कौन हैं डॉक्टर से महामंडलेश्वर बनीं उदिता त्यागी? जानें उनका सफर
thesootr Desk | Jul 24, 2026, 19:11 IST
Uditya Tyagi
हरिद्वार के हरिहर आश्रम में जूना अखाड़े ने डॉ. उदिता त्यागी को महामंडलेश्वर बनाया है। संन्यास के बाद उन्हें यति मां प्रत्यंगिरा गिरि नाम मिला। इससे पहले वे ब्यूटी पेजेंट जीत चुकी हैं और भाजपा से भी जुड़ी रही हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- हरिद्वार के कनखल स्थित हरिहर आश्रम में बड़ा धार्मिक कार्यक्रम हुआ।
- यहां पंचदशनाम जूना अखाड़े ने डॉ. उदिता त्यागी को महामंडलेश्वर बनाया।
- उदिता त्यागी महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि की शिष्या हैं।
- दीक्षा के बाद उन्हें यति मां प्रत्यंगिरा गिरि नाम मिला।
- संन्यास लेने से पहले वे ब्यूटी पेजेंट जीत चुकी थीं।
कौन हैं डॉ. उदिता त्यागी
अब उन्होंने पुराना जीवन छोड़कर संन्यास का रास्ता चुना है। जूना अखाड़ा (Juna Akhara) ने उन्हें बड़ी धार्मिक जिम्मेदारी दी है।समारोह में साधु-संतों ने सनातन धर्म की सेवा का संदेश दिया।
समारोह में कौन-कौन रहा मौजूद
अंतरराष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत स्वामी महेश पुरी महाराज भी समारोह में पहुंचे।स्वामी अवधेशानंद गिरि ने वैदिक परंपरा के अनुसार उदिता त्यागी को संन्यास की दीक्षा दी।
दीक्षा के बाद बनीं महामंडलेश्वर
उनका जीवन सनातन धर्म की रक्षा के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने नई महामंडलेश्वर से गुरु के रास्ते पर चलने की उम्मीद जताई।
हनुमत धाम की भी बनीं पीठाधीश्वर
शपथ लेते समय उन्होंने कहा कि वे अपना जीवन सनातन धर्म की सेवा में लगाएंगी। समारोह में मौजूद संतों ने उनके संकल्प की सराहना की।
क्यों खास है यह नियुक्ति
उदिता त्यागी की नियुक्ति इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि उनका पुराना सफर काफी अलग रहा है।वे ब्यूटी पेजेंट जीत चुकी हैं। वे भाजपा से जुड़ी रही हैं। अब उन्होंने संन्यास लेकर धार्मिक जीवन शुरू किया है।ब्यूटी पेजेंट से महामंडलेश्वर बनने तक का सफर चर्चा में है।
महिला महामंडलेश्वर की परंपरा
- जूना अखाड़े में पहले भी महिला संतों को महामंडलेश्वर बनाया गया है।
- अखाड़े में महिलाओं को भी बड़ी धार्मिक जिम्मेदारियां दी जाती हैं।
- डॉ. उदिता त्यागी का महामंडलेश्वर बनना भी इसी परंपरा का हिस्सा है।
- आने वाले समय में वे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय दिख सकती हैं।
महामंडलेश्वर पद का महत्व
वे कुंभ और दूसरे बड़े धार्मिक आयोजनों में अहम भूमिका निभाते हैं।जूना अखाड़ा नियमों और परंपराओं के अनुसार यह पद देता है।
संन्यास की प्रक्रिया
- संन्यास लेना आसान फैसला नहीं माना जाता।
- इसमें व्यक्ति को अपनी पुरानी पहचान और जीवन छोड़ना पड़ता है।
- वैदिक परंपरा के अनुसार कई रस्में पूरी की जाती हैं।
- इसके बाद ही नया संन्यासी नाम और धार्मिक पद मिलता है।
- डॉ. उदिता त्यागी ने भी यही प्रक्रिया पूरी करके संन्यास लिया।
जूना अखाड़े की भूमिका
अब यति मां प्रत्यंगिरा गिरि को भी बड़ी जिम्मेदारी मिली है।आने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी भूमिका पर सबकी नजर रहेगी।
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