इंटरफेथ मैरिज : इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, बिना धर्म बदले शादी अवैध
Jitendra Shrivastava | Jul 28, 2025, 19:09 IST
Photograph: (thesootr)
इलाहाबाद हाईकोर्ट का नया फैसला कहता है कि बिना धर्म परिवर्तन के अंतर-धार्मिक शादियां अवैध मानी जाएंगी। यह फैसला धर्मांतरण और लव जिहाद से जुड़ी बहसों के बीच आया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में निर्णय दिया कि बिना धर्म परिवर्तन के अंतर-धार्मिक शादी ( इंटरफेथ मैरिज ) अवैध मानी जाएगी। इस फैसले ने धर्मांतरण और लव जिहाद पर चल रही बहस को ताजा किया है। अदालत ने आर्य समाज जैसी संस्थाओं द्वारा बिना धर्म परिवर्तन के विवाह प्रमाण पत्र जारी करने पर सवाल उठाया है।
इस मामले में जस्टिस प्रशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह उन आर्य समाज सोसाइटीज की जांच कराए, जो बिना धर्म परिवर्तन के मैरिज सर्टिफिकेट जारी करती हैं। सरकार को 29 अगस्त तक एक हलफनामे के साथ रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले से साफ है कि अगर धर्म परिवर्तन नहीं हुआ तो शादी को कानूनी मान्यता नहीं दी जाएगी।
ये खबर भी पढ़ें...
लाडकी बहिन योजना में धोखाधड़ी : 14 हजार पुरुषों ने लिया पैसा, अब वसूलेगी सरकार
भारत में अंतर-धार्मिक शादियां स्पेशल मैरिज एक्ट-1954 और विभिन्न धार्मिक कानूनों के तहत आती हैं। इस कानून के तहत अलग-अलग धर्मों के लोग बिना धर्म परिवर्तन किए शादी कर सकते हैं। इस एक्ट के तहत, दोनों पक्षों को 30 दिन तक शादी का नोटिस रजिस्ट्रार के पास सार्वजनिक रूप से दिखाना होता है। अगर इस दौरान किसी भी पक्ष से आपत्ति नहीं आती तो शादी को रजिस्टर कर लिया जाता है।
पर्सनल लॉ के अनुसार, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी और अन्य धार्मिक समूहों के विवाह के लिए अलग-अलग कानून हैं। उदाहरण के लिए, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत, अगर एक मुस्लिम महिला से शादी करनी है, तो पुरुष को इस्लाम धर्म अपनाना पड़ता है।
इसी तरह, मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मुस्लिम पुरुष गैर-मुस्लिम महिला से शादी कर सकता है, लेकिन गैर-मुस्लिम पुरुष मुस्लिम महिला से शादी नहीं कर सकता, जब तक वह इस्लाम धर्म न अपना ले।
ये खबर भी पढ़ें...
ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में चर्चा : राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को चेतावनी, गोगोई ने पूछा- आतंकवादी कैसे घुसे
उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 के तहत, धर्म परिवर्तन को सख्ती से नियंत्रित किया गया है। इसके तहत, किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने के लिए पहले जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होती है।
इस कानून के तहत, विवाह के संदर्भ में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जाती है और इसे अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन करने पर अपराध माना जाता है।
भारत में अंतर-धार्मिक शादियों (Interfaith Marriages) के संबंध में विभिन्न धर्मों के अलग-अलग नियम और कानून हैं। ये कानून पर्सनल लॉ (Personal Laws) और स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 (Special Marriage Act, 1954) के तहत आते हैं-
ये खबर भी पढ़ें...
दिव्या देशमुख ने शतरंज की दुनिया में मचाया धमाल, कोनेरू हम्पी को हराकर बनीं वर्ल्ड चैम्पियन
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उन अंतर-धार्मिक जोड़ों पर प्रभाव डाल सकता है जो धर्म परिवर्तन के बिना आर्य समाज जैसे संस्थानों में विवाह करते हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगर विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नहीं हुआ है और धर्म परिवर्तन नहीं किया गया है, तो वह विवाह वैध नहीं माना जाएगा।
स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत, अंतर-धार्मिक शादियों में धर्म परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती। यह एक्ट धर्मनिरपेक्ष है और इस कानून के तहत विवाह करने के लिए किसी भी धार्मिक अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती है।
हालांकि, कोर्ट ने यह माना है कि आर्य समाज में हुई शादियों को इस फैसले के तहत अवैध माना जा सकता है, क्योंकि यह हिंदू विवाह अधिनियम के दायरे में आता है।
ये खबर भी पढ़ें...
बिहार में अजीबोगरीब घटना : कुत्ते को मिला निवास प्रमाण पत्र, सोशल मीडिया पर वायरल सर्टिफिकेट
पर्सनल लॉ के तहत अंतर-धार्मिक विवाह के लिए एक पक्ष को दूसरे धर्म को अपनाना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, मुस्लिम पुरुष गैर-मुस्लिम महिला से शादी कर सकता है, लेकिन गैर-मुस्लिम पुरुष मुस्लिम महिला से शादी नहीं कर सकता, जब तक वह इस्लाम धर्म न अपना ले। इसी तरह, अन्य धार्मिक कानूनों में भी ऐसे ही नियम होते हैं।
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें 📢 🔃 🤝💬👩👦👨👩👧👧
कोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट
ये खबर भी पढ़ें...
लाडकी बहिन योजना में धोखाधड़ी : 14 हजार पुरुषों ने लिया पैसा, अब वसूलेगी सरकार
देश में अंतर-धार्मिक विवाह कानून
क्या कहता है पर्सनल लॉ?
इसी तरह, मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मुस्लिम पुरुष गैर-मुस्लिम महिला से शादी कर सकता है, लेकिन गैर-मुस्लिम पुरुष मुस्लिम महिला से शादी नहीं कर सकता, जब तक वह इस्लाम धर्म न अपना ले।
ये खबर भी पढ़ें...
ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में चर्चा : राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को चेतावनी, गोगोई ने पूछा- आतंकवादी कैसे घुसे
धर्म परिवर्तन और लव जिहाद का मुद्दा
इस कानून के तहत, विवाह के संदर्भ में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जाती है और इसे अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन करने पर अपराध माना जाता है।
पर्सनल लॉ और स्पेशन मैरिज एक्ट 1954...
5 प्रमुख बिंदुओं से समझें किस धर्म में क्या है कानून...1. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955)
2. मुस्लिम पर्सनल लॉ (Muslim Personal Law)
3. ईसाई और पारसी विवाह कानून (Christian and Parsi Marriage Laws)
4. स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 (Special Marriage Act, 1954)
5. उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021
|
दिव्या देशमुख ने शतरंज की दुनिया में मचाया धमाल, कोनेरू हम्पी को हराकर बनीं वर्ल्ड चैम्पियन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का असर
क्या कहता है कानून?
हालांकि, कोर्ट ने यह माना है कि आर्य समाज में हुई शादियों को इस फैसले के तहत अवैध माना जा सकता है, क्योंकि यह हिंदू विवाह अधिनियम के दायरे में आता है।
ये खबर भी पढ़ें...
बिहार में अजीबोगरीब घटना : कुत्ते को मिला निवास प्रमाण पत्र, सोशल मीडिया पर वायरल सर्टिफिकेट
पर्सनल लॉ और अंतर-धार्मिक शादियां
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें 📢 🔃 🤝💬👩👦👨👩👧👧
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari