डेढ़ लाख रुपए में कैंसर की नकली दवा, एंटीफंगल मिलाकर अस्पताल से होती थी सप्लाई

thesootr Desk | Apr 13, 2026, 15:03 IST
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cancer medicine scam
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कैंसर के मरीजों के Keytruda (कीट्रूडा) इंजेक्शन में एंटीफंगल मिलाकर बाजार में बेचा जा रहा है। मरीजों की जान से कैसा खिलवाड़ हो सकता है, यह खबर आपको आसानी से समझाती है। आपको सजग करती है…

समझें क्या है पूरा मामला

  • डेढ़ लाख रुपए की कैंसर दवा कीट्रूडा (Keytruda) को नकली बनाकर बेचा जा रहा था।
  • दिल्ली के बड़े अस्पतालों के फार्मासिस्ट इस्तेमाल हुई शीशियां चुरा रहे थे।
  • खाली शीशियां एंटीफंगल दवा से भरकर 90 हजार रुपए में बेची जाती थीं।
  • दिल्ली पुलिस ने 12 आरोपियों का गिरोह पकड़ा, ED ने भी जांच शुरू की।
  • बिहार की एक महिला मरीज की मौत भी इस नकली दवा से जोड़कर देखी जा रही है।
कैंसर का इलाज पहले से ही भारी पड़ता है। ऊपर से जब दवा भी नकली निकले… ऐसा ही धोखा हुआ चंडीगढ़ के पास रहने वाली एक 56 साल की महिला के साथ। साल 2022 की शुरुआत में उन्हें लिवर कैंसर हुआ। PGIMER अस्पपताल के डॉक्टरों ने Keytruda दवा लिखी। यह दवा अमेरिकी कंपनी Merck & Co (MSD) बनाती है। एक 100 mg शीशी की कीमत डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा है।

कैंसर का उपचार - एनसीआई
कैंसर का उपचार - एनसीआई


परिवार ने एक स्थानीय मेडिकल स्टोर से सितंबर से दिसंबर 2022 के बीच 12 शीशियां खरीदीं। दाम कुछ कम था तो राहत मिली। करीब 16 लाख रुपए में 12 शीशियां आईं। दवा दी गई, इलाज चला। पर कुछ महीनों बाद दिल्ली पुलिस का फोन आया और घरवालों के पैरों तले जमीन खिसक गई। दरअसल जो दवा मरीज को दी गई थी वो कीट्रूडा थी ही नहीं, उसमें एंटीफंगल दवा भरी थी।

The Indian Express और ICIJ (International Consortium of Investigative Journalists) की साझा जांच में यह खुलासा हुआ है। यह जांच 12 हजार 500 से ज्यादा पन्नों के पुलिस और अस्पताल रिकॉर्ड पर आधारित है।

गिरोह कैसे काम करता था

गिरोह का तरीका काफी सोचा-समझा था। पहले कैंसर अस्पतालों से Keytruda की खाली या आधी भरी शीशियां चुराई जाती थीं। फिर उन्हें एंटीफंगल दवा से भरकर दोबारा बंद किया जाता था। असली बैच नंबर वाले लेबल लगे रहते थे। पैकेजिंग देखकर कोई शक नहीं करता था।

असली दवा 1.5 लाख रुपए में मिलती है। नकली दवा करीब 90 हजार रुपए में बेची जाती थी। 40 फीसदी छूट देखकर मरीज के परिवार आकर्षित होते थे। मरीज की पोती ने कहा, "छूट मिले तो राहत लगती है। इतनी मुश्किल में कैंसर का सस्ता इलाज मिलें तो सवाल नहीं करते, बस भरोसा करते हैं।"

Rs 100 Fungus Medicine Sold As Rs 2 Lakh Cancer Injections By Delhi Gang
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गिरोह के मुख्य आरोपी नीरज चौहान को पुलिस ने मार्च 2024 में गुरुग्राम से पकड़ा। उसके घर से 46 भरी शीशियां, 165 खाली शीशियां और 239 खाली पैकेजिंग बॉक्स मिले हैं।

