वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम कटे, अब चुनाव आयोग बिना SIR सवाल वाले फॉर्म 6 से लौटाएगा छूटे वोटर, ऐसे जुड़वाएं अपना नाम

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 02, 2026, 11:25 IST
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छूटे वोटरों को फॉर्म 6 से दोबारा जोड़ेगा चुनाव आयोग
छूटे वोटरों को फॉर्म 6 से दोबारा जोड़ेगा चुनाव आयोग

एसआईआर में 13 करोड़ नाम कटे तो चुनाव आयोग पर सवाल उठे। अब आयोग ने 20 राज्यों में स्पेशल ड्राइव का आदेश दिया है। इन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है। छूटे वोटर बिना अतिरिक्त सवाल वाला फॉर्म 6 भरेंगे। अफसर पुरानी और नई वोटर लिस्ट मिलाएंगे। जरूरत पड़ने पर घर जाकर फॉर्म भरवाएंगे। ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर पर भी दो चुनाव आयुक्त आपत्ति जता चुके हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • एसआईआर में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 13 करोड़ नाम कटे।
  • चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को स्पेशल ड्राइव का आदेश भेजा।
  • यह ड्राइव उन 20 राज्यों में चलेगी, जहां एसआईआर पूरा हो चुका है।
  • छूटे लोग और नए वोटर सामान्य फॉर्म 6 भरकर नाम जुड़वा सकेंगे।
  • दो चुनाव आयुक्त फॉर्म 6 और ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर पर आपत्ति जता चुके थे।

चुनाव आयोग ने दिया स्पेशल ड्राइव का आदेश

चुनाव आयोग ने छूटे वोटरों के लिए स्पेशल ड्राइव का आदेश दिया है। यह अभियान 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा। इन सभी जगह SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

आदेश 29 सितंबर को लिखित में भेजा गया। गुरुवार को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई। उसमें यह निर्देश दोहराया गया। यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आई है।

वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम कटे

एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, यानी वोटर लिस्ट की गहन जांच) पर आयोग घिरा है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम कटे हैं। यह कटौती 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई है।

सोचिए एक बार। यह महाराष्ट्र के 1.22 करोड़ जांच वाले रिकॉर्ड का करीब 10 गुना है। इतने नामों में कितने गलत कटे होंगे?

सवाल अब आयोग के भीतर से भी उठ रहे हैं।

फॉर्म 6 से हटेगा एसआईआर वाला सवाल

आयोग के सचिव ने 29 सितंबर को सभी सीईओ (CEO – Chief Electoral Officer) को पत्र लिखा। पत्र के मुताबिक, छूटे वोटरों और पहली बार के पात्र युवाओं का नाम जुड़ेगा। यह काम लगातार अपडेट की सामान्य प्रक्रिया के तहत होगा।

नए वोटर Form 6 भरते हैं। जुलाई में इसके ऑनलाइन रूप में एक नया सवाल जोड़ा गया था। सवाल था कि आवेदक पिछले एसआईआर के बाद की लिस्ट में था या नहीं। यही बात उसके माता-पिता के बारे में भी पूछी जाती थी।

फॉर्म 6 और एसआईआर-कब क्या हुआ
फॉर्म 6 और एसआईआर-कब क्या हुआ

18 साल के नए वोटर की क्या थी मुश्किल

जवाब दिए बिना ऑनलाइन फॉर्म जमा ही नहीं होता था। मान लीजिए किसी 18 साल के युवा के माता-पिता का नाम कट गया। तो वह इस सवाल का सच्चा जवाब कैसे देता?

