1 अप्रैल से 1000 दवाएं महंगी: नए रेट लागू, बुखार-दर्द, BP और डायबिटीज की दवाओं पर असर
Pawan Modiya | Apr 01, 2026, 19:12 IST
Photograph: (the sootr)
1 अप्रैल 2026 से दवाओं के नए रेट (Medicines New Rate) लागू। जरूरी दवाओं की कीमत (Essential Medicines Price) बढ़ने से बुखार, BP और डायबिटीज की दवाएं महंगी।
भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। 1 अप्रैल 2026 से 1000 से अधिक जरूरी दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी लागू हो गई है। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है, क्योंकि जिन दवाओं के दाम बढ़े हैं उनमें बुखार, दर्द, Diabetes & Hypertensionब्लड प्रेशर और डायबिटीजजैसी रोजमर्रा की बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
यह फैसला National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) द्वारा लिया गया है, जो भारत में दवाओं की कीमत तय करने वाली सरकारी संस्था है। एनपीपीए ने National List of Essential Medicines (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतों में करीब 0.6% से 0.65% तक बढ़ोतरी की अनुमति दी है। हालांकि यह बढ़ोतरी प्रतिशत के हिसाब से कम है, लेकिन चूंकि ये दवाएं लाखों लोग रोज लेते हैं, इसलिए इसका असर बड़े पैमाने पर देखने को मिल सकता है।
क्यों बढ़ी दवाओं की कीमत? (Medicines
दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमत और औद्योगिक लागत में वृद्धि को माना जा रहा है।
सरकार हर साल थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर जरूरी दवाओं के दाम में संशोधन करती है। उसी के आधार पर इस बार भी NLEM में शामिल दवाओं की कीमतों में हल्की वृद्धि की गई है। इस फैसले के बाद बाजार में उपलब्ध हजारों आवश्यक दवाओं के दाम नए रेट के अनुसार मिलेंगे।
National List of Essential Medicines (NLEM) भारत सरकार द्वारा जारी एक सूची है जिसमें वे दवाएं शामिल होती हैं जो आम बीमारियों के इलाज के लिए सबसे जरूरी मानी जाती हैं।
दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी कई अलग-अलग श्रेणियों में देखने को मिली है।
(Analgesics & Antipyretics Medicines)
2. डायबिटीज और
(Diabetes & Hypertension Medicines)
(Respiratory & Gastro Medicines)
(Antibiotics Medicines)
सरकार ने स्पष्ट किया है कि NLEM में शामिल दवाओं के दाम सिर्फ 0.65% तक बढ़ेंगे। उदाहरण से समझिए- यदि कोई दवा पहले 100 रुपए में मिलती थी, तो अब उसका नया रेट लगभग 100.65 रुपए होगा। सलिए आम तौर पर यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन जो लोग रोज कई दवाएं लेते हैं उनके खर्च में थोड़ा इजाफा जरूर हो सकता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो दवाएं NLEM सूची में शामिल नहीं हैं, उनके दाम कंपनियां साल में 10% तक बढ़ा सकती हैं। इसलिए कई ब्रांडेड दवाओं के दाम में भविष्य में ज्यादा वृद्धि देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं है। लेकिन जिन मरीजों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर Diabetes & Hypertension, हार्ट डिजीज या अस्थमा जैसी बीमारियों के कारण रोज दवाएं लेनी पड़ती हैं, उनके मासिक खर्च में थोड़ा इजाफा हो सकता है। सरकार का कहना है कि दवाओं की कीमतों को पूरी तरह बाजार के हवाले करने के बजाय नियंत्रित ढंग से बढ़ोतरी की गई है, ताकि कंपनियों और मरीजों दोनों का संतुलन बना रहे।