RGCIRC में अंदर से सेंध

दिल्ली का राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (RGCIRC) देश के सबसे प्रतिष्ठित कैंसर अस्पतालों में से एक है। यहां कीमोथेरेपी की दवाएं CCTV कैमरों की निगरानी में तैयार होती हैं। इसके बावजूद यहीं से सेंध लगी।
12 मार्च 2024 को अस्पताल के D Block की दूसरी मंजिल से दो फार्मासिस्ट बाहर निकले। कोमल तिवारी के बैग में Keytruda की पांच आधी भरी शीशियां और तीन खाली बॉक्स मिले। अभिनय के बैग में पांच और आधी भरी शीशियां और दो खाली बॉक्स थे। दोनों को गेट पर ही Crime Branch ने रोक लिया।

Rajiv Gandhi Cancer Institute ...
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ये शीशियां पूर्व सहयोगी परवेज को दी जानी थीं। परवेज पहले इसी अस्पताल में फार्मासिस्ट था। फरवरी 2022 में नौकरी छोड़कर वह यमुना विहार में रियल एस्टेट के काम में लग गया। परवेज ने पुलिस को बताया कि विफिल नाम के एक शख्स ने उसे यह धंधा सुझाया था। योजना थी कि इस्तेमाल हो चुकी Keytruda की शीशियों में एंटीफंगल दवा भरकर सस्ते में बेची जाए।

परवेज की बात कोमल और अभिनय ने मान ली। परवेज ने खाली शीशी के तीन हजार रुपए और भरी शीशी के 40 से 50 हजार रुपए देने का वादा किया था। इस तरह 8-9 महीने में कोमल से करीब 10-12 भरी और 120-125 खाली शीशियां, और अभिनय से करीब 100 खाली और 10-12 भरी शीशियां ली गईं।

कैंसर की नकली दवा बेचकर मरीजों को ठगते थे, 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट  दायर - top cancer hospitals sold empty vials of chemotherapy injections to  fill with spurious drugs Delhi police
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अस्पताल ने बाद में छह महीने (सितंबर 2023 से मार्च 2024) के रिकॉर्ड खंगाले। कम से कम 84 मरीजों को इस दौरान Keytruda (कैंसर की दवा)दी गई थी। इनमें से कई के बैच नंबर वही थे, जो पुलिस ने जब्त की गई शीशियों पर देखे।

खुलासे की टाइमलाइन

WhatsApp Image 2026
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  • 2022 (शुरुआत): चंडीगढ़ की महिला मरीज के परिवार ने स्थानीय मेडिकल स्टोर से Keytruda की 12 शीशियां खरीदीं। उन्हें नहीं पता था कि ये नकली हैं।
  • सितंबर 2022: बिहार की महिला मरीज ने ई-कॉमर्स साइट से दो नकली Keytruda शीशियां खरीदीं। दूसरी शीशी के बाद उनकी हालत बिगड़ी और 11 सितंबर 2022 को उनकी मौत हो गई।
  • मार्च 2024 : दिल्ली पुलिस की Crime Branch ने ऑपरेशन शुरू किया।
  • 11 मार्च 2024: नीरज चौहान को गुरुग्राम से हिरासत में लिया गया। घर में लकड़ी की अलमारी से बड़ी मात्रा में नकली शीशियां और खाली पैकेजिंग बरामद हुई।
  • 12 मार्च 2024: RGCIRC के फार्मासिस्ट कोमल तिवारी और अभिनय को अस्पताल के गेट पर ही पकड़ा गया। उनके बैग में शीशियां थीं।
  • 14 मार्च 2024: Venkateshwar Hospital के नर्सिंग इनचार्ज रोहित सिंह बिष्ट और Fortis के फार्मासिस्ट जितेंदर को एक ही दिन गिरफ्तार किया गया। इसके बाद परवेज को भी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
  • अप्रैल 2024: ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।
  • 17 अप्रैल 2024: बिहार की उस महिला के परिवार को, जिनकी 2022 में मौत हुई थी, दिल्ली पुलिस का फोन आया।
इस इन्वेस्टीगेशन में कुल 12 सदस्यों का गिरोह पकड़ा गया है। अधिकतर जमानत पर हैं, जबकि परवेज और विफिल अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।

