हार्ट अटैक के लक्षण
8 रुपए की दवा और एक CPR... क्या इससे बच सकती थी नाना पाटेकर की जान? जानिए कार्डियोलॉजिस्ट ने क्या कहा...
Sourabh Bhatnagar | Oct 09, 2026, 11:22 IST
क्या सच में बच सकती थी नाना पाटेकर की जान?
Nana Patekar Death: क्या सिर्फ 8 रुपए की दवा किसी की जान बचा सकती है? क्या हार्ट अटैक आने पर कुछ गोलियां खाकर मौत का खतरा कम किया जा सकता है? और क्या सही समय पर CPR मिलने से बंद हो चुकी धड़कन दोबारा शुरू हो सकती है? नाना पाटेकर के निधन से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं।
फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने एक मीडिया समूह से बातचीत में बताया कि हार्ट अटैक के दौरान शरीर में क्या होता है। उन्होंने यह भी समझाया कि समय पर दवा और इलाज मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना कैसे बढ़ सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक नाना पाटेकर गोवा स्थित अपने घर में थे। रात करीब ढाई बजे अचानक उनके सीने में तेज दर्द शुरू हुआ था। दर्द इतना अधिक था कि वह बुरी तरह बेचैन हो गए थे।
उस समय घर में उनके पास कोई मौजूद नहीं था। उन्होंने मदद के लिए अपने एक दोस्त को मैसेज किया था। दोस्त समय पर मैसेज नहीं देख पाया। जब वह उनके पास पहुंचा तो सुबह के करीब सवा चार बज चुके थे।
इसके बाद एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने CPR सहित कई मेडिकल प्रक्रियाओं से उन्हें बचाने की कोशिश की थी। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार उनकी जान नहीं बच सकी।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है। यदि उन्हें शुरुआत में ही दवा मिल जाती तो क्या स्थिति बदल सकती थी?
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने तीन दवाओं का जिक्र किया है। इनमें एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल और एटोरवास्टेटिन शामिल हैं।
ये दवाएं दिल के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। इनमें से कुछ दवाएं खून के थक्के को बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं। दूसरी दवा नसों में मौजूद प्लाक को स्थिर करने में मदद करती है।
हालांकि यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है। ये दवाएं हार्ट अटैक का पूरा इलाज नहीं हैं। न ही यह साबित है कि इनसे अस्पताल पहुंचने का सुरक्षित समय निश्चित रूप से बढ़ जाता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना तीनों दवाएं एक साथ लेना खतरनाक हो सकता है।
अब समझिए कि हार्ट अटैक आने पर दिल में क्या गड़बड़ी होती है।
दरअसल दिल तक खून पहुंचाने वाली कई नसें होती हैं। इनमें से किसी नस के अचानक बंद होने से हार्ट अटैक हो सकता है।
नस बंद होते ही दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पहुंचना कम हो जाता है। इसके बाद दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने लगता है।
मरीज को सीने में तेज दर्द और भारीपन महसूस हो सकता है। अचानक पसीना आने लगता है। सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
कुछ लोगों को उल्टी या गैस जैसी परेशानी महसूस होती है। इसी वजह से कई बार लोग हार्ट अटैक को एसिडिटी समझ बैठते हैं।
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते हैं कि एस्पिरिन (Aspirin) खून की प्लेटलेट्स को आपस में चिपकने से रोकती है। इससे थक्का बढ़ने की प्रक्रिया को कम करने में मदद मिलती है।
हार्ट अटैक के कुछ मामलों में डॉक्टर इसे तुरंत देने की सलाह देते हैं। हालांकि एलर्जी और खून बहने जैसी समस्याओं वाले मरीजों को इससे खतरा हो सकता है।
डॉक्टर के मुताबिक, क्लोपिडोग्रेल (Clopidogrel) भी एक एंटी-प्लेटलेट दवा है। यह खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को कम करती है।
हार्ट अटैक के इलाज में डॉक्टर इसे एस्पिरिन के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि हर मरीज को इसकी जरूरत नहीं होती। इसकी खुराक भी डॉक्टर ही तय करते हैं।
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी का कहना है कि एटोरवास्टेटिन (Atorvastatin) कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा है। यह नसों में जमा प्लाक को स्थिर करने में मदद करती है।
हार्ट अटैक के बाद इसके इस्तेमाल से भविष्य में दिल से जुड़ी परेशानियों का खतरा कम किया जा सकता है। हालांकि यह तुरंत बंद नस खोलने का काम नहीं करती।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नाना पाटेकर एसिस्टोली (Asystole) नाम की गंभीर स्थिति में पहुंच गए थे।
