सड़क पर गड्ढे होने से पहले अलर्ट देगा AI, अब लेजर मैपिंग से होगी हाईवे की निगरानी
Anjali Dwivedi | May 05, 2026, 15:07 IST
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देश के 23 राज्यों में 20 हजार किमी नेशनल हाईवे की लेजर मैपिंग शुरू हो गई है। अब एआई तकनीक सड़क खराब होने से पहले ही अलर्ट देगी। हर 6 महीने में हाईवे की जांच करना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
भारत के नेशनल हाईवे अब हाईटेक होने जा रहे हैं। सरकार ने सड़कों की सुरक्षा के लिए डिजिटल कवच तैयार किया है। देश के 23 राज्यों में अब लेजर मैपिंग तकनीक शुरू हुई है। करीब 20 हजार किलोमीटर हाईवे की अब बारीकी से निगरानी होगी।
यह सिस्टम सड़क पर गड्ढे होने से पहले ही अलर्ट देगा। एआई खराब सड़क की सटीक जानकारी तुरंत दे देगा। अब हर छह महीने में हाईवे की जांच करना अनिवार्य है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया(NHAI) ने 50 आधुनिक वाहन तैनात किए हैं। इन वाहनों में 3D लेजर सेंसर और नेटवर्क सर्वे व्हीकल हैं। यह सिस्टम (एआई तकनीक) सड़क के खराब होने का इंतजार नहीं करता है। यह सड़क की सतह के नीचे बारीक क्रैक्स को पहचान लेता है।
माइक्रो-क्रैक्स का पता चलते ही सिस्टम अलर्ट जारी कर देता है। पंजाब समेत 23 राज्यों में यह आधुनिक तकनीक काम करेगी। इससे सड़कों की उम्र बढ़ेगी और सफर सुरक्षित होगा।
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भारत में अब अमेरिका जैसा IRI रेटिंग सिस्टम लागू होगा। यह सिस्टम सड़क की गुणवत्ता को मापने का अंतरराष्ट्रीय पैमाना है। अब कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर सड़क तुरंत ठीक करने का दबाव रहेगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 4 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।
यह सिस्टम खराब हिस्से को 10 सेमी तक रिकॉर्ड करता है। इससे इंजीनियरों को अब खराबी ढूंढने में मेहनत नहीं लगेगी। डेटा सीधे नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पास ऑनलाइन पहुंच जाएगा।
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे ट्रैफिक नहीं रुकता। सर्वे वाहन चलती गाड़ी से ही सड़क की प्रोफाइलिंग करते हैं। जीपीएस सिस्टम (गूगल मैप) खराब हिस्से की सटीक लोकेशन रिकॉर्ड कर लेता है। एआई खुद खराब हिस्सों को चिन्हित कर रिपोर्ट तैयार करेगा।
यह रिपोर्ट तुरंत मरम्मत करने वाली टीम के पास पहुंच जाएगी। एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। इससे हाईवे मैनेजमेंट में पारदर्शिता और तेजी आएगी।
नई तकनीक में डेटा के साथ कोई हेराफेरी नहीं हो सकेगी। डेटा को अब किसी रजिस्टर में हाथ से नहीं भरा जाएगा। सर्वे वाहन से डेटा सीधे क्लाउड सर्वर पर अपलोड होता है। इससे निचले स्तर पर जानकारी बदलना नामुमकिन हो गया है।
जनवरी 2026 से इस काम की शुरुआत हो चुकी है। यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। देश को कुल पाच अलग-अलग जोन में बांटा गया है।
पंजाब नॉर्थ जोन के तहत आता है, जहां 2 हजार 687 किमी सर्वे होगा। इसके लिए कुल 10 गाड़ियां तैनात कर दी गई हैं। ये गाड़ियां दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को कवर करेंगी।
सड़कों के साथ-साथ पुलों के जोड़ों की भी जांच होगी। सेंसर चेक करेंगे कि पुल का कंक्रीट कहीं कमजोर तो नहीं। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे पर अभी इस तकनीक से जांच जारी है। अंबाला से जालंधर तक के हाईवे की भी प्रोफाइलिंग हो रही है।
सड़क कितनी आरामदायक है, इसे IRI मानक से मापा जाएगा। अगर रेटिंग खराब आई, तो संबंधित कंपनी को काम करना होगा। कंक्रीट के कमजोर होने या गैप बढ़ने की सूचना तुरंत मिलेगी। इससे बड़े हादसों को समय रहते रोका जा सकेगा।
अगले 6 से 8 महीनों में सड़कों में बड़ा सुधार दिखेगा। अब गड्ढे होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेजर सर्वे से भारत की सड़कें अब वर्ल्ड क्लास बनेंगी। यह डिजिटल निगरानी भविष्य के सफर को सुखद बनाएगी।
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यह सिस्टम सड़क पर गड्ढे होने से पहले ही अलर्ट देगा। एआई खराब सड़क की सटीक जानकारी तुरंत दे देगा। अब हर छह महीने में हाईवे की जांच करना अनिवार्य है।
3D सेंसर और नेटवर्क सर्वे व्हीकल हुए तैनात
माइक्रो-क्रैक्स का पता चलते ही सिस्टम अलर्ट जारी कर देता है। पंजाब समेत 23 राज्यों में यह आधुनिक तकनीक काम करेगी। इससे सड़कों की उम्र बढ़ेगी और सफर सुरक्षित होगा।
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अमेरिका की तर्ज पर अब भारत में सर्वे
यह सिस्टम खराब हिस्से को 10 सेमी तक रिकॉर्ड करता है। इससे इंजीनियरों को अब खराबी ढूंढने में मेहनत नहीं लगेगी। डेटा सीधे नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पास ऑनलाइन पहुंच जाएगा।
बिना ट्रैफिक रोके होगी सड़कों की जांच
यह रिपोर्ट तुरंत मरम्मत करने वाली टीम के पास पहुंच जाएगी। एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। इससे हाईवे मैनेजमेंट में पारदर्शिता और तेजी आएगी।
डेटा के साथ नहीं होगी छेड़छाड़
जनवरी 2026 से इस काम की शुरुआत हो चुकी है। यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। देश को कुल पाच अलग-अलग जोन में बांटा गया है।
नॉर्थ जोन में कितने राज्य शामिल
सड़कों के साथ-साथ पुलों के जोड़ों की भी जांच होगी। सेंसर चेक करेंगे कि पुल का कंक्रीट कहीं कमजोर तो नहीं। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे पर अभी इस तकनीक से जांच जारी है। अंबाला से जालंधर तक के हाईवे की भी प्रोफाइलिंग हो रही है।
6 से 8 महीने में सुधरेंगी देश की सड़कें
अगले 6 से 8 महीनों में सड़कों में बड़ा सुधार दिखेगा। अब गड्ढे होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेजर सर्वे से भारत की सड़कें अब वर्ल्ड क्लास बनेंगी। यह डिजिटल निगरानी भविष्य के सफर को सुखद बनाएगी।
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आदमपुर खंती कचरा बनेगा नेशनल हाईवे की नींव, वेस्ट मटेरियल से बनेगा MP का पहला सुपर हाईवे
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