अब एक घंटे में मिलेगी कैशलेस इलाज की मंजूरी, IRDAI New Rules से अस्पताल में होगी नो वेटिंग
Kaushiki | Apr 05, 2026, 11:39 IST
HEALTH INSURANCE
IRDAI ने कैशलेस क्लेम के लिए नए नियम बनाए हैं। अब एक घंटे में प्री-ऑथराइजेशन और तीन घंटे में डिस्चार्ज मंजूरी देना अनिवार्य होगा। डे-केयर इलाज भी कवर होंगे।
IRDAI New Rules: आज के दौर में हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि जरूरत के वक्त बड़ी राहत की तरह होती है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि अस्पताल में भर्ती होते समय बहुत समय लगता है। डिस्चार्ज के वक्त भी इंश्योरेंस कंपनी की मंजूरी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। अब भारत के बीमा नियामक IRDAI ने इन शिकायतों को खत्म कर दिया है।
सरकार और IRDAI ने मिलकर पॉलिसीधारकों के हक में बड़े फैसले लिए हैं। अब बीमा कंपनियों को अपनी सर्विस की रफ्तार दोगुनी करनी होगी। मरीजों को बेवजह बिलिंग काउंटर पर घंटों खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। चलिए विस्तार से जानते हैं कि आपके लिए क्या कुछ नया बदल गया है।
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इंश्योरेंस कंपनियों के लिए अब समय की पाबंदी बहुत सख्त हो गई है। IRDAI ने आदेश दिया है कि कैशलेस मंजूरी अब एक घंटे के अंदर देनी होगी। जैसे ही आप अस्पताल पहुंचेंगे, कंपनी को तुरंत आपका इलाज शुरू करवाना होगा। इसे प्री-ऑथराइजेशन कहा जाता है। इस प्रोसेस में पहले 3-4 घंटे लग जाते थे। अब यह प्रक्रिया सिर्फ 60 मिनट के भीतर पूरी करनी अनिवार्य है।
डिस्चार्ज के समय भी कंपनियां अब ज्यादा देर तक फाइल नहीं रोक पाएंगी। अस्पताल से छुट्टी के लिए फाइनल मंजूरी भी अब तीन घंटे में देनी होगी। इस नियम का मकसद मरीजों को समय पर इलाज और छुट्टी दिलाना है।
फाइनेंस मंत्रालय ने भी इस पर अपनी सहमति जताई है। अब अस्पताल और बीमा कंपनियां मिलकर काम करने को बाध्य होंगी। इससे इलाज की क्वालिटी और पेशेंट का अनुभव पहले से बहुत बेहतर होगा।
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पहले नियम था कि क्लेम के लिए 24 घंटे भर्ती होना जरूरी है। अब कई मॉडर्न इंश्योरेंस कंपनियों ने इस शर्त को पूरी तरह हटा दिया है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड (ICICI Lombard) और निवा बूपा (Niva Bupa) जैसी कंपनियां दो घंटे में क्लेम देती हैं। अब डे-केयर ट्रीटमेंट की सुविधा लगभग हर पॉलिसी में मौजूद होती है। इसका मतलब है कि कुछ ही घंटों के इलाज पर क्लेम मिलेगा।
तकनीक के बढ़ने से अब कई सर्जरी कुछ ही घंटों में हो जाती हैं। मोतियाबिंद का ऑपरेशन अब महज कुछ ही घंटों की प्रक्रिया रह गई है। डायलिसिस और कीमोथैरेपी के लिए भी रातभर रुकना जरूरी नहीं होता।
टॉन्सिल, किडनी स्टोन और स्किन ग्राफ्टिंग भी डे-केयर में आती हैं। साइनस का इलाज और एंडोस्कोपी के क्लेम भी अब आसानी से मिलते हैं। बस याद रखें कि पॉलिसी लेने से पहले उसकी लिस्ट जरूर चेक करें।
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भारतीय बाजार में हेल्थ इंश्योरेंस की मांग तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर ने 9% की ग्रोथ हासिल की है। कुल हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम अब 1.2 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया।
कोरोना महामारी के बाद लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक हुए हैं। लोग अब मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से पूरी तैयारी रखना चाहते हैं। बेहतर हेल्थकेयर फाइनेंसिंग ने भी आम जनता का भरोसा काफी बढ़ा दिया है।
बीमा कंपनियों के काम करने के तरीके में अब काफी सुधार दिखा है। अब कंपनियां पहले के मुकाबले ज्यादा क्लेम पास कर रही हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में क्लेम सेटलमेंट रेशियो 87.5% तक पहुंच गया है।
पिछले साल यह आंकड़ा केवल 82.46% के आसपास ही बना हुआ था। शिकायतों के निपटारे के लिए 'बीमा भरोसा' पोर्टल बहुत प्रभावी साबित हुआ है। लाखों शिकायतों में से लगभग 93% शिकायतों का समाधान तुरंत किया गया है।
कई लोग इस बात से परेशान हैं कि प्रीमियम हर साल बढ़ता है। इसका सबसे बड़ा कारण पॉलिसीधारक की लगातार बढ़ती हुई उम्र है। उम्र बढ़ने के साथ बीमार होने का खतरा भी बढ़ता जाता है।