नियम के मुताबिक फॉर्म सिर्फ सरकार बदल सकती है। इसके लिए नियमों में संशोधन जरूरी है, जो नहीं हुआ था। दोनों चुनाव आयुक्तों ने मई में यही बात कही थी। अगस्त में आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताया।

अब पत्र में साफ है कि यह घोषणा सिर्फ एसआईआर के दौरान लागू होगी। बाकी समय रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 वाले फॉर्म ही चलेंगे।

अफसर घर जाकर भरवाएंगे फॉर्म 6

लेकिन असली कहानी वीडियो कॉन्फ्रेंस में आगे बढ़ी। वहां मौजूद उप चुनाव आयुक्त ने सीईओ को एक काम सौंपा। उन्हें एसआईआर से पहले और बाद की वोटर लिस्ट मिलानी होगी। कटे हुए नामों की सूची बनाकर छूटे लोगों को पहचानना होगा।

घर-घर जाकर कैसे जुड़ेंगे छूटे वोटर

घरों का दौरा करने को कहा गया है। खासकर उन मामलों में, जहां वोटर कहीं और मैप नहीं है। वह डुप्लिकेट या मृत भी नहीं है। ऐसे लोगों का फॉर्म 6 भरवाना है।
By: बैठक में शामिल एक अधिकारी
सीईओ को राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की मदद लेनी है। voter list name deleted वाले लोग फॉर्म 6 से ही दोबारा जुड़ेंगे। अगर आप सोच रहे हैं कि मतदाता सूची में नाम कैसे जोड़ें, तो जवाब यही फॉर्म है।

ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर पर उठी आपत्ति

अब जरा पीछे चलते हैं। 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस ने एक पड़ताल छापी थी। इसके मुताबिक दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार आपत्ति दर्ज की।

ये आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं। आपत्ति उन फैसलों पर थी, जो उनकी जानकारी के बिना लिए गए। इनमें फॉर्म 6 का बदलाव और ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर का केंद्रीकृत नियंत्रण शामिल था। इसी सॉफ्टवेयर पर एसआईआर की वोटर लिस्ट बनी और आज हर सूची यहीं दर्ज है।

मई में विवेक जोशी ने इसे वोटर लिस्ट डेटाबेस का धीरे-धीरे होता केंद्रीकरण कहा। उन्होंने इसका ऑडिट मांगा था। 14 अगस्त को संधू ने ईआरओ (Electoral Registration Officer) और डीईओ (District Election Officer) के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने डीजी (आईटी) (Director General, Information Technology) की भूमिका पर सवाल किया।

चुनाव आयोग में आंतरिक कलह: दो आयुक्तों की आपत्तियों पर नौ नए फैसले, वोटर लिस्ट पर सवाल | Internal conflict in Election Commission: Nine new decisions on objections of two commissioners, questions on voter list
चुनाव आयोग के 9 फैसले: संधू-जोशी की आपत्तियों के बाद बदले नियम, फॉर्म 6 पर सवाल बरकरार
27 Sept 2026 ,
By Sumit Kumar
शनिवार को हुई बैठक में चुनाव आयोग ने नौ बड़े फैसले लिए। ये फैसले चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की करीब 10 महीने पुरानी आपत्तियों के जवाब माने जा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में एजेंडा बांटने से लेकर आईटी सिस्टम तक कई बदलाव किए गए।
शनिवार को हुई बैठक में चुनाव आयोग ने नौ बड़े फैसले लिए। ये फैसले चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की करीब 10 महीने पुरानी आपत्तियों के जवाब माने जा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में एजेंडा बांटने से लेकर आईटी सिस्टम तक कई बदलाव किए गए।

संधू ने उठाया कानूनी अधिकार का सवाल

वोटर लिस्ट से जुड़ी सारी जिम्मेदारी ईआरओ, डीईओ और सीईओ की है। फिर भी डीजी (आईटी) ने एक्सेस का नियंत्रण केंद्रीकृत कर दिया है। डीजी (आईटी) के पास कानूनी अधिकार नहीं है कि वह वैधानिक अधिकारियों की पहुंच रोके।
By: सुखबीर सिंह संधू, चुनाव आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग
दोनों नोट का जवाब 26 सितंबर की बैठक तक नहीं मिला। अप्रैल के बाद Election Commission of India की यह दूसरी पूरी बैठक थी। इसमें ईसीआईनेट की समीक्षा के लिए कमेटी बनी। इसमें आईआईटी (IIT – Indian Institute of Technology) या ट्रिपल आईटी का स्वतंत्र एक्सपर्ट रहेगा।