एसिस्टोली का मतलब है कि दिल की प्रभावी इलेक्ट्रिकल गतिविधि बंद हो गई है। ऐसी स्थिति में मरीज की नब्ज नहीं मिलती और वह बेहोश हो जाता है।
डॉक्टरों के लिए यह बेहद मुश्किल स्थिति होती है। मरीज को तत्काल CPR और दूसरी आपातकालीन चिकित्सा की जरूरत पड़ती है।
हालांकि नाना पाटेकर के मामले में एसिस्टोली कब हुआ और उसकी वजह क्या थी, इसकी पुष्टि मेडिकल रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation एक जीवनरक्षक प्रक्रिया है।
जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है तो शरीर में खून का प्रवाह रुकने लगता है।
ऐसी स्थिति में छाती को लगातार दबाकर खून का कुछ प्रवाह बनाए रखने की कोशिश की जाती है। इसी प्रक्रिया को CPR कहा जाता है।
यदि मरीज बेहोश है और सामान्य सांस नहीं ले रहा है तो तुरंत CPR शुरू करना चाहिए। समय पर CPR मिलने से बचने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि CPR हर बार धड़कन वापस शुरू नहीं कर पाता। इसका नतीजा कार्डिएक अरेस्ट के कारण और इलाज में लगी देरी पर निर्भर करता है।
अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता है कि डॉक्टर इलेक्ट्रिक शॉक देकर बंद दिल को दोबारा चालू कर देते हैं।
असल जिंदगी में मामला थोड़ा अलग होता है।
डॉक्टर कुछ खास प्रकार की खतरनाक अनियमित धड़कनों में इलेक्ट्रिक शॉक देते हैं। इनमें वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन और पल्सलेस वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया शामिल हैं।
हालांकि एसिस्टोली में सामान्य तौर पर इलेक्ट्रिक शॉक नहीं दिया जाता है। ऐसी स्थिति में CPR और दूसरी जरूरी दवाओं से इलाज किया जाता है।
डॉ. त्रिपाठी ने हार्ट अटैक के इलाज में समय की अहमियत बताई है।
गंभीर हार्ट अटैक में डॉक्टर जल्द से जल्द बंद नस खोलने की कोशिश करते हैं। इसके लिए एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ सकती है।
एंजियोप्लास्टी में एक पतली नली के जरिए बंद नस तक पहुंचा जाता है। इसके बाद बैलून या स्टेंट की मदद से खून का रास्ता खोला जा सकता है।
कुछ गंभीर मामलों में 90 मिनट के भीतर एंजियोप्लास्टी करने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि यह समय इलाज की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
इसका मतलब यह नहीं कि 90 मिनट में इलाज मिलने से हर मरीज बच ही जाएगा। फिर भी जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, जान बचने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
सबसे पहले मरीज की हालत को गंभीरता से लें। सीने में तेज दर्द और पसीना आने पर तुरंत एंबुलेंस बुलाएं।
मरीज को आराम से बैठाएं और उसे अकेला न छोड़ें। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने से बचना चाहिए।
डॉक्टर या इमरजेंसी मेडिकल टीम की सलाह के बिना दवाएं न दें। खासकर तीनों दवाओं को मिलाकर खुद से हार्ट अटैक किट न बनाएं।
अगर मरीज अचानक बेहोश हो जाए और सामान्य सांस न ले रहा हो तो तुरंत CPR शुरू करें। उपलब्ध AED मशीन का इस्तेमाल उसके निर्देशों के अनुसार करें।
यह सवाल किसी भी परिवार के मन में आ सकता है। खासकर तब जब मरीज को मदद मिलने में देरी हुई हो।
लेकिन केवल तीन दवाएं मौजूद होने से किसी की जान निश्चित रूप से बच जाती, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
हार्ट अटैक कितना गंभीर था, दिल की कौन सी नस बंद हुई और कार्डिएक अरेस्ट कब हुआ, ये सभी बातें महत्वपूर्ण होती हैं।
नाना पाटेकर से जुड़ी रिपोर्ट ने एक जरूरी बात फिर सामने रखी है। हार्ट अटैक में सबसे कीमती चीज समय है। सही समय पर मेडिकल सहायता, जरूरी दवा और CPR से मरीज के बचने की संभावना बढ़ सकती है।
रात ढाई बजे सीने में उठा दर्द, मदद पहुंचने में हुई देरी
उस समय घर में उनके पास कोई मौजूद नहीं था। उन्होंने मदद के लिए अपने एक दोस्त को मैसेज किया था। दोस्त समय पर मैसेज नहीं देख पाया। जब वह उनके पास पहुंचा तो सुबह के करीब सवा चार बज चुके थे।
इसके बाद एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने CPR सहित कई मेडिकल प्रक्रियाओं से उन्हें बचाने की कोशिश की थी। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार उनकी जान नहीं बच सकी।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है। यदि उन्हें शुरुआत में ही दवा मिल जाती तो क्या स्थिति बदल सकती थी?
