तीन राज्यों की एक सी कहानी; परीक्षा, पेपर लीक, जांच और फिर सिस्टम की चुप्पी... दोषी 'आजाद'
Jitendra Shrivastava | May 14, 2026, 19:44 IST
Photograph: (THESOOTR)
NEW DELHI. नीट परीक्षा रद्द होने के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आखिर इतनी सुरक्षा के बावजूद पेपर बाहर कैसे पहुंच जाता है? पुलिस निगरानी, GPS ट्रैकिंग, AI कैमरे, जैमर्स, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के बावजूद पेपर लीक हो रहे हैं।
देश में पेपर लीक नासूर बन चुका है। हर बार सरकारें दावा करती हैं कि इस बार व्यवस्था चाक-चौबंद है। हर बार तकनीक, निगरानी और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे होते हैं। फिर भी परीक्षा होती है, पेपर लीक होता है, हंगामा मचता है, जांच बैठती है और कुछ दिनों बाद मामला फाइलों में दब जाता है।
अब नीट परीक्षा रद्द होने के बाद एक बार फिर वही सवाल खड़ा है। आखिर इतनी सुरक्षा के बावजूद पेपर बाहर कैसे पहुंच जाता है? NEET जैसी परीक्षा के लिए पुलिस निगरानी, GPS ट्रैकिंग, AI कैमरे, जैमर्स, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और यूनिक वॉटरमार्क जैसी व्यवस्थाएं की गई थीं।
परीक्षार्थियों पर इतनी सख्ती थी कि ज्वेलरी और बटुए तक पर रोक लगा दी गई। बावजूद इसके परीक्षा रद्द करनी पड़ी, लेकिन असली कहानी सिर्फ नीट तक सीमित नहीं है।
'द सूत्र' ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पिछले वर्षों के पेपर लीक और भर्ती घोटालों की पड़ताल की। हमारी जांच में चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है। हर राज्य में कहानी करीब करीब एक जैसी मिली। पहले पेपर लीक होता है। फिर हंगामा मचता है।
जांच एजेंसियां सक्रिय होती हैं। कुछ गिरफ्तारियां होती हैं। राजनीतिक बयानबाजी शुरू होती है। फिर धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ जाता है। सालों बाद भी या तो दोषियों को सजा नहीं मिलती या बड़े आरोपी सिस्टम की खामियों के बीच बच निकलते हैं।
कहीं सर्वर हैक हुआ, कहीं Telegram और WhatsApp पर पेपर बिके। कहीं सॉल्वर गैंग सक्रिय मिले तो कहीं भर्ती आयोगों तक पर सवाल उठे। हर मामले में सबसे बड़ा नुकसान उस छात्र का हुआ, जिसने सालों मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की थी। यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का है।
मध्यप्रदेश में व्यापमं घोटाले के बाद उम्मीद थी कि भर्ती और परीक्षा व्यवस्था सुधरेगी। PEB का नाम बदलकर MPPEB और फिर ESB कर दिया गया, पर हालात नहीं बदले। 2020 से 2026 के बीच कई बड़े मामले सामने आए।
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2021: ऑनलाइन सर्वर हैक, तीन परीक्षाएं रद्द
अगस्त 2021 में SADO, RAEO और नर्स भर्ती परीक्षा में बड़ा खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि 10 फरवरी 2021 को पेपर डाउनलोड किया गया, जबकि परीक्षा अगले दिन 11 फरवरी को थी। तत्कालीन सरकार ने तीनों परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा की। तकनीकी जांच MPSEDC ने की। जांच में PEB अधिकारियों की संलिप्तता नहीं मिली। कोई बड़ी गिरफ्तारी नहीं हुई और मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ गया।
2023: बोर्ड परीक्षा के पेपर WhatsApp-Telegram पर वायरल
मार्च 2023 में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के कई पेपर कथित रूप से सोशल मीडिया पर वायरल हुए। संस्कृत, हिंदी और विज्ञान जैसे विषयों के पेपर WhatsApp और Telegram ग्रुपों में घूमते रहे। भोपाल और रायसेन के केंद्र से पेपर बाहर आने की बात सामने आई।
कुछ लोग गिरफ्तार हुए। भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में FIR दर्ज हुई। क्राइम ब्रांच ने Telegram ग्रुपों पर निगरानी बढ़ाई। 8 सदस्यीय जांच समिति बनाई गई। सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई, जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने माना कि कोई गिरोह काम कर रहा है, जो पेपर बाहर निकालकर सिस्टम को बदनाम करना चाहता है। बाद में यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझ गया।
