जनगणना, जातीय गिनती, परिसीमन और महिला आरक्षण: 2026 से शुरू होगी ऐतिहासिक कवायद
Abhilasha Saksena Chakraborty | May 03, 2025, 12:12 IST
Census
देश में जनगणना (Census), जातीय गिनती (Caste Count), परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण (Women Reservation) की प्रक्रिया 2026 से साथ शुरू होगी।
देश में जनगणना (Census), जातीय गणना (Caste Census), परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण (Women Reservation) को लेकर एक ऐतिहासिक चरण की शुरुआत 2026 से होने जा रही है। इसकी टाइमलाइन अब एक-दूसरे से जुड़ चुकी है और केंद्र सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी।
भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना कोविड-19 के कारण स्थगित हो गई। अब यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, जिसमें जातीय गणना (Caste Enumeration) भी शामिल रहेगी। इसके लिए दो कानूनी शर्तें पूरी की जाएंगी:
शर्त 1:
1 जनवरी 2026 से भौगोलिक सीमाएं फ्रीज की जाएंगी, ताकि जनगणना में स्थायी आंकड़े लिए जा सकें। पहले यह सीमा 1 जून 2025 थी, जिसे अब 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाया गया है।
शर्त 2:
जनगणना अधिनियम 1948 में संशोधन किया जाएगा, ताकि जातीय आधार पर आंकड़े इकट्ठा करने की अनुमति मिल सके। इसके लिए विधेयक मानसून सत्र में पेश होगा।
लोकसभा सीटों की संख्या 2001 में 2026 तक फ्रीज कर दी गई थी। अब जब जनगणना 2026 में होगी, तो परिसीमन आयोग 2026 में ही गठित होगा। इसमें लगने वाला समय कुछ इस प्रकार है:
आयोग गठन: 1-2 महीने
डेटा विश्लेषण: 6-12 महीने
सार्वजनिक परामर्श: 6-12 महीने
अंतिम रिपोर्ट: 3-6 महीने
लागू करने की प्रक्रिया: 6-12 महीने
कुल समय: अनुमानित 2-3 साल
महिला आरक्षण अधिनियम 20 सितंबर 2023 को संसद से पारित हुआ था। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि महिलाओं को आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही मिलेगा। यानी लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण 2029 के चुनावों तक लागू हो सकता है।
जनगणना और जातीय गणना के लिए अनुमानित खर्च ₹14,000 करोड़ हो सकता है, यानी प्रति व्यक्ति ₹100 का व्यय।
2019 में केंद्र सरकार ने ₹8,754 करोड़ मंजूर किए थे और NPR अपडेट के लिए ₹3,941 करोड़ रखे गए थे।
विपक्ष ने 2025-26 के बजट में केवल ₹578 करोड़ आवंटित करने को लेकर सवाल उठाए थे।
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जनगणना और जातीय गणना: 1 अप्रैल 2026 से शुरुआत
शर्त 1:
1 जनवरी 2026 से भौगोलिक सीमाएं फ्रीज की जाएंगी, ताकि जनगणना में स्थायी आंकड़े लिए जा सकें। पहले यह सीमा 1 जून 2025 थी, जिसे अब 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाया गया है।
शर्त 2:
जनगणना अधिनियम 1948 में संशोधन किया जाएगा, ताकि जातीय आधार पर आंकड़े इकट्ठा करने की अनुमति मिल सके। इसके लिए विधेयक मानसून सत्र में पेश होगा।
परिसीमन की तैयारी: 2026 के आंकड़ों के आधार पर
आयोग गठन: 1-2 महीने
डेटा विश्लेषण: 6-12 महीने
सार्वजनिक परामर्श: 6-12 महीने
अंतिम रिपोर्ट: 3-6 महीने
लागू करने की प्रक्रिया: 6-12 महीने
कुल समय: अनुमानित 2-3 साल
महिला आरक्षण: परिसीमन और जनगणना पर निर्भर
खर्च और बजट
2019 में केंद्र सरकार ने ₹8,754 करोड़ मंजूर किए थे और NPR अपडेट के लिए ₹3,941 करोड़ रखे गए थे।
विपक्ष ने 2025-26 के बजट में केवल ₹578 करोड़ आवंटित करने को लेकर सवाल उठाए थे।
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