ईरान-इजराइल युद्ध का 62वां दिन: ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को स्ट्रेट ऑफ ट्रंप करार दिया! कहा- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे
Amresh Kushwaha | Apr 30, 2026, 08:56 IST
iran israel america war updates
ईरान-इजराइल युद्ध के 62वें दिन राष्ट्रपति ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर स्ट्रेट ऑफ ट्रंप करने का दावा किया! साथ ही, ईरान को परमाणु हथियार न बनाने की सख्त चेतावनी दी है।
Iran Israel War Update: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रही जंग अब बेहद गंभीर हो गई है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को स्ट्रेट ऑफ ट्रंप नाम वाले पोस्ट किए हैं। अमेरिका इस युद्ध पर अब तक 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है।
नौसैनिक घेराबंदी के कारण तेल की कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गई हैं। ट्रंप का दावा है कि ईरान की मिसाइल शक्ति काफी कम हो गई। पुतिन और ट्रंप के बीच भी करीब नब्बे मिनट बातचीत हुई है। ईरान अब शांति और कूटनीति की दुहाई दे रहा है। ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान को घुटने टेकने ही होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बड़ा दावा किया है। इसमें ट्रंप ने लिखा है कि ईरान से समझौता हो या नहीं, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। ईरान को इस युद्ध से काफी क्षति हुई है और उसे नया हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। इसके साथ ही ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को स्ट्रेट ऑफ ट्रंप करार देने वाले पोस्ट को अपनी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।
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युद्ध कभी सस्ता नहीं होता और अमेरिका इसका सबूत है। पिछले दो महीनों में ही अमेरिका ईरान युद्ध पर 25 अरब डॉलर (करीब 2.37 लाख करोड़ रुपये) खर्च कर चुका है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी जूल्स डब्ल्यू. हर्स्ट ने संसद में बताया कि इस मोटे पैसे का बड़ा हिस्सा हथियारों, मिसाइलों और गोला-बारूद की भेंट चढ़ गया है।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
अमेरिकी सेना ने ईरान की चारों तरफ से घेराबंदी कर दी है। सेंट्रल कमांड का कहना है कि उनकी नौसैनिक नाकेबंदी इतनी जबरदस्त है कि उन्होंने 42 कमर्शियल जहाजों को ईरान के बंदरगाहों पर जाने ही नहीं दिया और उन्हें बीच रास्ते से वापस लौटा दिया।
आलम ये है कि 41 तेल टैंकरों में करीब 7 करोड़ बैरल तेल भरा पड़ा है, लेकिन ईरान उसे बेच नहीं पा रहा। इस वजह से ईरान की सरकार को अब तक 6 अरब डॉलर से ज्यादा की चपत लग चुकी है।
ट्रंप अब जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों की संख्या कम करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके संकेत दिए हैं। दरअसल, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कह दिया था कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिका की बेइज्जती हो रही है, जिससे ट्रंप भड़क गए।
ट्रंप ने दो-टूक कहा कि मर्ज ईरान के इरादों को समझ ही नहीं पा रहे हैं। ट्रंप पहले भी नाटो देशों से खफा रहे हैं कि वे इस युद्ध में अमेरिका और इजराइल का साथ नहीं दे रहे। अगर सैनिक कम हुए, तो जर्मनी के रामस्टीन एयर बेस पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
ट्रंप की इस नाकेबंदी का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह नाकेबंदी महीनों चल सकती है, जिसके डर से कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 4 साल के सबसे ऊंचे स्तर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। ट्रंप का तर्क है कि ईरान के बंदरगाहों को ब्लॉक करना, उन पर बम गिराने से कहीं ज्यादा असरदार तरीका है।