Venkateshwar Hospital में नर्सिंग लीडर का खेल

Venkateshwar Hospital, Dwarka में भी यही हुआ। रोहित सिंह बिष्ट (36) 2018 से वहां Onco Day Care Unit में नर्सिंग टीम लीडर था। 2021 में उसे इनचार्ज बनाया गया। कीमोथेरेपी दवाओं की पूरी जिम्मेदारी उसी पर थी।
14 मार्च 2024 को रोहित गिरफ्तार हुआ। पुलिस को उसने बताया कि नीरज ने उसे संपर्क किया था। पहले मना किया, फिर पैसों का लालच आ गया। नीरज Keytruda के बदले 65 हजार रुपए प्रति शीशी दे रहा था। रोहित ने गिरफ्तारी से करीब आठ महीने पहले से करीब 40 शीशियां और 10-15 खाली शीशियां नीरज को सप्लाई की थीं। रोहित को अभी जमानत मिली हुई है।

दिल्ली में कैंसर की नकली दवाइयां बेचने वाले रैकेट का भंडाफोड़, क्राइम  ब्रांच ने 6 आरोपियों को दबोचा
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दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (Crime) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि यह जांच बेहद जरूरी थी क्योंकि इससे गंभीर बीमार मरीज सीधे प्रभावित होते हैं। जांच से पता चला कि कैसे मजबूर मरीज सस्ती दवा की तलाश में ठगे जाते हैं। हम देख रहे हैं कि क्या और ऐसे गिरोह काम कर रहे हैं।

यह खबर क्यों जरूरी है

भारत में कैंसर के मामले 2045 तक 70 फीसदी से ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में Keytruda जैसी जीवनरक्षक दवाओं की मांग बढ़ेगी। जब इतनी महंगी दवा की नकली सप्लाई अस्पताल के भीतर से होने लगे, तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) यानी जीने के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। यह खबर इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की खामियां सामने आई हैं।

Drugs and Cosmetics Act (ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट) के तहत नकली दवा बनाना और बेचना गंभीर अपराध है। सोशल और डिजिटल नैतिकता के नजरिए से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नकली दवाओं की बिक्री भी एक खतरनाक सवाल खड़ा करती है, जिसका जवाब रेगुलेटर को देना होगा।

FAQ

  1. Keytruda (कीट्रूडा) क्या है और यह इतनी महंगी क्यों है?
    Keytruda एक Immunotherapy (इम्यूनोथेरेपी) दवा है। इसे अमेरिकी कंपनी Merck & Co (MSD) बनाती है। यह दवा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए तैयार करती है। इसका इस्तेमाल फेफड़े, लिवर, स्तन और कई अन्य कैंसर में होता है। एक 100 mg शीशी की कीमत डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा है। यह इसलिए महंगी है क्योंकि इसे बनाने की प्रक्रिया जटिल है और कंपनी का पेटेंट संरक्षण भी है।
  2. नकली Keytruda की पहचान कैसे करें?
    नकली Keytruda को देखकर पहचानना लगभग असंभव है। गिरोह असली शीशियों में एंटीफंगल दवा भर देता था। असली बैच नंबर और लेबल वैसे ही रहते थे। इसीलिए परिवारों को शक नहीं हुआ। सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि Keytruda हमेशा अस्पताल की अधिकृत फार्मेसी से ही खरीदें। किसी भी अनजान मेडिकल स्टोर, दलाल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से न खरीदें, चाहे कितनी भी छूट मिल रही हो।
  3. अस्पतालों में ऐसी चोरी कैसे रोकी जा सकती है?
    RGCIRC ने खुलासे के बाद कई बदलाव किए हैं। अब महंगी दवाएं मरीज के परिजन की मौजूदगी में तैयार होती हैं। हर शीशी की गिनती प्रिस्क्रिप्शन से मिलाई जाती है। साइटोटॉक्सिक (Cytotoxic) वेस्ट बिन पूरी तरह बंद और लॉक रहते हैं। Venkateshwar Hospital ने भी खाली शीशियों के लिए गवाहों की मौजूदगी में सीलिंग की प्रक्रिया शुरू की। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को सभी प्रीमियम कैंसर दवाओं की ट्रैकिंग के लिए एक केंद्रीय डिजिटल सिस्टम बनाना चाहिए।
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