भ्रष्टाचार के आरोप में आईएएस पद्मा जायसवाल बर्खास्त, जानें कौन हैं ये अधिकारी
Amresh Kushwaha | May 16, 2026, 13:26 IST
ias padma jaiswal dismissed corruption charges agmut cadre
केंद्र ने भ्रष्टाचार के आरोपों में 2003 बैच की आईएएस अधिकारी पद्मा जायसवाल को बर्खास्त कर दिया है। यह मामला 2007-08 का है जब वे अरुणाचल प्रदेश में उपायुक्त थीं। वहीं, पद्मा ने कहा उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
17 साल पुराने मामले में सेवारत IAS बर्खास्त
पद्मा जायसवाल दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं। लंबी अनुशासनात्मक प्रक्रिया के बाद उन्हें यह अंजाम भुगतना पड़ा है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी हुआ आदेश
पद्मा जायसवाल एजीएमयूटी (AGMUT - Arunachal Pradesh, Goa, Mizoram and Union Territories) कैडर की अधिकारी हैं। इस कैडर के मामलों में डीओपीटी, गृह मंत्रालय की सिफारिशों के आधार पर फैसला करता है।
पद्मा जायसवाल ने खुद क्या कहा?
कौन हैं पद्मा जायसवाल?
वे इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (Institute of Company Secretaries of India) द्वारा प्रमाणित कंपनी सेक्रेटरी भी हैं। यूजीसी (University Grants Commission) रिसर्च फेलो के तौर पर भी काम किया है। उनकी विशेषज्ञता बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और अंतरराष्ट्रीय मामलों में रही है।
2007-08 में क्या हुआ था?
इसके बाद गृह मंत्रालय ने अखिल भारतीय सेवा (All India Service) के अनुशासन एवं अपील नियमों के तहत कार्रवाई शुरू की थी। 2009 और 2010 में आरोप पत्र सौंपे गए थे। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC - Central Vigilance Commission) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से परामर्श लिया गया है। यूपीएससी ने उन्हें सेवा से हटाने की सिफारिश की है।
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FAQ
- किसी IAS अधिकारी को बर्खास्त करने की प्रक्रिया क्या होती है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत किसी सरकारी अधिकारी को बर्खास्त करने से पहले एक तय प्रक्रिया का पालन जरूरी है। पहले जांच होती है, फिर आरोप पत्र दिया जाता है। अधिकारी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है। इसके बाद यूपीएससी और केंद्रीय सतर्कता आयोग से सलाह ली जाती है। अंत में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद आदेश जारी होता है। यह प्रक्रिया कई साल तक चल सकती है। - एजीएमयूटी कैडर क्या होता है?
एजीएमयूटी यानी AGMUT कैडर में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इस कैडर के आईएएस अधिकारी इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात होते हैं। इनसे जुड़े अनुशासनात्मक मामलों में डीओपीटी और गृह मंत्रालय मिलकर फैसला करते हैं। यही वजह है कि पद्मा जायसवाल के मामले में अधिकार क्षेत्र को लेकर कानूनी विवाद हुआ था।
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