Lenskart Controversy के बाद बैकफुट पर आई कंपनी? सीईओ पीयूष बंसल ने मांगी माफी
Manya Jain | Apr 19, 2026, 14:43 IST
Lenskart Controversy
लेंसकार्ट विवादों में है! ऑफिस में बिंदी, तिलक और कलावा पहनने पर रोक लगाने वाले कथित नियमों से लोग नाराज हैं। संस्थापक पीयूष बंसल और लेंसकार्ट की तरफ से ऑफिशियली माफी मांगी गई है।
इन दिनों मशहूर कंपनी लेंसकार्ट विवादों में में चल रही है। सोशल मीडिया पर कंपनी का एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है। इसमें कर्मचारियों को बिंदी और तिलक लगाने से मना किया गया। कलावा पहनने पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी।
इस डॉक्यूमेंट के बाहर आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने भारी विरोध जाताया। विवाद बढ़ता देख लेंसकार्ट संस्थापक पीयूष बंसल ने सार्वजनिक तौर माफी मांगी। उन्होंने इस मामले पर अपनी तरफ से स्पष्टीकरण भी दिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला...
सोशल मीडिया पर वायरल हुए डॉक्यूमेंट में कर्मचारियों के Dress Code के लिए 'ग्रूमिंग गाइडलाइन्स' (Grooming Guidelines) दी गई थी। इस डॉक्यूमेंट में कंपनी के कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से मना किया गया है। इसके अलावा, हिजाब और पगड़ी को शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है।
ये धार्मिक विवाद तब बढ़ा जब एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने इस वायरल डॉक्यूमेंट का स्क्रीनशॉट शेयर किया और लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल से सवाल किया, "क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है, लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं?" इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग कंपनी के इस ड्रेस कोड पर सवाल उठाने लगे और लेंसकार्ट को ट्रोल करना शुरू कर दिया।
पीयूष बंसल ने 15 और 16 अप्रैल 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर अपनी सफाई पेश की।
बंसल की सफाई के बाद सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में कई ऐसे सवाल उठ रहे हैं।
पीयूष बंसल का कहना है कि विवादित लाइन 17 फरवरी को ही हटा दी गई थी। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि यह सुधार महीनों पहले हो गया था, तो फरवरी 2026 की तारीख वाला वही डॉक्यूमेंट अब तक सर्कुलेशन में कैसे है?
'ऑपइंडिया' की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब दिल्ली के कुछ स्टोर्स पर ग्राउंड रियलिटी पर पड़ताल की गई, तो वहां के कर्मचारियों की बातचीत से यह संकेत मिला कि वही पुराने नियम अब भी लागू हैं। यदि पॉलिसी बदल गई थी, तो स्टोर स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं थी?
विवाद तब और बढ़ गया जब यह बात सामने आई कि इस गाइडलाइन में हिजाब (Hijab) के लिए तो स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन बिंदी, सिंदूर या कलावा जैसे हिंदू प्रतीकों को छिपाने या न लगाने की बात कही गई थी। इसे 'न्यूट्रल पॉलिसी' के बजाय सेलेक्टिव बिहेवियर के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर उपजे भारी विरोध के बाद लेंसकार्ट ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उनके वर्किंग कल्चर में हर भारतीय परंपरा की जगह है। लेंसकार्ट ने ट्वीटर पर लिखा कि...
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इस डॉक्यूमेंट के बाहर आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने भारी विरोध जाताया। विवाद बढ़ता देख लेंसकार्ट संस्थापक पीयूष बंसल ने सार्वजनिक तौर माफी मांगी। उन्होंने इस मामले पर अपनी तरफ से स्पष्टीकरण भी दिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला...
क्या था वायरल डॉक्यूमेंट
ये धार्मिक विवाद तब बढ़ा जब एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने इस वायरल डॉक्यूमेंट का स्क्रीनशॉट शेयर किया और लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल से सवाल किया, "क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है, लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं?" इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग कंपनी के इस ड्रेस कोड पर सवाल उठाने लगे और लेंसकार्ट को ट्रोल करना शुरू कर दिया।
So I confirmed, this is genuine. This is what @peyushbansal tells his employees, hijab is okay, but bindi/tilak/Kalawa is not, for @Lenskart_com, a company that exists in Hindu majority Bharat, where most of the employees and consumers are Hindu! What do you say to this? This is… https://t.co/jQ2EPdWPJM pic.twitter.com/SWfOajOjpo
— Shefali Vaidya. 🇮🇳 (@ShefVaidya) April 15, 2026
पीयूष बंसल ने विवाद पर दी सफाई
Hi, all. I’ve been seeing an inaccurate policy document going viral about Lenskart.
I want to speak directly that this document does not reflect our present guidelines.
Our policy has no restrictions on any form of religious expression, including bindi and tilak, and we…
— Peyush Bansal (@peyushbansal) April 15, 2026
- आउटडेटेड डॉक्यूमेंट: बंसल के अनुसार, वायरल हो रहा डॉक्यूमेंट एक "पुराना आंतरिक प्रशिक्षण डॉक्यूमेंट " (Outdated Internal Training Document) है, न कि वर्तमान की एचआर पॉलिसी।
- फरवरी में सुधार का दावा: उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने 17 फरवरी को ही इस गलती को पकड़ लिया था और इसे हटा दिया था।
- धार्मिक स्वतंत्रता: उन्होंने जोर देकर कहा कि लेंसकार्ट किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति (Religious Expression) पर रोक नहीं लगाता है और बिंदी-तिलक लगाने के लिए कर्मचारी स्वतंत्र हैं।
बंसल की सफाई पर उठते गंभीर सवाल
1. तारीखों का उलझाव
2. क्लेम्स और रियलिटी में अंतर
3. भेदभावपूर्ण नीति का आरोप
Lenskart ने भी ट्वीटर पर मांगी माफी
We have heard you. Clearly and openly. Over the past few days, our community and customers have spoken - and we have listened.
Today, we are standardizing our In-Store Style Guide and sharing it publicly and transparently: https://t.co/lC8KlLLUZm
These guidelines explicitly and…
— lenskart (@Lenskart_com) April 18, 2026
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