क्या 8 रुपए की दवा से मिल सकता था थोड़ा और समय?
ये दवाएं दिल के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। इनमें से कुछ दवाएं खून के थक्के को बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं। दूसरी दवा नसों में मौजूद प्लाक को स्थिर करने में मदद करती है।
हालांकि यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है। ये दवाएं हार्ट अटैक का पूरा इलाज नहीं हैं। न ही यह साबित है कि इनसे अस्पताल पहुंचने का सुरक्षित समय निश्चित रूप से बढ़ जाता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना तीनों दवाएं एक साथ लेना खतरनाक हो सकता है।
हार्ट अटैक आते ही दिल के अंदर क्या होता है?
दरअसल दिल तक खून पहुंचाने वाली कई नसें होती हैं। इनमें से किसी नस के अचानक बंद होने से हार्ट अटैक हो सकता है।
नस बंद होते ही दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पहुंचना कम हो जाता है। इसके बाद दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने लगता है।
मरीज को सीने में तेज दर्द और भारीपन महसूस हो सकता है। अचानक पसीना आने लगता है। सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
कुछ लोगों को उल्टी या गैस जैसी परेशानी महसूस होती है। इसी वजह से कई बार लोग हार्ट अटैक को एसिडिटी समझ बैठते हैं।
वो तीन दवाएं कौन सी हैं जिनकी हो रही चर्चा?
पहली दवा एस्पिरिन
हार्ट अटैक के कुछ मामलों में डॉक्टर इसे तुरंत देने की सलाह देते हैं। हालांकि एलर्जी और खून बहने जैसी समस्याओं वाले मरीजों को इससे खतरा हो सकता है।
दूसरी दवा क्लोपिडोग्रेल
हार्ट अटैक के इलाज में डॉक्टर इसे एस्पिरिन के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि हर मरीज को इसकी जरूरत नहीं होती। इसकी खुराक भी डॉक्टर ही तय करते हैं।
तीसरी दवा एटोरवास्टेटिन
हार्ट अटैक के बाद इसके इस्तेमाल से भविष्य में दिल से जुड़ी परेशानियों का खतरा कम किया जा सकता है। हालांकि यह तुरंत बंद नस खोलने का काम नहीं करती।
हार्ट अटैक में काम आने वाली 3 दवाइयां
नाना पाटेकर के मामले में क्या हुआ होगा?
एसिस्टोली का मतलब है कि दिल की प्रभावी इलेक्ट्रिकल गतिविधि बंद हो गई है। ऐसी स्थिति में मरीज की नब्ज नहीं मिलती और वह बेहोश हो जाता है।
डॉक्टरों के लिए यह बेहद मुश्किल स्थिति होती है। मरीज को तत्काल CPR और दूसरी आपातकालीन चिकित्सा की जरूरत पड़ती है।
हालांकि नाना पाटेकर के मामले में एसिस्टोली कब हुआ और उसकी वजह क्या थी, इसकी पुष्टि मेडिकल रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
यदि समय पर CPR मिलता तो क्या होता?
जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है तो शरीर में खून का प्रवाह रुकने लगता है।
ऐसी स्थिति में छाती को लगातार दबाकर खून का कुछ प्रवाह बनाए रखने की कोशिश की जाती है। इसी प्रक्रिया को CPR कहा जाता है।
यदि मरीज बेहोश है और सामान्य सांस नहीं ले रहा है तो तुरंत CPR शुरू करना चाहिए। समय पर CPR मिलने से बचने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि CPR हर बार धड़कन वापस शुरू नहीं कर पाता। इसका नतीजा कार्डिएक अरेस्ट के कारण और इलाज में लगी देरी पर निर्भर करता है।
CPR देने की प्रक्रिया
क्या इलेक्ट्रिक शॉक से वापस आती है धड़कन?
असल जिंदगी में मामला थोड़ा अलग होता है।
डॉक्टर कुछ खास प्रकार की खतरनाक अनियमित धड़कनों में इलेक्ट्रिक शॉक देते हैं। इनमें वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन और पल्सलेस वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया शामिल हैं।
हालांकि एसिस्टोली में सामान्य तौर पर इलेक्ट्रिक शॉक नहीं दिया जाता है। ऐसी स्थिति में CPR और दूसरी जरूरी दवाओं से इलाज किया जाता है।
क्या 90 मिनट में अस्पताल पहुंचते तो बच सकती थी जान?