2023: पटवारी भर्ती परीक्षा और एक सेंटर का चमत्कार
जुलाई 2023 में पटवारी भर्ती परीक्षा का रिजल्ट आया तो सबसे बड़ा सवाल ग्वालियर के NRI कॉलेज सेंटर पर उठा। टॉप-10 में 7 अभ्यर्थी इसी सेंटर से निकले। रिश्वत के 15 लाख रुपए तक की चर्चा हुई। तीसरी टॉपर पूनम रजावत सामान्य सवालों के जवाब तक नहीं दे सकीं, यहां तक कि मध्यप्रदेश के जिलों की संख्या तक नहीं बता पाईं।
सॉल्वर गैंग और आधार बायोमेट्रिक बदलने जैसे आरोप लगे। क्राइम ब्रांच ने थाटीपुर से दो अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया। पांच आरोपियों पर FIR हुई। बाद में जांच समिति ने क्लीनचिट दे दी। चयनित अभ्यर्थियों को ज्वाइनिंग लेटर जारी हो गए और बड़े आरोपी बच निकले।
छत्तीसगढ़ में 2011 का CGPMT पेपर लीक कांड आज भी लोगों को याद है। उस समय दावा किया गया था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पेपर लीक करवाने वालों के अलावा 76 अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया गया था। लेकिन 15 साल बीतने के बाद भी किसी को सजा नहीं मिली। कई आरोपी डॉक्टर बन चुके हैं और सिस्टम आज भी अदालतों में उलझा हुआ है।
2017: नर्सिंग पेपर Telegram पर बिक रहा था?
2017 में नर्सिंग परीक्षा का पेपर Telegram पर 4-4 हजार रुपए में बेचे जाने के आरोप लगे। शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई के बजाय परीक्षा करवा दी गई। सवाल उठे, लेकिन सिस्टम नहीं बदला।
2025: 12वीं का पेपर 3000 रुपए में बेचने का आरोप
2025 में छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12वीं हिंदी परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आया। NSUI नेता वेणु जंघेल की गिरफ्तारी हुई। आरोप था कि 3000 रुपए में पेपर बेचा जा रहा था, लेकिन जांच यह साफ नहीं कर सकी कि पेपर कहां से लीक हुआ और इसमें कौन-कौन शामिल था।
CGPSC 2021-22 भर्ती प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठे। आरोप लगे कि रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाया गया और mains के प्रश्नपत्र पहले ही पहुंचा दिए गए। मामला इतना बढ़ा कि EOW और ACB ने FIR दर्ज की। बाद में जांच CBI को सौंपी गई। पूर्व चेयरमैन, सचिव और अधिकारियों के घरों पर छापे पड़े। कई गिरफ्तारियां हुईं। 2026 में 29 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल हुई। कुछ आरोपी जेल में हैं और मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।
जनवरी 2024 की राजस्व निरीक्षक प्रमोशन परीक्षा में आरोप लगे कि परीक्षा से पहले चुनिंदा लोगों तक पेपर पहुंचाया गया। होटल और रिसॉर्ट में उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र देने की बात सामने आई। EOW ने FIR दर्ज की। सात जिलों में छापेमारी हुई। डिजिटल सबूत जब्त किए गए। गिरफ्तारियां हुईं और करीब 3000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल हुई। जांच अभी भी जारी है।
2022 से 2024 के बीच व्यापमं शिक्षक भर्ती में सॉल्वर गैंग पकड़ाए। फर्जी अभ्यर्थी बैठाने और नकल करवाने के आरोप लगे। कई गिरफ्तारियां हुईं, मोबाइल और नकदी जब्त हुई और कई उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द करनी पड़ी। 2024 में पुलिस भर्ती प्रक्रिया पर भी अंक बदलने और परीक्षा में छेड़छाड़ के आरोप लगे। भर्ती प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी और SIT जांच बैठानी पड़ी।
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राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की गड़बड़ियां इतनी बड़ी राजनीतिक बहस बन गईं कि भाजपा ने इन्हें चुनावी मुद्दा बनाया। सत्ता में आने के बाद भजनलाल सरकार ने अशोक गहलोत सरकार के समय हुई भर्तियों की जांच SOG को सौंप दी।
SOG ने 15 से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं को रडार पर लिया। इनमें वे परीक्षाएं शामिल हैं जो या तो पेपर लीक के कारण रद्द हुईं या जिनमें धांधलियों के आरोप लगे।
