मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण भारत को अरबों का नुकसान! जानें 22 दिन में कहां कितना असर
Aman Vaishnav | Mar 21, 2026, 15:06 IST
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ईरान में युद्ध शुरू हुए अब 22 दिन बीत चुके हैं। इस जंग का सबसे बुरा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। जंग के कारण देश में महंगाई और सप्लाई चेन का संकट गहरा गया है। पूरा मामला जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़िए।
ईरान में जंग को शुरू हुए 22 दिन हो गए हैं। इस जंग के चलते दुनिया भर में काफी बदलाव आ चुका है। भारत समेत कई बड़े देशों पर इसका गहरा असर पड़ा है। इस युद्ध ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार, व्यापार रास्तों और अर्थव्यवस्थाओं को हिला कर रख दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस जंग से खासतौर पर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। भारत मध्य पूर्व से 85% से ज्यादा कच्चा तेल और गैस मंगवाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना 100 से ज्यादा तेल टैंकर गुजरते थे। सबसे बड़ी बात ये है कि इस तेल पर निर्भर होकर कई देशों की अर्थव्यवस्था चलती थी। अब वो जलडमरूमध्य लगभग ठप पड़ा है।
इस कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई हैं। इसका असर अब मुद्रास्फीति, रुपए की कमजोरी और सप्लाई चेन पर गंभीर रूप से पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमत और प्रीमियम
ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। पहले कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 से 73 डॉलर प्रति बैरल थीं। अब ये बढ़कर 108 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर भारत के तेल बिल पर पड़ा है।
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर प्रीमियम पेट्रोल की कीमत पर भी हुआ है। इससे भारत में अब में प्रति लीटर 2.30 रुपए की बढ़ोतरी हो गई है।
इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। तेल कंपनियों ने डीजल की कीमत में 22 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रसोई गैस की भी किल्लत बढ़ गई है। भारत अपनी गैस खपत का ज्यादातर हिस्सा गल्फ देशों से मंगाता है अब वहां की स्थिति भी खराब हो गई है।
ईरान की ओर से गैस फील्ड पर हमले किए जा रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट भी जंग की वजह से प्रभावित है। इसके अलावा कई खाड़ी देशों ने भारत को गैस की सप्लाई बंद कर दी है। एलएनजी की कीमतों में उछाल और शिपिंग की लागत बढ़ने से भारत में गैस की किल्लत और भी बढ़ गई है।
ईरान युद्ध के बाद भारत में रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है। 7 मार्च 2026 से घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा हो गया है। वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपए की बढ़त हुई है।
इसके अलावा गैस सप्लाई में कमी के कारण भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में चाय, समोसे जैसी खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
ईरान के युद्ध का असर अब ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर भी पड़ने लगा है। जोमैटो ने 20 मार्च 2026 से प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा दी है। पहले यह 12.50 रुपए थी अब यह 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर हो गई है।
इसके आलावा दुनिया भर में यूरिया की जो बिक्री होती है उसमें से कतर अकेले 10 फीसदी का उत्पादन करता है। ईरान के हमले की वजह से कतर के कई प्लांट बंद हो गए हैं। इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। कुछ दिनों बाद यहां खाद की कमी हो सकती है।
युद्ध के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले तेजी से गिर रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले रुपया लगभग 90.9-91 रुपए प्रति डॉलर था। अब यह अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचने वाला है। 20 मार्च को एक डॉलर की कीमत 93 रुपए 70 पैसे थी।
ईरान युद्ध के कारण भारतीय शेयर बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। पिछले 3 सप्ताह में इस युद्ध के चलते भारतीय शेयर बाजार को बड़ा नुकसान हुआ है। सेंसेक्स में लगभग छह हजार से छह हजार 750 अंकों की गिरावट आई है, जबकि निफ्टी में दौ हजार अंकों की कमी आई है।
ईरान युद्ध के बाद भारत के पूंजी बाजार से विदेशी निवेशकों ने भारी रकम निकाल ली है। पिछले तीन हफ्तों में लगभग 52 हजार करोड़ रुपए का पैसा बाहर चला गया है।
युद्ध के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बहुत बदलाव हो रहा है। 19 मार्च को सोने और चांदी की कीमतें अचानक गिर गईं और अब ये अस्थिर हो गई हैं।
ईरान युद्ध के बाद मध्य-पूर्व का हवाई क्षेत्र असुरक्षित हो गया है। इससे एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़े हैं। कई फ्लाइट्स अब ईरान और आसपास के इलाकों से बचते हुए लंबा रूट ले रही हैं। इससे ईंधन की खपत बढ़ गई है। इसका असर टिकटों की कीमतों पर पड़ा है।
मध्य-पूर्व का एयरस्पेस असुरक्षित होने के कारण कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दीं है। ईरान और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते खतरे के कारण दर्जनों अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा है।