1 अप्रैल 2026 से दवाओं के नए रेट (Medicines New Rate) इसलिए बढ़ाए गए क्योंकि सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और उत्पादन लागत में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए जरूरी दवाओं की कीमतों में लगभग 0.65% बढ़ोतरी की अनुमति दी।
जरूरी दवाओं की कीमत (Essential Medicines Price) बढ़ने से कई आम दवाएं प्रभावित हुई हैं, जैसे:
3. क्या सभी दवाओं के दाम बढ़े हैं? (
नहीं। Medicine Price Hike India केवल उन दवाओं पर लागू है जो NLEM सूची में शामिल हैं। NLEM में शामिल दवाओं के दाम लगभग 0.65% तक बढ़े हैं, जबकि सूची से बाहर दवाओं के दाम कंपनियां साल में 10% तक बढ़ा सकती हैं।
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यह फैसला National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) द्वारा लिया गया है, जो भारत में दवाओं की कीमत तय करने वाली सरकारी संस्था है। एनपीपीए ने National List of Essential Medicines (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतों में करीब 0.6% से 0.65% तक बढ़ोतरी की अनुमति दी है। हालांकि यह बढ़ोतरी प्रतिशत के हिसाब से कम है, लेकिन चूंकि ये दवाएं लाखों लोग रोज लेते हैं, इसलिए इसका असर बड़े पैमाने पर देखने को मिल सकता है।
क्यों बढ़ी दवाओं की कीमत? (Medicines Price Hike )
सरकार हर साल थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर जरूरी दवाओं के दाम में संशोधन करती है। उसी के आधार पर इस बार भी NLEM में शामिल दवाओं की कीमतों में हल्की वृद्धि की गई है। इस फैसले के बाद बाजार में उपलब्ध हजारों आवश्यक दवाओं के दाम नए रेट के अनुसार मिलेंगे।
National List of Essential Medicines (NLEM) क्या है?
NLEM की खास बातें
- इसमें करीब 1000 से अधिक दवाएं शामिल हैं
- ये दवाएं आम और गंभीर बीमारियों के इलाज में जरूरी होती हैं
- सरकार इनके दाम नियंत्रित रखती है
- कीमतों में बदलाव NPPA तय करता है
किन दवाओं के दाम बढ़े? (Essential Medicines Price)
1. सामान्य बुखार और दर्द की दवाएं
- पैरासिटामोल (Paracetamol)
- इबुप्रोफेन (Ibuprofen)
- डिक्लोफेनाक (Diclofenac)
2. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं
- मेटफॉर्मिन (Metformin)
- ग्लिमेपाइराइड (Glimepiride)
- एमलोडिपिन (Amlodipine)
- टेल्मिसर्टन (Telmisartan)
3. कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग की दवाएं
- एटोरवास्टैटिन (Atorvastatin)
- एस्पिरिन (Aspirin)
4. पेट और सांस की दवाएं
- पैंटोप्राजोल (Pantoprazole)
- ओमेप्राजोल (Omeprazole)
- सालबुटामोल (Salbutamol)
5. संक्रमण रोकने वाली दवाएं
- एमोक्सिसिलिन (Amoxicillin)
- अजीथ्रोमाइसिन (Azithromycin)
- सिप्रोफ्लोक्सासिन (Ciprofloxacin)
दवाओं के नए रेट कैसे तय होंगे? (Medicines New Rate)
NLEM में शामिल नहीं दवाओं पर क्या नियम हैं?
दवा महंगी होने पर क्या करें?
- डॉक्टर से जेनेरिक दवाओं (Generic Medicines) के बारे में पूछें
- सरकारी जन औषधि केंद्र (Jan Aushadhi Kendras) से दवाएं लें
- अनावश्यक दवाओं का सेवन न करें
- नियमित दवाओं की सूची डॉक्टर से अपडेट कराते रहें
क्या आम लोगों पर ज्यादा असर पड़ेगा?
FAQs
1. 1 अप्रैल 2026 से दवाओं के नए रेट (Medicines New Rate) क्यों बढ़े?
2. किन दवाओं की कीमत बढ़ी है? (Essential Medicines Price)
- पैरासिटामोल
- इबुप्रोफेन
- मेटफॉर्मिन
- एमलोडिपिन
- एटोरवास्टैटिन
- अमोक्सिसिलिन
3. क्या सभी दवाओं के दाम बढ़े हैं? (Medicine Price Hike India)
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