युद्ध की तपिश अब खेलों तक भी पहुंच गई है। ईरान के फुटबॉल अधिकारी कनाडा में होने वाली FIFA कांग्रेस में शामिल होने गए थे, लेकिन टोरंटो एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों के 'खराब बर्ताव' से नाराज होकर वे अगली ही फ्लाइट से वापस ईरान लौट गए। बता दें कि 2026 का वर्ल्ड कप कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको मिलकर होस्ट करने वाले हैं।
ट्रंप ने ओवल ऑफिस से ईरान को सीधी चेतावनी दी है। उनका दावा है कि ईरान की मिसाइल बनाने की 80% ताकत खत्म हो चुकी है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को बस 'हार मानते हैं' कहना होगा। ट्रंप का सीधा सा नियम है- जब तक ईरान परमाणु हथियार न बनाने की बात पर राजी नहीं होता, तब तक कोई समझौता नहीं होगा।
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि जंग किसी भी मसले का हल नहीं है। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने कहा कि वे हफ्तों से शांति का प्रस्ताव दे रहे हैं। उनका मानना है कि इस संकट से निकलने का इकलौता रास्ता बराबरी के आधार पर बातचीत और कूटनीति ही है।
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के प्रमुख हेगसेथ ने सीना ठोक कर कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ यह जंग पूरी तरह जीत रहा है। जब उनसे संसद में पूछा गया कि क्या उन्हें होर्मुज स्ट्रेट (दुनिया का सबसे जरूरी तेल सप्लाई रूट) बंद होने का डर नहीं था, तो उन्होंने कहा कि हमने हर खतरे का हिसाब पहले ही लगा लिया था और यह अमेरिका के लिए एक बड़ी सैन्य कामयाबी है।
खबर है कि बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच फोन पर पूरे 90 मिनट तक लंबी बातचीत हुई। दोनों ने यूक्रेन और ईरान के युद्ध पर खुलकर चर्चा की। ट्रंप ने इस बातचीत को काफी पॉजिटिव बताया। उन्होंने पुतिन को एक छोटा सा सीजफायर (युद्धविराम) करने की सलाह दी है।
ट्रंप का मानना है कि चूंकि वे पुतिन को पुराने वक्त से जानते हैं, इसलिए पुतिन उनकी बात मान सकते हैं। दिलचस्प बात ये है कि पुतिन ने ईरान के यूरेनियम वाले मुद्दे पर मदद की पेशकश की है, जो इस जंग को रोकने में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। हालांकि, ट्रंप चाहते हैं कि पुतिन फिलहाल अपना पूरा ध्यान यूक्रेन युद्ध रुकवाने पर लगाएं।
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नौसैनिक घेराबंदी के कारण तेल की कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गई हैं। ट्रंप का दावा है कि ईरान की मिसाइल शक्ति काफी कम हो गई। पुतिन और ट्रंप के बीच भी करीब नब्बे मिनट बातचीत हुई है। ईरान अब शांति और कूटनीति की दुहाई दे रहा है। ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान को घुटने टेकने ही होंगे।
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1. समुद्र में ईरान की नाकेबंदी
आलम ये है कि 41 तेल टैंकरों में करीब 7 करोड़ बैरल तेल भरा पड़ा है, लेकिन ईरान उसे बेच नहीं पा रहा। इस वजह से ईरान की सरकार को अब तक 6 अरब डॉलर से ज्यादा की चपत लग चुकी है।
2. जर्मनी से विदाई की तैयारी?
ट्रंप ने दो-टूक कहा कि मर्ज ईरान के इरादों को समझ ही नहीं पा रहे हैं। ट्रंप पहले भी नाटो देशों से खफा रहे हैं कि वे इस युद्ध में अमेरिका और इजराइल का साथ नहीं दे रहे। अगर सैनिक कम हुए, तो जर्मनी के रामस्टीन एयर बेस पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
3. तेल की कीमतों में लगी आग
4. फुटबॉल के मैदान पर भी तनातनी
5. ट्रंप का सरेंडर वाला अल्टीमेटम
6. ईरान की कूटनीति वाली गुहार
7. हम जंग जीत रहे हैं - अमेरिका का दावा
8. ट्रंप-पुतिन की लंबी बातचीत
ट्रंप का मानना है कि चूंकि वे पुतिन को पुराने वक्त से जानते हैं, इसलिए पुतिन उनकी बात मान सकते हैं। दिलचस्प बात ये है कि पुतिन ने ईरान के यूरेनियम वाले मुद्दे पर मदद की पेशकश की है, जो इस जंग को रोकने में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। हालांकि, ट्रंप चाहते हैं कि पुतिन फिलहाल अपना पूरा ध्यान यूक्रेन युद्ध रुकवाने पर लगाएं।
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