इस जंग का असर अब भारत में पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है। पॉलिमर की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे ओडिशा समेत कई राज्यों में प्लास्टिक उद्योग की हालत खराब हो गई है।
अगर पश्चिम एशिया में जंग और तेल की सप्लाई में दिक्कतें जारी रहती हैं, तो अप्रैल के शुरुआत तक प्लास्टिक उत्पादों की कीमतें 50 से 60 प्रतिशत तक और बढ़ सकती हैं।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और रसोई गैस महंगी होने के कारण इलेक्ट्रिक कूकर और इंडक्शन चूल्हों की बिक्री तेजी से बढ़ी है। शहरी इलाकों में लोग एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए इन किफायती और सुरक्षित विकल्पों को पसंद कर रहे हैं।
ईरान और खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना एक बड़ी चुनौती बन गई है। हवाई क्षेत्र बंद होने, उड़ानें रद्द होने और समुद्री रास्तों पर खतरों के कारण निकासी अभियान मुश्किल हो गया है।
ईरान युद्ध के बाद खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। इसका असर वहां काम कर रहे भारतीयों की आय और रोजगार पर पड़ सकता है। इससे भारत आने वाली रेमिटेंस में गिरावट हो सकती है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय हर साल 51-52 अरब डॉलर भारत भेजते हैं।
युद्ध के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण भारत का निर्यात प्रभावित हो गया है। UAE और अन्य खाड़ी देशों तक जाने वाले समुद्री मार्ग महंगे और जोखिमपूर्ण हो गए हैं। शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और डिलीवरी का समय बढ़ने से व्यापार धीमा पड़ गया है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध के कारण भारत का चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुआ है। भारत ने फिलहाल यहां काम रोक दिया है।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस जंग से खासतौर पर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। भारत मध्य पूर्व से 85% से ज्यादा कच्चा तेल और गैस मंगवाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना 100 से ज्यादा तेल टैंकर गुजरते थे। सबसे बड़ी बात ये है कि इस तेल पर निर्भर होकर कई देशों की अर्थव्यवस्था चलती थी। अब वो जलडमरूमध्य लगभग ठप पड़ा है।
इस कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई हैं। इसका असर अब मुद्रास्फीति, रुपए की कमजोरी और सप्लाई चेन पर गंभीर रूप से पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमत और प्रीमियम पेट्रोल पर असर
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर प्रीमियम पेट्रोल की कीमत पर भी हुआ है। इससे भारत में अब में प्रति लीटर 2.30 रुपए की बढ़ोतरी हो गई है।
डीजल और रसोई गैस की किल्लत
ईरान की ओर से गैस फील्ड पर हमले किए जा रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट भी जंग की वजह से प्रभावित है। इसके अलावा कई खाड़ी देशों ने भारत को गैस की सप्लाई बंद कर दी है। एलएनजी की कीमतों में उछाल और शिपिंग की लागत बढ़ने से भारत में गैस की किल्लत और भी बढ़ गई है।
रसोई गैस और खाने पीने की चीज महंगी
इसके अलावा गैस सप्लाई में कमी के कारण भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में चाय, समोसे जैसी खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
ऑनलाइन खाना मंगाना महंगा, खाद की कमी
इसके आलावा दुनिया भर में यूरिया की जो बिक्री होती है उसमें से कतर अकेले 10 फीसदी का उत्पादन करता है। ईरान के हमले की वजह से कतर के कई प्लांट बंद हो गए हैं। इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। कुछ दिनों बाद यहां खाद की कमी हो सकती है।
भारतीय रुपया और शेयर मार्केट में नुकसान
ईरान युद्ध के कारण भारतीय शेयर बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। पिछले 3 सप्ताह में इस युद्ध के चलते भारतीय शेयर बाजार को बड़ा नुकसान हुआ है। सेंसेक्स में लगभग छह हजार से छह हजार 750 अंकों की गिरावट आई है, जबकि निफ्टी में दौ हजार अंकों की कमी आई है।
सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव
युद्ध के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बहुत बदलाव हो रहा है। 19 मार्च को सोने और चांदी की कीमतें अचानक गिर गईं और अब ये अस्थिर हो गई हैं।
हवाई यात्रा हुई महंगी
मध्य-पूर्व का एयरस्पेस असुरक्षित होने के कारण कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दीं है। ईरान और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते खतरे के कारण दर्जनों अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा है।
प्लास्टिक उद्योग हो सकता है ठप
अगर पश्चिम एशिया में जंग और तेल की सप्लाई में दिक्कतें जारी रहती हैं, तो अप्रैल के शुरुआत तक प्लास्टिक उत्पादों की कीमतें 50 से 60 प्रतिशत तक और बढ़ सकती हैं।
इंडक्शन चूल्हा की बिक्री बढ़ी
खाड़ी से आने वाला पैसा कम हो सकता है
ईरान युद्ध के बाद खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। इसका असर वहां काम कर रहे भारतीयों की आय और रोजगार पर पड़ सकता है। इससे भारत आने वाली रेमिटेंस में गिरावट हो सकती है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय हर साल 51-52 अरब डॉलर भारत भेजते हैं।
व्यापार पड़ा धीमा, पोर्ट प्रोजेक्ट जोखिम में
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध के कारण भारत का चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुआ है। भारत ने फिलहाल यहां काम रोक दिया है।
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