यहां पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं देवी की पूजा, होता है 16 शृंगार, सबरीमाला विवाद के बीच चर्चा में केरलम का मंदिर
Anjali Dwivedi | Apr 11, 2026, 15:06 IST
kottankulangara temple
केरलम के कोल्लम जिले में कोट्टांकुलंगारा श्रीदेवी मंदिर में हर साल चमयविलक्कु उत्सव होता है। इसमें हजारों पुरुष साड़ी पहनकर और 16 शृंगार करके देवी वनदुर्गा की पूजा करते हैं। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला सुनवाई के दौरान इस मंदिर का जिक्र हुआ है।
पांच प्वाइंट में समझें पूरा मामला
- केरल के कोल्लम जिले में एक मंदिर है जिसकी परंपरा पूरे देश में अनोखी है।
- कोट्टांकुलंगारा श्रीदेवी मंदिर में हर साल हजारों पुरुष साड़ी पहनकर, 16 शृंगार करके देवी वनदुर्गा की पूजा करते हैं।
- इस उत्सव को चमयविलक्कु (Chamayavilakku) कहते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान इस मंदिर की परंपरा का जिक्र हुआ।
- 25 हजार से अधिक श्रद्धालु इस 16 दिवसीय उत्सव में शामिल होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में हुआ जिक्र
कहां है यह मंदिर और क्या है खासियत
क्या होता है चमयविलक्कु उत्सव में
इसमें हजारों पुरुष साड़ी, हाफ साड़ी या पारंपरिक नृत्य वेशभूषा पहनते हैं। सभी 16 शृंगार करते हैं और हाथों में पारंपरिक दीप यानी विलक्कु लेकर भव्य शोभायात्रा में शामिल होते हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर यह जुलूस बेहद रंगीन और आकर्षक हो जाता है।
परंपरा की शुरुआत कैसे हुई
शुरुआत में युवा लड़कियां मंदिर में फूलों की माला बनाती और दीप जलाती थीं। फिर ग्वालों ने भी स्त्री वेश में पूजा-अर्चना शुरू की। यही परंपरा आगे चलकर चमयविलक्कु उत्सव के रूप में विकसित हो गई।
भक्ति और एकता का संगम
श्रद्धालुओं का मानना है कि इस अनुष्ठान में भाग लेने से देवी का आशीर्वाद मिलता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह भक्ति, विनम्रता और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक है।
यह खबर क्यों जरूरी है भारत अपनी विविधता में एकता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। कोट्टांकुलंगारा मंदिर की यह परंपरा इसी विविधता का एक अनोखा उदाहरण है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपनी धार्मिक परंपराओं को मानने और उनका पालन करने का अधिकार देता है। सदियों पुरानी यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह सांप्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक समावेश का भी जीवंत उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट की बहस में इसका जिक्र होना इस परंपरा की संवैधानिक और सामाजिक प्रासंगिकता को और बढ़ा देता है। FAQ Q. कोट्टांकुलंगारा मंदिर कहां है और वहां की क्या परंपरा है? A. कोट्टांकुलंगारा श्रीदेवी मंदिर केरल के कोल्लम जिले के चंवारा गांव में स्थित है। यहां हर साल मार्च में मलयालम कैलेंडर के मीनम मास में चमयविलक्कु उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव में हजारों पुरुष साड़ी पहनकर, 16 शृंगार करके और हाथ में पारंपरिक दीप लेकर देवी वनदुर्गा की शोभायात्रा में शामिल होते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। Q. चमयविलक्कु परंपरा की शुरुआत कैसे हुई? A. किवदंती के अनुसार एक बार कुछ ग्वाले एक पत्थर पर नारियल तोड़ रहे थे तभी पत्थर से खून निकलने लगा। इसे वनदेवी की शक्ति का प्रतीक मानकर वहां मंदिर बनाया गया। पहले युवा लड़कियां दीप जलाती थीं और माला बनाती थीं। फिर ग्वालों ने भी स्त्री वेश में पूजा शुरू की। यही धीरे-धीरे चमयविलक्कु उत्सव बन गया। Q. सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला सुनवाई के दौरान कोट्टांकुलंगारा मंदिर का जिक्र क्यों हुआ? A. सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच सबरीमाला मामले पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान देशभर के मंदिरों की विभिन्न धार्मिक परंपराओं का जिक्र हुआ। कोट्टांकुलंगारा मंदिर का उदाहरण यह दर्शाने के लिए आया कि भारत में मंदिरों की परंपराएं अलग-अलग और अनोखी हैं। यह मंदिर इसलिए भी खास है क्योंकि यहां पुरुष स्त्री वेश में पूजा करते हैं जो भारतीय धार्मिक विविधता का एक अनूठा उदाहरण है।
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