दुनियाभर में गहराएगा खाद संकट: मिडिल ईस्ट की जंग का खेती पर होगा असर
Amresh Kushwaha | Mar 10, 2026, 11:12 IST
middle east war impact indian fertilizer supply 2026
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ रहा है। भारत में खरीफ सीजन तो सुरक्षित है, लेकिन रबी सीजन के लिए खाद की कमी की चेतावनी दी गई है।
भारत में फिलहाल खाद की कोई कमी नहीं है, लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में चल रही जंग लंबी खिंचती है, तो इसका असर खाद की आपूर्ति पर हो सकता है, खासकर खाड़ी देशों में। फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड (FACT ) के एक उच्च अधिकारी ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यह समस्या भारत में भी उत्पन्न हो सकती है।
FACT दक्षिण भारत में खाद का सबसे बड़ा सप्लायर है। यह कंपनी पश्चिम एशिया और मिडिल ईस्ट के देशों से रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड जैसे कच्चे माल का आयात करती है। इन्हें समुद्री मार्ग से लाया जाता है। जंग के कारण इन आपूर्ति मार्गों में रुकावट आ सकती है और यदि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर भारत समेत अन्य देशों पर भी पड़ सकता है।
FACT के मैनेजिंग डायरेक्टर, एस. शक्तिमणि ने PTI को बताया कि हमारे पास यूरिया की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि युद्ध की स्थिति जल्द ही ठीक हो जाएगी। खरीफ सीजन के लिए हमारे पास पर्याप्त यूरिया है और हमें कोई समस्या नहीं होगी।
वहीं, यदि यह स्थिति अगले छह महीने तक बनी रही, तो रबी सीजन में दिक्कतें आ सकती हैं। इसके लिए हम पहले से तैयार हैं और उचित कदम उठा रहे हैं।
भारत में दो मुख्य फसल सीजन होते हैं: खरीफ और रबी। खरीफ फसलें जून और जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं। वही, जबकि की फसलें अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और अप्रैल-मई में काटी जाती हैं। इन दोनों सीजन में पैदावार बढ़ाने के लिए देशभर में यूरिया का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है और इस समय खाद की मांग काफी बढ़ जाती है।
मैनेजिंग डायरेक्टर शक्तिमणि ने बताया कि FACT जैसी कंपनियां सिर्फ मिडिल ईस्ट से ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया से भी गैस प्राप्त करती हैं। इस गैस का उपयोग कंपनी खाद बनाने में करती हैं। उन्होंने कहा कि अभी इस क्षेत्र में गैस आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि कुछ जगहों पर अस्थिरता है, लेकिन इससे फर्टिलाइजर सेक्टर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और डबल सुपर फॉस्फेट (DSP) जैसे जरूरी कच्चे माल का स्टॉक भी खरीदा है। इससे खाद की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी।
FACT के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनी के पास फिलहाल लगभग एक लाख चार हजार मीट्रिक टन का कुल फर्टिलाइजर स्टॉक है। अधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि मार्च और अप्रैल 2026 के बीच कंपनी के पास एक लाख पांच हजार मीट्रिक टन फर्टिलाइजर बनाने के लिए पर्याप्त कच्चे माल का रिजर्व है।
यदि सप्लाई चेन में कोई रुकावट नहीं आती है, तो FACT अप्रैल 2026 के बाद भी फर्टिलाइजर की आपूर्ति जारी रखने की कोशिश कर रही है, ताकि 2026-27 के खरीफ सीजन की जरूरतें पूरी की जा सकें।
कंपनी का लक्ष्य सितंबर 2026 तक खरीफ सीजन के लिए लगभग पांच लाख पांच हजार मीट्रिक टन फर्टिलाइजर बनाने और 1 लाख मीट्रिक टन आयात करने का है। FACT की स्थापना 1943 में हुई थी। यह कच्चे माल का आयात करती है, जिसे बल्क वेयरहाउस और टैंकों में स्टोर किया जाता है।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर न केवल वैश्विक खाद आपूर्ति पर पड़ेगा, बल्कि यह भारत जैसे खाद्य उत्पादक देश की आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि, FACT जैसी कंपनियां इस संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
सरकार की मदद से किसानों को खाद की आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास कर रही हैं। फिर भी, अगर यह संकट लंबा चलता है, तो रबी सीजन में खाद की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके लिए पहले से ही योजना बनाई जा रही है।
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मिडिल ईस्ट से खाद की आपूर्ति पर असर
FACT के मैनेजिंग डायरेक्टर, एस. शक्तिमणि ने PTI को बताया कि हमारे पास यूरिया की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि युद्ध की स्थिति जल्द ही ठीक हो जाएगी। खरीफ सीजन के लिए हमारे पास पर्याप्त यूरिया है और हमें कोई समस्या नहीं होगी।
वहीं, यदि यह स्थिति अगले छह महीने तक बनी रही, तो रबी सीजन में दिक्कतें आ सकती हैं। इसके लिए हम पहले से तैयार हैं और उचित कदम उठा रहे हैं।
भारत में होती हैं दो मुख्य फसल सीजन
खाद आपूर्ति की स्थिति पर FACT की तैयारियां
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और डबल सुपर फॉस्फेट (DSP) जैसे जरूरी कच्चे माल का स्टॉक भी खरीदा है। इससे खाद की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी।
कंपनी का यह है लक्ष्य
यदि सप्लाई चेन में कोई रुकावट नहीं आती है, तो FACT अप्रैल 2026 के बाद भी फर्टिलाइजर की आपूर्ति जारी रखने की कोशिश कर रही है, ताकि 2026-27 के खरीफ सीजन की जरूरतें पूरी की जा सकें।
कंपनी का लक्ष्य सितंबर 2026 तक खरीफ सीजन के लिए लगभग पांच लाख पांच हजार मीट्रिक टन फर्टिलाइजर बनाने और 1 लाख मीट्रिक टन आयात करने का है। FACT की स्थापना 1943 में हुई थी। यह कच्चे माल का आयात करती है, जिसे बल्क वेयरहाउस और टैंकों में स्टोर किया जाता है।
निष्कर्ष
सरकार की मदद से किसानों को खाद की आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास कर रही हैं। फिर भी, अगर यह संकट लंबा चलता है, तो रबी सीजन में खाद की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके लिए पहले से ही योजना बनाई जा रही है।
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