इस बार मानसून 2026 में कम बारिश की संभावना, IMD का अलर्ट- खरीफ फसलों पर खतरा मगर…
Aman Vaishnav | Apr 14, 2026, 12:58 IST
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India Meteorological Department ने मानसून 2026 का पूर्वानुमान जारी किया है। इस साल देश में सामान्य से कम बारिश की आशंका है। अल नीनो के असर के बीच अगस्त-सितंबर में बारिश घटने का डर सबसे ज्यादा है।
IMD ने 2026 के मानसून के लिए पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी किया है। इस बार औसत से 35% कम बारिश की संभावना जताई गई है। El Niño (अल नीनो) का असर मानसून के दूसरे हिस्से, यानी अगस्त-सितंबर में ज्यादा देखने को मिल सकता है।
हालांकि देश में औसत मौसमी बारिश दीर्घकालिक औसत के 92% रहने का अनुमान है। वहीं Indian Ocean Dipole के सकारात्मक होने पर El Niño का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।
India Meteorological Department ने 2026 के जून से सितंबर तक के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इस बार अच्छी खबर नहीं है। पूरे देश में बारिश का आंकड़ा दीर्घकालिक औसत (LPA) के 92% के आसपास रहने का अनुमान है। इसमें प्लस-माइनस 5% की भी संभावना है।
देश का दीर्घकालिक औसत 87 सेंटीमीटर माना जाता है, जो 1971 से 2020 के आंकड़ों पर आधारित है।
IMD के मानसून प्रोबेबिलिटी चार्ट के मुताबिक, इस बार सबसे ज्यादा 35% संभावना है कि बारिश कम होगी, यानी LPA के 90% से भी कम। इसके बाद 31% संभावना है कि बारिश सामान्य से थोड़ी कम होगी (LPA का 90% से 95%)। सामान्य बारिश की संभावना 27% है।
सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना बहुत कम है। Above Normal यानी LPA के 105% से 110% तक बारिश की संभावना सिर्फ 6% है। वहीं, अत्यधिक बारिश होने की संभावना महज 1% बताई गई है।
IMD ने स्पष्ट कहा है कि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।
जिन क्षेत्रों पर नक्शे में सफेद रंग दिखाया गया है, वहां मौसम मॉडल से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। यानी वहां बारिश का पैटर्न अभी अनिश्चित है।
El Nino एक मौसम घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। इसका असर भारत में मानसून पर पड़ता है। इससे बारिश कमजोर हो जाती है।
IMD के मुताबिक El Niño का असर मानसून के दूसरे हिस्से, यानी अगस्त-सितंबर में ज्यादा रहेगा। इसलिए इन दो महीनों में कमजोर बारिश की संभावना सबसे ज्यादा जताई गई है। खरीफ फसलों के लिए यह समय सबसे संवेदनशील होता है।
IMD के अधिकारी मोहापात्रा ने एक उम्मीद की किरण भी दिखाई है। उनके अनुसार भारतीय महासागर में IOD की स्थिति अगस्त तक अनुकूल हो सकती है।
जब IOD सकारात्मक होता है तो भारत में ज्यादा बारिश होती है। इससे El Niño का असर कुछ हद तक संतुलित हो सकता है।
फिलहाल हिंद महासागर में IOD की स्थिति सामान्य है। ताजा जलवायु मॉडल बताते हैं कि मानसून सीजन के अंत तक IOD सकारात्मक हो सकता है। लेकिन IMD ने साफ किया कि IOD आमतौर पर अनिश्चित रहता है। इसलिए इस पर पूरी तरह भरोसा करना ठीक नहीं होगा।
कमजोर मानसून का सबसे बड़ा नुकसान खेती को होता है। खरीफ फसलें जैसे धान, दलहन, तिलहन गर्मी में बोई जाती हैं और मानसून की बारिश पर निर्भर होती हैं। अगर बारिश कम हो तो फसलें प्रभावित होती हैं।
इसके अलावा सर्दी में बोई जाने वाली रबी की फसलों पर भी असर पड़ता है। जब मानसून कमजोर रहता है तो मिट्टी में नमी कम रहती है और सिंचाई के जलाशय नहीं भर पाते। इससे रबी की बुवाई भी प्रभावित होती है और देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन घट सकता है।
पिछले कुछ सालों में भारत ने खेती को सूखे से बचाने के कई उपाय किए हैं। लेकिन बड़े हिस्से की खेती अभी भी बारिश पर निर्भर है।
किसानों पर सिर्फ मानसून की ही नहीं, और मुश्किलें भी हैं। खेती के लिए डीजल और उर्वरक की लागत पहले से ऊंची है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते ऊर्जा महंगी हो गई है। ऐसे में अगर बारिश भी कमजोर रही तो किसान दोहरी मार झेलेगा।
भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए मानसून की हर खबर जीवन-मरण का सवाल होती है। देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी खेती पर निर्भर है और मानसून की कमी सीधे उनकी आमदनी पर असर डालती है। कमजोर मानसून से खाद्यान्न उत्पादन घटता है, महंगाई बढ़ती है और गरीब तबके पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ता है।
इस खबर का सामाजिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह आम नागरिक को समय रहते सतर्क करती है। किसान, नीति निर्माता और आम उपभोक्ता सभी के लिए यह सूचना जरूरी है। डिजिटल और नैतिक पत्रकारिता के नजरिए से यह खबर तथ्य आधारित, प्रामाणिक स्रोत से ली गई और जनहित में है।
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हालांकि देश में औसत मौसमी बारिश दीर्घकालिक औसत के 92% रहने का अनुमान है। वहीं Indian Ocean Dipole के सकारात्मक होने पर El Niño का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।
मानसून 2026 का पहला अलर्ट
देश का दीर्घकालिक औसत 87 सेंटीमीटर माना जाता है, जो 1971 से 2020 के आंकड़ों पर आधारित है।
35% संभावना कमजोर बारिश की
सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना बहुत कम है। Above Normal यानी LPA के 105% से 110% तक बारिश की संभावना सिर्फ 6% है। वहीं, अत्यधिक बारिश होने की संभावना महज 1% बताई गई है।
देश के किस हिस्से पर सबसे ज्यादा असर?