गंभीर हार्ट अटैक में डॉक्टर जल्द से जल्द बंद नस खोलने की कोशिश करते हैं। इसके लिए एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ सकती है।
एंजियोप्लास्टी में एक पतली नली के जरिए बंद नस तक पहुंचा जाता है। इसके बाद बैलून या स्टेंट की मदद से खून का रास्ता खोला जा सकता है।
कुछ गंभीर मामलों में 90 मिनट के भीतर एंजियोप्लास्टी करने का लक्ष्य रखा जाता है। हालांकि यह समय इलाज की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
इसका मतलब यह नहीं कि 90 मिनट में इलाज मिलने से हर मरीज बच ही जाएगा। फिर भी जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, जान बचने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
हार्ट अटैक आने पर ये गलती न करें।
हार्ट अटैक आए तो घर में क्या करें?
मरीज को आराम से बैठाएं और उसे अकेला न छोड़ें। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने से बचना चाहिए।
डॉक्टर या इमरजेंसी मेडिकल टीम की सलाह के बिना दवाएं न दें। खासकर तीनों दवाओं को मिलाकर खुद से हार्ट अटैक किट न बनाएं।
अगर मरीज अचानक बेहोश हो जाए और सामान्य सांस न ले रहा हो तो तुरंत CPR शुरू करें। उपलब्ध AED मशीन का इस्तेमाल उसके निर्देशों के अनुसार करें।
सबसे बड़ा सवाल, क्या नाना पाटेकर की जान बच सकती थी?
लेकिन केवल तीन दवाएं मौजूद होने से किसी की जान निश्चित रूप से बच जाती, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
हार्ट अटैक कितना गंभीर था, दिल की कौन सी नस बंद हुई और कार्डिएक अरेस्ट कब हुआ, ये सभी बातें महत्वपूर्ण होती हैं।
नाना पाटेकर से जुड़ी रिपोर्ट ने एक जरूरी बात फिर सामने रखी है। हार्ट अटैक में सबसे कीमती चीज समय है। सही समय पर मेडिकल सहायता, जरूरी दवा और CPR से मरीज के बचने की संभावना बढ़ सकती है।
FAQs
- नाना पाटेकर को हार्ट अटैक आने पर क्या हुआ था?
नाना पाटेकर को रात ढाई बजे सीने में तेज दर्द हुआ, जिससे वह बेचैन हो गए। मदद में देरी होने के कारण उनकी स्थिति गंभीर हो गई और उन्हें बाद में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। - हार्ट अटैक के समय मरीज को क्या करना चाहिए?
मरीज को तुरंत एंबुलेंस बुलानी चाहिए और आराम से बैठाना चाहिए। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने से बचें और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न दें। अगर मरीज बेहोश हो जाए और सामान्य सांस न ले रहा हो तो तुरंत CPR शुरू करें। - हार्ट अटैक में दवाओं का क्या महत्व है?
डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी के अनुसार, एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल और एटोरवास्टेटिन जैसी दवाएं हार्ट अटैक के इलाज में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ये अकेले इलाज नहीं हैं। सही समय पर इनका उपयोग मरीज के बचने की संभावना को बढ़ा सकता है।
आज रायपुर दौरे पर सीएम विष्णु देव साय: साइबर जागृति से लेकर करमा रितिर-2026 कार्यक्रम में होंगे शामिल
By Harrison Masih
मध्यप्रदेश में पेयजल पर संकट, ओंकारेश्वर बांध में 10 साल में सबसे कम पानी, मालवा-निमाड़ के बांध 26 से 73% खाली
By Amresh Kushwaha
MP में अब घर बैठे डाल सकेंगे वोट, नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में ई-वोटिंग की तैयारी, जानें किसे मिलेगा फायदा
By Sourabh Bhatnagar
MP के मेडिकल कॉलेजों में बंपर भर्तियों की तैयारी, 27 जिला अस्पतालों में बढ़ेंगे डॉक्टरों के पद; 3000 नर्सों का भी प्रस्ताव
By Amresh Kushwaha
गुंडी गर्ल्स गैंग कर रही गरबा का प्रचार, हाथ में पिस्टल, होठों पर सिगरेट, बिना लड़कियों के पास का क्या मतलब
By Arun Tiwari
आज सेवा संकल्प और जन विश्वास अभियान में शामिल होंगे सीएम मोहन यादव, ऐसा रहेगा उनका शेड्यूल
By Kaushiki
महंगे इलाज से मिलेगी मुक्ति: कैंसर की 110 दवाएं 70% तक होंगी सस्ती, MP में हर साल बढ़ रहे हैं 80 हजार नए मरीज
By Amresh Kushwaha