New Labour Law 2026: नौकरी छोड़ने के 2 दिन के अंदर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट, जानें नियम
Manya Jain | Apr 04, 2026, 14:48 IST
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नए लेबर लॉ 2026 के तहत अब नौकरी छोड़ने पर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट केवल 2 वर्किंग डेज (कार्य दिवस) में करना होगा। सरकार के इस फैसले से करोड़ों कर्मचारियों का महीनों का इंतजार खत्म होगा।
देश दुनिया न्यूज.भारत सरकार ने देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के हित में एक बड़ा बदलाव किया है। अक्सर देखा जाता था कि जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता था या उसे निकाला जाता था, तो अपने ही हक का पैसा पाने के लिए उसे महीनों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। पुराने नियमों के तहत फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (Full and Final Settlement) में आमतौर पर 45 से 90 दिनों का समय लग जाता था।
लेकिन अब, नए लेबर लॉ 2026 (New Labour Law 2026 ) के लागू होने के साथ ही यह तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। नए नियमों के अनुसार, अब कंपनियों को अपने कर्मचारियों का पूरा बकाया पैसा केवल 2 वर्किंग डेज (2 Working Days) के भीतर चुकाना होगा। यह कदम न केवल कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि नियोक्ताओं की जवाबदेही भी तय करेगा।
1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए इन नियमों को वेतन कोड, 2019 (Code on Wages, 2019) के तहत लागू किया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य लेबर कानूनों को सरल बनाना और कर्मचारियों को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त करना है।
नए प्रावधान के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी:
सरल भाषा में कहें तो, जब किसी कर्मचारी और कंपनी के बीच का प्रोफेशनल रिश्ता खत्म होता है, तो उस समय होने वाले अंतिम हिसाब-किताब को फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (Full and Final Settlement) कहा जाता है। इसमें कर्मचारी की मेहनत की कमाई, भत्ते और कंपनी की लिएबिलिटीज़ शामिल होती हैं।
पुराने सिस्टम में "45 दिन का नोटिस पीरियड" और "अगले महीने की 7 या 10 तारीख को सेटलमेंट" जैसे नियमों के कारण कर्मचारी परेशान रहते थे। कई बार छोटी कंपनियां महीनों तक पैसा रोके रखती थीं। भारत के लेबर रिफॉर्म्स (labour law india ) का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के साथ-साथ श्रमिकों के हितों की रक्षा करना भी है।
labour reforms 2025
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लेकिन अब, नए लेबर लॉ 2026 (
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क्या है नया नियम? (What is the New Rule?)
2 दिन के भीतर भुगतान अनिवार्य
- स्वेच्छा से नौकरी छोड़ता है (Resignation)।
- कंपनी द्वारा निकाला जाता है (Termination/Dismissal)।
- या यदि कंपनी ही बंद हो जाती है (Closure of establishment)।
फुल एंड फाइनल (FnF) सेटलमेंट क्या होता है?
FnF सेटलमेंट में क्या-क्या शामिल होता है?
- अंतिम सैलरी (Final Salary): कर्मचारी ने अपने आखिरी महीने में जितने दिन काम किया है, उस अवधि का पूरा वेतन।
- लीव एन्कैशमेंट (Leave Encashment): कर्मचारी के खाते में बची हुई छुट्टियों का नकद भुगतान।
- बोनस और इंसेंटिव (
Bonus and Incentives): कंपनी की पॉलिसी और परफॉर्मेंस के आधार पर मिलने वाला बकाया बोनस। - ग्रेच्युटी (
Gratuity ): नए नियमों में ग्रेच्युटी की पात्रता को लेकर भी चर्चा है। यदि कोई कर्मचारी पात्र है, तो उसे 30 दिन के भीतर यह राशि मिलनी चाहिए। - रिइम्बर्समेंट (Reimbursements): ऑफिस के काम से जुड़े खर्च जैसे यात्रा भत्ता (Conveyance) या अन्य मेडिकल खर्च जो कर्मचारी ने अपनी जेब से किए थे।
- कटौतियां (Deductions): इसमें टैक्स (TDS), एडवांस सैलरी की रिकवरी, या कंपनी की कोई संपत्ति (जैसे लैपटॉप/फोन) वापस न करने पर होने वाली कटौती शामिल है।
कर्मचारियों को मिलेंगे ये लाभ
- वित्तीय स्थिरता: नई नौकरी शुरू करने से पहले पैसों की तंगी नहीं होगी।
- पारदर्शिता: कंपनियों को अब हिसाब-किताब में देरी करने का बहाना नहीं मिलेगा।
- कानूनी सुरक्षा: नियम का उल्लंघन करने पर कंपनियां दंड की पात्र होंगी।
नए कानून की जरूरत क्यों पड़ी?
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