राजस्थान लोक सेवा आयोग की SI/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2021 सबसे बड़ा विवाद बनी। पेपर लीक, डमी अभ्यर्थी और धांधली के आरोपों ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। SOG जांच में अब तक 130 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इनमें करीब 70 चयनित अभ्यर्थी भी शामिल हैं।
हाई कोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2024 को भर्ती परीक्षा रद्द कर दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश बरकरार रखा। अब आयोग ने दोबारा परीक्षा की तारीख 20 सितंबर 2026 तय की है।
यह परीक्षा 859 पदों के लिए होगी और सिर्फ वही 3 लाख 83 हजार 097 अभ्यर्थी इसमें बैठ सकेंगे, जिन्होंने 2021 में दोनों पेपर दिए थे। नए आवेदन नहीं लिए जाएंगे।
RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा पर कृषि व्याख्याता और SI भर्ती परीक्षा के पेपर बेचने के गंभीर आरोप लगे। उन पर 60 लाख रुपए में पेपर बेचने का आरोप है और उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।
पूर्व सदस्य रामूराम रायका भी SI भर्ती घोटाले में जेल जा चुके हैं। उन पर अपने बेटे और बेटियों को SI भर्ती में फायदा पहुंचाने के आरोप हैं। फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। स्कूल व्याख्याता भर्ती और RAS-2021 मामले में SOG ने RPSC के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह राठौड़ से भी पूछताछ की है।
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की इन घटनाओं को अलग-अलग मामलों की तरह नहीं देखा जा सकता। पैटर्न लगभग हर जगह एक जैसा दिखता है। पहले परीक्षा होती है। फिर पेपर लीक या धांधली के आरोप लगते हैं। फिर जांच बैठती है। कुछ गिरफ्तारियां होती हैं। राजनीतिक बयान आते हैं। कुछ मामलों में परीक्षा रद्द होती है, कुछ में नहीं। फिर अदालतों में सालों तक सुनवाई चलती रहती है। और इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नुकसान उस छात्र का होता है, जिसने सालों मेहनत की होती है।
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अब नीट परीक्षा रद्द होने के बाद एक बार फिर वही सवाल खड़ा है। आखिर इतनी सुरक्षा के बावजूद पेपर बाहर कैसे पहुंच जाता है? NEET जैसी परीक्षा के लिए पुलिस निगरानी, GPS ट्रैकिंग, AI कैमरे, जैमर्स, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और यूनिक वॉटरमार्क जैसी व्यवस्थाएं की गई थीं।
परीक्षार्थियों पर इतनी सख्ती थी कि ज्वेलरी और बटुए तक पर रोक लगा दी गई। बावजूद इसके परीक्षा रद्द करनी पड़ी, लेकिन असली कहानी सिर्फ नीट तक सीमित नहीं है।
'द सूत्र' ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पिछले वर्षों के पेपर लीक और भर्ती घोटालों की पड़ताल की। हमारी जांच में चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है। हर राज्य में कहानी करीब करीब एक जैसी मिली। पहले पेपर लीक होता है। फिर हंगामा मचता है।
जांच एजेंसियां सक्रिय होती हैं। कुछ गिरफ्तारियां होती हैं। राजनीतिक बयानबाजी शुरू होती है। फिर धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ जाता है। सालों बाद भी या तो दोषियों को सजा नहीं मिलती या बड़े आरोपी सिस्टम की खामियों के बीच बच निकलते हैं।
कहीं सर्वर हैक हुआ, कहीं Telegram और WhatsApp पर पेपर बिके। कहीं सॉल्वर गैंग सक्रिय मिले तो कहीं भर्ती आयोगों तक पर सवाल उठे। हर मामले में सबसे बड़ा नुकसान उस छात्र का हुआ, जिसने सालों मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की थी। यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का है।
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मार्च 2023 में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के कई पेपर कथित रूप से सोशल मीडिया पर वायरल हुए। संस्कृत, हिंदी और विज्ञान जैसे विषयों के पेपर WhatsApp और Telegram ग्रुपों में घूमते रहे। भोपाल और रायसेन के केंद्र से पेपर बाहर आने की बात सामने आई।
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यह परीक्षा 859 पदों के लिए होगी और सिर्फ वही 3 लाख 83 हजार 097 अभ्यर्थी इसमें बैठ सकेंगे, जिन्होंने 2021 में दोनों पेपर दिए थे। नए आवेदन नहीं लिए जाएंगे।
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