का समय दिया गया है।
CIBIL स्कोर बताता है कि आपने पहले लिया गया कर्ज कैसे चुकाया है। नए नियम में बैंक हर ग्राहक का खतरा नापेंगे, और इसमें सिबिल स्कोर की बड़ी भूमिका होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में करीब 62% लोन लेने वालों का स्कोर 730 से कम है। हालांकि यह आंकड़ा RBI का नहीं, बल्कि अलग-अलग रिपोर्ट्स का अनुमान है।
इसका मतलब है कि बहुत से लोगों को या तो लोन मिलने में देरी होगी, या उन्हें ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा। कुछ लोगों से बैंक ज्यादा गारंटी भी मांग सकते हैं।
ECL के साथ RBI ने अगस्त 2026 में ब्याज दरों को लेकर भी एक मसौदा जारी किया है। इसके तहत बैंकों को हर महीने की पहली तारीख को ब्याज दर की जानकारी देनी होगी। जिन लोन की ब्याज दर बदलती रहती है, उनकी समीक्षा हर तीन महीने में करनी होगी।
MCLR (फंड की लागत पर आधारित ब्याज दर) की गणना भी तीन महीने के औसत से होगी। यह मसौदा अभी लोगों की राय के लिए खुला है। 11 सितंबर 2026 तक इस पर सुझाव लिए जाएंगे।
नए नियम में बैंक कर्ज देने से पहले छह बातें देखेंगे।
पहला, आपने पहले EMI या बिल समय पर चुकाए हैं या नहीं। दूसरा, आपका सिबिल स्कोर हाल में बढ़ा है या घटा है। तीसरा, आपकी कमाई स्थिर है या घटती-बढ़ती रहती है।
चौथा, आपकी नौकरी या काम में कितना खतरा है। पांचवां, जो चीज़ आप खरीद रहे हैं, उसकी कीमत के मुकाबले कितना कर्ज मांगा जा रहा है। छठा, आप पर पहले से कितना कर्ज या क्रेडिट कार्ड बिल बकाया है।
अभी कई बैंक कम स्कोर होने पर भी कुछ बदलाव करके लोन दे देते हैं। नया नियम आने के बाद ऐसा करना बैंकों के लिए मुश्किल होगा। अगर बैंक लोन देंगे भी, तो ज्यादा ब्याज ले सकते हैं। साथ ही सोना, प्रॉपर्टी या गारंटर मांगने की संभावना भी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बैंकों के मुनाफे पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है।
समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड का बिल भरें, इससे सिबिल स्कोर बेहतर बना रहेगा। पुराना कर्ज जल्दी चुकाने की कोशिश करें। अपना सिबिल स्कोर समय-समय पर जरूर चेक करते रहें। ध्यान रहे, यह नियम अभी मसौदे के स्तर पर है, इसलिए आगे इसमें बदलाव हो सकता है।
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मुंबई. RBI अब एक नया तरीका लाने जा रहा है, जिससे बैंक कर्ज देने से पहले ज्यादा सावधानी बरतेंगे। इसे ECL फ्रेमवर्क कहा जा रहा है। साथ ही बैंकों के लिए पैसे अलग रखने के नियम भी बदलेंगे। यह सारे नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं।
इस बदलाव के बाद जिनका सिबिल स्कोर 730 से कम है, उन्हें लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि देश के करीब 62% लोन लेने वालों का स्कोर इतना कम है।
ECL से क्या बदलेगा
यह नियम बड़े बैंकों पर लागू होगा। छोटे फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और ग्रामीण बैंकों को अभी छूट दी गई है। बैंकों को इस बदलाव को झेलने के लिए मार्च 2031 तक का समय दिया गया है।
सिबिल स्कोर क्यों जरूरी है
इसका मतलब है कि बहुत से लोगों को या तो लोन मिलने में देरी होगी, या उन्हें ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा। कुछ लोगों से बैंक ज्यादा गारंटी भी मांग सकते हैं।
ब्याज दरों का नया नियम
MCLR (फंड की लागत पर आधारित ब्याज दर) की गणना भी तीन महीने के औसत से होगी। यह मसौदा अभी लोगों की राय के लिए खुला है। 11 सितंबर 2026 तक इस पर सुझाव लिए जाएंगे।
बैंक अब इन 6 बातों पर परखेंगे
पहला, आपने पहले EMI या बिल समय पर चुकाए हैं या नहीं। दूसरा, आपका सिबिल स्कोर हाल में बढ़ा है या घटा है। तीसरा, आपकी कमाई स्थिर है या घटती-बढ़ती रहती है।
चौथा, आपकी नौकरी या काम में कितना खतरा है। पांचवां, जो चीज़ आप खरीद रहे हैं, उसकी कीमत के मुकाबले कितना कर्ज मांगा जा रहा है। छठा, आप पर पहले से कितना कर्ज या क्रेडिट कार्ड बिल बकाया है।
ग्राहकों पर क्या असर होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बैंकों के मुनाफे पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है।
ग्राहक अभी क्या करें
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