केरल नहीं अब कहिए केरलम, आखिर क्यों बदला जा रहा केरल का सदियों पुराना नाम, जानें असली राज

केरल अब केरलम कहलाएगा। राज्य सरकार के प्रस्ताव को केंद्र ने मंजूरी दे दी है। यह बदलाव भाषाई पहचान और मलयालम संस्कृति के सम्मान के लिए किया गया है।

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Kaushiki
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आज हम एक बहुत ही इंटरेस्टिंग टॉपिक पर बात करेंगे। क्या आप जानते हैं कि दक्षिण भारत का खूबसूरत राज्य केरल को अब नई पहचान मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने इसके नाम को केरलम करने की मंजूरी दे दी है।

इसको लेकर राज्य की जनता की लंबे समय से मांग थी। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसके लिए विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था। ये फैसला वहां की कल्चरल आइडेंटिटी और मलयालम भाषा के सम्मान से जुड़ा है।

इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि आखिर केरल से केरलम बनने के पीछे की जरुरत क्यों पड़ी? साथ ही, हम जानेंगे कि इंडियन कांस्टीट्यूशन के हिसाब से किसी राज्य का नाम बदलने की प्रोसेस क्या होती है। आइए जानें...

क्यों पड़ी नाम बदलने की जरूरत

केरल के लोग अपनी भाषा से बहुत प्यार करते हैं। मलयालम में इस राज्य का उच्चारण केरलम होता है। आजादी के बाद 1956 में भाषाई आधार पर राज्य बना था।

उस वक्त अंग्रेजी के प्रभाव के कारण इसे Kerala लिखा गया। हिंदी में लोग इसे केरल कहकर बुलाने लगे। लेकिन स्थानीय लोग हमेशा से Keralam शब्द का इस्तेमाल करते हैं। अपनी मूल पहचान वापस पाने के लिए ये बदलाव जरूरी था।

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क्या कहता है इतिहास

केरलम नाम के पीछे कई दिलचस्प कहानियां प्रचलित हैं। सबसे मशहूर कहानी भगवान विष्णु के अवतार परशुराम की है। माइथोलॉजी के मुताबिक, परशुराम ने अपना फरसा समुद्र में फेंका था।

जहां तक फरसा गिरा, वहां से समुद्र पीछे हट गया। उस ड्राई लैंड को ही आज हम केरलम कहते हैं। केरा का मतलब है जल और अलम का मतलब लैंड है। यानी जल से निकली हुई इस हौली लैंड का नाम केरलम पड़ा।

सम्राट अशोक से है कनेक्शन

इतिहास के पन्नों में भी केरलम के प्रूफ मिलते हैं। मौर्य सम्राट अशोक के इंस्क्रिप्शन्स में भी इसका जिक्र है। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में इसे केरलपुत्र कहा जाता था।

इसका मतलब होता है केरल का पुत्र या रूलर। फेमस हिस्टोरियन डी.सी. सरकार ने भी अपनी रिसर्च में ये बताया है। संगम साहित्य में भी इस क्षेत्र की प्राचीनता के प्रमाण हैं। ये नाम सदियों से भारतीय इतिहास का अटूट हिस्सा रहा है।

केरल से केरलम: नाम बदलने का पूरा मामला, इतिहास, कारण और प्रक्रिया, Kerala  to Keralam Name Change Explained: History, Reason & Legal Process

क्या चेरा राजवंश से निकला है ये नाम

कुछ स्कॉलर इसे एंसिएंट चेरा राजवंश से जोड़कर देखते हैं। दक्षिण भारत में चेरा, चोल और पांड्य राजाओं का शासन था। चेरा राजाओं के शासन वाले क्षेत्र को चेरालम कहा जाता था।

धीरे-धीरे च साउंड बदलकर क में कन्वर्ट हो गई। इसी भाषाई बदलाव के कारण चेरालम शब्द केरलम बन गया। मलयालम लैंग्वेज के विकास में ऐसे बदलाव अक्सर देखे जाते हैं।

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नारियल की भूमि: केरला

केरलम नाम का एक और सिंपल मतलब है। मलयालम भाषा में केरा का अर्थ नारियल का पेड़ है। आलम शब्द का अर्थ यहां स्थान या भूमि से है।

केरलम का सीधा मतलब है नारियलों की भूमि। केरल में आप जहां भी देखेंगे, आपको नारियल के ऊंचे पेड़ दिखेंगे। अरब मर्चेंट्स ने भी अपनी किताबों में इसका जिक्र किया है। ज्योग्राफिकल पर्सपेक्टिव से ये नाम इस राज्य पर बिल्कुल सटीक बैठता है।

केरल का नाम क्यों बदला जा रहा? पढ़ें- केरलम नाम के पीछे की कहानी - kerala  name change to keralam history language cultural identity ntcpvp - AajTak

राज्य का नाम बदलने की कोंस्टीटूशनल प्रोसेस

भारत में राज्य का नाम बदलना एक लंबी प्रक्रिया है। इसके लिए कोंस्टीटूशन (Constitution of India) के Article 3 का पालन होता है। सबसे पहले राज्य विधानसभा एक प्रस्ताव (प्रपोजल) पास करती है। फिर इस प्रपोजल को केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है।

होम मिनिस्ट्री इस प्रपोजल की बारीकी से जांच करता है। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट की फॉर्मल अप्रूवल ली जाती है। अंत में संसद में एक अमेंडमेंट बिल (Amendment Bill) पेश किया जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही नाम आधिकारिक रूप से बदलता है।

पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों का उदाहरण

भारत का संविधान में केरल अकेला ऐसा राज्य नहीं है जो नाम बदल रहा है। इससे पहले उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा किया गया था। उत्तरांचल को अब हम सब उत्तराखंड के नाम से जानते हैं।

मद्रास का नाम बदलकर तमिलनाडु बहुत पहले ही हो गया था। पश्चिम बंगाल भी अपना नाम बांग्ला करना चाहता है। हालांकि, केंद्र ने अभी उनके प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं लिया।

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