टूटी झोपड़ी और हाथ में संविधान... मिलिए जंतर- मंतर पर वायरल हुए मोहम्मद इरफान से
Aman Vaishnav | Jul 27, 2026, 12:26 IST
जंतर- मंतर पर का वायरल मोहम्मद इरफान
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान मोहम्मद इरफान का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इरफान वीडियो में जंतर-मंतर पर आत्मविश्वास से संविधान की प्रस्तावना सुनाते नजर आ रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहने वाले मोहम्मद इरफान अचानक चर्चा में आ गए हैं।
- वे सड़क किनारे बर्फ बेचकर गुजारा करते हैं।
- न वे कभी स्कूल गए, न पढ़ना-लिखना सीखा।
- जंतर मंतर पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है।
- वायरल में वे संविधान की प्रस्तावना बड़े आत्मविश्वास से सुनाते नजर आ रहे हैं।
यह मोहम्मद इरफान तो रुला कर रहेगा... इसको सुनकर न जाने कितनों की सोच और विचारधारा बदलने वाली है... अश्लीलता की आड़ में आंदोलन का अंत करने वालों को एक बार इसको सुनना चाहिए.. pic.twitter.com/bkjO3LUl9s
— Dinesh Dangi (@dineshdangi84) July 26, 2026
इरफान ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। बचपन में आंगनवाड़ी से उन्हें थोड़ी बहुत शिक्षा मिली थी। इसके बावजूद वे बड़ी स्पष्टता से बोलते हैं।
इरफान की बातों में हास्य भी झलकता है और हिंदी-उर्दू कविता के अंश भी। वे खुद को मजदूर बताते हुए मुस्कुराकर कहते हैं कि वे बहुत बोलते हैं।
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जंतर मंतर पर हुई बातचीत
जब इरफान से पूछा गया कि उन्हें संविधान की प्रस्तावना इतनी आसानी से कैसे याद है, तो उनका जवाब सबको चौंका गया। उन्होंने बताया कि वे गूगल एआई से सवाल पूछते हैं। अगर जवाब से संतुष्ट नहीं होते, तो फिर से एआई से पूछते हैं कि क्या जवाब सही है।
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विरोध प्रदर्शनों से मिली सीख
किसानों के धरने से लेकर महिला पहलवानों के धरने तक, हर जगह इरफान की मौजूदगी रही। उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी हिस्सा लिया था। यह यात्रा दिल्ली से कश्मीर तक चली थी।
मजदूरों के शोषण पर बेबाक राय
इरफान कहते हैं कि अगर कोई मजदूर विरोध करता है, तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। नियोक्ता जानते हैं कि उसकी जगह दूसरा मजदूर आसानी से मिल जाएगा। इरफान थोड़ी ऊंची आवाज में कहते हैं कि सिर्फ पेट भरना ही जिंदगी नहीं है।
संविधान को जीने की कोशिश
एक टूटे-फूटे घर में रहने वाला यह युवक लोकतांत्रिक मूल्यों को सिर्फ पढ़ता नहीं, बल्कि जीने की कोशिश करता है।
सीमित संसाधनों के बावजूद इरफान ने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा। उन्हें अभी सिर्फ सही अवसर और उचित मार्गदर्शन की जरूरत है। उनके भीतर सीखने की भूख और बोलने की काबिलियत साफ झलकती है।
देश की असली ताकत ऐसे ही युवाओं में छिपी होती है। जरूरत सिर्फ उन्हें पहचानने और उन पर भरोसा करने की है।
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