जिन क्षेत्रों पर नक्शे में सफेद रंग दिखाया गया है, वहां मौसम मॉडल से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। यानी वहां बारिश का पैटर्न अभी अनिश्चित है।
El Niño का खतरा कब और क्यों?
IMD के मुताबिक El Niño का असर मानसून के दूसरे हिस्से, यानी अगस्त-सितंबर में ज्यादा रहेगा। इसलिए इन दो महीनों में कमजोर बारिश की संभावना सबसे ज्यादा जताई गई है। खरीफ फसलों के लिए यह समय सबसे संवेदनशील होता है।
क्या IOD बचा सकता है?
जब IOD सकारात्मक होता है तो भारत में ज्यादा बारिश होती है। इससे El Niño का असर कुछ हद तक संतुलित हो सकता है।
फिलहाल हिंद महासागर में IOD की स्थिति सामान्य है। ताजा जलवायु मॉडल बताते हैं कि मानसून सीजन के अंत तक IOD सकारात्मक हो सकता है। लेकिन IMD ने साफ किया कि IOD आमतौर पर अनिश्चित रहता है। इसलिए इस पर पूरी तरह भरोसा करना ठीक नहीं होगा।
खेती और खाद्यान्न पर असर
इसके अलावा सर्दी में बोई जाने वाली रबी की फसलों पर भी असर पड़ता है। जब मानसून कमजोर रहता है तो मिट्टी में नमी कम रहती है और सिंचाई के जलाशय नहीं भर पाते। इससे रबी की बुवाई भी प्रभावित होती है और देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन घट सकता है।
पिछले कुछ सालों में भारत ने खेती को सूखे से बचाने के कई उपाय किए हैं। लेकिन बड़े हिस्से की खेती अभी भी बारिश पर निर्भर है।
डीजल, खाद और ऊर्जा की मार अलग
यह खबर क्यों जरूरी है?
इस खबर का सामाजिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह आम नागरिक को समय रहते सतर्क करती है। किसान, नीति निर्माता और आम उपभोक्ता सभी के लिए यह सूचना जरूरी है। डिजिटल और नैतिक पत्रकारिता के नजरिए से यह खबर तथ्य आधारित, प्रामाणिक स्रोत से ली गई और जनहित में है।
FAQ
- IMD का मानसून 2026 पूर्वानुमान क्या कहता है?
IMD ने बताया है कि जून से सितंबर 2026 के मानसून सीजन में पूरे देश में औसत बारिश LPA (Long Period Average) के 92% रहने की संभावना है। इसमें प्लस-माइनस 5% की गुंजाइश है। देश का LPA 87 सेंटीमीटर है। सबसे ज्यादा 35% संभावना बारिश के "कमजोर" रहने की है। सामान्य से नीचे रहने की 31% और सामान्य रहने की 27% संभावना है। El Niño की वजह से अगस्त-सितंबर में बारिश और कम रहने का खतरा है। - El Niño से मानसून पर क्या असर पड़ता है?
El Niño एक समुद्री जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे भारत में मानसूनी हवाओं का प्रवाह कमजोर पड़ता है और बारिश कम होती है। IMD के अनुसार 2026 में El Niño का असर मानसून के दूसरे हिस्से यानी अगस्त और सितंबर में ज्यादा रहेगा। यह समय खरीफ फसलों के लिए सबसे जरूरी होता है। इसलिए इस साल फसलों पर खतरा ज्यादा है। - IOD क्या है और यह मानसून को कैसे प्रभावित करता है?
IOD यानी Indian Ocean Dipole हिंद महासागर में होने वाली एक जलवायु घटना है। जब IOD सकारात्मक होता है तो हिंद महासागर का पश्चिमी हिस्सा पूर्वी हिस्से की तुलना में गर्म होता है। इससे भारत में ज्यादा बारिश होती है। IMD के अधिकारी मोहापात्रा के अनुसार अगर अगस्त तक IOD सकारात्मक हो जाए तो यह El Niño के कुछ नकारात्मक असर को संतुलित कर सकता है। फिलहाल IOD की स्थिति तटस्थ है और यह घटना आमतौर पर अनिश्चित मानी जाती है।
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