इसके अलावा, आजकल लोग ज्यादा सम इंश्योर्ड वाली पॉलिसी ले रहे हैं। मेडिकल इन्फ्लेशन यानी इलाज के खर्च में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। पॉलिसियों में अब ओपीडी और वेलनेस जैसे नए फीचर्स (New changes in IRDAI general insurance rules) भी शामिल हैं।
![HEALTH]()
IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) भारत की एक बहुत बड़ी सरकारी संस्था है। इसे आप इंश्योरेंस सेक्टर का बॉस या वॉचडॉग कह सकते हैं।
इसका मुख्य ऑफिस हैदराबाद में स्थित है। IRDAI का सबसे बड़ा काम पॉलिसीधारकों के हक की रक्षा करना है। यह सुनिश्चित करता है कि बीमा कंपनियां (हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी)अपनी शर्तों का सही पालन करें और किसी का क्लेम बेवजह न रुकें।
यह नई गाइडलाइन्स बनाता है, जैसे कि अब एक घंटे में कैशलेस मंजूरी वाला नियम। सरल शब्दों में, यह इंश्योरेंस कंपनियों को रेगुलेट और कंट्रोल करता है ताकि पूरा सिस्टम पारदर्शी (प्रीमियम सुविधाएं) और भरोसेमंद बना रहे।
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सरकार और IRDAI ने मिलकर पॉलिसीधारकों के हक में बड़े फैसले लिए हैं। अब बीमा कंपनियों को अपनी सर्विस की रफ्तार दोगुनी करनी होगी। मरीजों को बेवजह बिलिंग काउंटर पर घंटों खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। चलिए विस्तार से जानते हैं कि आपके लिए क्या कुछ नया बदल गया है।
हेल्थ इंश्योरेंस वालों के लिए गुड न्यूज, अब अस्पताल से छुट्टी के लिए नहीं करना होगा घंटों इंतजार, इरडा ने बदला नियम
कैशलेस क्लेम के लिए अब गोल्डन ऑवर नियम
डिस्चार्ज के समय भी कंपनियां अब ज्यादा देर तक फाइल नहीं रोक पाएंगी। अस्पताल से छुट्टी के लिए फाइनल मंजूरी भी अब तीन घंटे में देनी होगी। इस नियम का मकसद मरीजों को समय पर इलाज और छुट्टी दिलाना है।
फाइनेंस मंत्रालय ने भी इस पर अपनी सहमति जताई है। अब अस्पताल और बीमा कंपनियां मिलकर काम करने को बाध्य होंगी। इससे इलाज की क्वालिटी और पेशेंट का अनुभव पहले से बहुत बेहतर होगा।
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24 घंटे भर्ती होने की शर्त अब हुई पुरानी
डे- केयर ट्रीटमेंट में क्या-क्या शामिल है
टॉन्सिल, किडनी स्टोन और स्किन ग्राफ्टिंग भी डे-केयर में आती हैं। साइनस का इलाज और एंडोस्कोपी के क्लेम भी अब आसानी से मिलते हैं। बस याद रखें कि पॉलिसी लेने से पहले उसकी लिस्ट जरूर चेक करें।
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हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में आई जबरदस्त ग्रोथ
कोरोना महामारी के बाद लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक हुए हैं। लोग अब मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से पूरी तैयारी रखना चाहते हैं। बेहतर हेल्थकेयर फाइनेंसिंग ने भी आम जनता का भरोसा काफी बढ़ा दिया है।
क्लेम सेटलमेंट में भी आया बड़ा उछाल
पिछले साल यह आंकड़ा केवल 82.46% के आसपास ही बना हुआ था। शिकायतों के निपटारे के लिए 'बीमा भरोसा' पोर्टल बहुत प्रभावी साबित हुआ है। लाखों शिकायतों में से लगभग 93% शिकायतों का समाधान तुरंत किया गया है।
प्रीमियम बढ़ने की असली वजह क्या है
इसके अलावा, आजकल लोग ज्यादा सम इंश्योर्ड वाली पॉलिसी ले रहे हैं। मेडिकल इन्फ्लेशन यानी इलाज के खर्च में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। पॉलिसियों में अब ओपीडी और वेलनेस जैसे नए फीचर्स (New changes in IRDAI general insurance rules) भी शामिल हैं।
HEALTH
IRDAI क्या है
इसका मुख्य ऑफिस हैदराबाद में स्थित है। IRDAI का सबसे बड़ा काम पॉलिसीधारकों के हक की रक्षा करना है। यह सुनिश्चित करता है कि बीमा कंपनियां (हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी)अपनी शर्तों का सही पालन करें और किसी का क्लेम बेवजह न रुकें।
यह नई गाइडलाइन्स बनाता है, जैसे कि अब एक घंटे में कैशलेस मंजूरी वाला नियम। सरल शब्दों में, यह इंश्योरेंस कंपनियों को रेगुलेट और कंट्रोल करता है ताकि पूरा सिस्टम पारदर्शी (प्रीमियम सुविधाएं) और भरोसेमंद बना रहे।
IRDAI क्या काम करता है
- लाइसेंस देना: नई इंश्योरेंस कंपनियों को काम करने की परमिशन देता है।
- नियम बनाना: क्लेम सेटलमेंट और प्रीमियम से जुड़े सख्त रूल्स तय करता है।
- विवाद सुलझाना: अगर कंपनी क्लेम नहीं देती, तो आप इनके पास शिकायत कर सकते हैं।
- सेक्टर की ग्रोथ: भारत में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए नई योजनाएं लाता है।
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