गोवा के 97 वोटर क्यों रहे बाहर

गोवा का मामला संधू की इसी चिंता से जुड़ा है। वहां 97 वोटरों के नाम ड्राफ्ट स्टेज पर कटे थे। उन्होंने दस्तावेज दिए और ईआरओ ने उन्हें पात्र माना। फिर पता चला कि ईसीआईनेट में कटा नाम वापस जोड़ने का विकल्प ही नहीं है।

गोवा के सीईओ ने सात दिन में आयोग को आठ बार लिखा। हर पत्र की कॉपी डीजी (आईटी) सीमा खन्ना को भी गई। जवाब नहीं आया और 21 फरवरी को फाइनल लिस्ट इनके बिना जारी हुई। अब इन्हें भी फॉर्म 6 से दोबारा जोड़ना होगा।

महाराष्ट्र: जल्दबाजी में नाम नहीं कटेंगे

महाराष्ट्र में एसआईआर अभी चल रहा है और यह ऐसा सबसे बड़ा राज्य है। गुरुवार को सीईओ ऑफिस ने मुंबई सिटी और मुंबई उपनगर के अफसरों को नोट भेजा। नाम हटाने से पहले वोटर को दस्तावेज देने का पूरा मौका मिलेगा। नोट के मुताबिक, इसके बाद सुनवाई होगी और आदेश पास होगा।

3, 4, 10 और 11 अक्टूबर को लगेंगे विशेष कैंप

'अनमैप्ड' या 'लॉजिकल गड़बड़ी' वाले नोटिस पर अब सुनवाई में आना जरूरी नहीं है। बीएलओ (BLO – Booth Level Officer) वोटर के घर जाकर दस्तावेज लेंगे। वे इन्हें अपलोड करेंगे और ईआरओ फैसला करेगा। यह सूचना फोन या वॉट्सऐप से दी जाएगी।

महाराष्ट्र की ड्राफ्ट लिस्ट में 1.22 करोड़ रिकॉर्ड जांच के लिए चिह्नित हुए। इनमें 62.48 लाख में रिश्तेदारों की जानकारी में गड़बड़ी है। 59.75 लाख रिकॉर्ड पिछली लिस्ट में किसी रिश्तेदार से मैप नहीं हो सके। ईसीआईनेट और बीएलओ ऐप के बदलाव अभी आयोग स्तर पर जारी हैं।

यह खबर क्यों जरूरी है

वोट डालना लोकतंत्र में नागरिक की सबसे बड़ी ताकत है। संविधान का अनुच्छेद 326 हर वयस्क नागरिक को यह अधिकार देता है। 13 करोड़ नाम कटना छोटी बात नहीं है।

एक भी पात्र नाम गलत कटा, तो उसकी आवाज चुनाव से बाहर हो जाती है। यह खबर बताती है कि छूटे लोग कैसे लौट सकते हैं। साथ ही, यह संवैधानिक संस्था के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल भी उठाती है।

FAQ

  1. एसआईआर के बाद मतदाता सूची में नाम कैसे जोड़ें?
    फॉर्म 6 भरकर नाम जुड़ेगा। जिन 20 राज्यों में एसआईआर पूरा हो चुका है, वहां सामान्य वैधानिक फॉर्म चलेगा। जरूरी मामलों में अफसर घर जाकर भी फॉर्म भरवाएंगे।
  2. क्या फॉर्म 6 में एसआईआर वाला सवाल अब भी रहेगा?
    सिर्फ एसआईआर चरण के दौरान रहेगा। बाकी समय रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 वाला फॉर्म चलेगा। यह बात आयोग के 29 सितंबर के पत्र में है।
  3. महाराष्ट्र में नोटिस मिलने पर क्या सुनवाई में जाना होगा?
    'अनमैप्ड' या 'लॉजिकल गड़बड़ी' वाले नोटिस पर नहीं जाना होगा। बीएलओ घर से दस्तावेज लेकर अपलोड करेंगे। 3, 4, 10 और 11 अक्टूबर को विशेष कैंप भी लगेंगे।
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