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News In short
- गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम CM हिमंता बिस्वा सरमा पर हेट स्पीच के आरोप में नोटिस जारी किया।
- याचिका में आरोप है कि असम पुलिस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR नहीं की।
- कोर्ट ने केंद्र सरकार, असम मुख्यमंत्री को नोटिस भेजा।
- सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने शपथ का उल्लंघन किया।
- याचिका में वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।
News in detail
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयान पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस हेट स्पीच पर रोक लगाने की याचिका पर जारी किया गया। याचिका में आरोप है कि असम पुलिस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR नहीं की। वीडियो वायरल होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका असमिया स्कॉलर डॉ. हिरेन गोहेन और दो अन्य ने दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिटीशनर्स को हाईकोर्ट जाने को कहा था।
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कोर्ट ने भेजा नोटिस
चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की बेंच ने सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया। नोटिस केंद्र सरकार, असम सरकार, असम डीजीपी और मुख्यमंत्री को जारी किया गया। कोर्ट ने अंतरिम राहत की अर्जी पर भी नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि इस स्टेज पर बीजेपी को नोटिस जरूरी नहीं है।
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आरोपी का काम आदतन: अभिषेक मनु सिंघवी
पिटीशनर की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि आरोपी का काम आदतन है। वह शपथ और आर्टिकल 14, 15 का उल्लंघन कर रहा है। सिंघवी ने कहा कि पब्लिक ऑफिस की शपथ लेने के बाद ऐसे मामले मंजूर नहीं होते। उन्होंने 2023 में छत्तीसगढ़ में सरमा की टिप्पणी का जिक्र किया। सिंघवी ने कहा कि लव जिहाद और धर्म परिवर्तन पर CM की टिप्पणियों का पूरे भारत में असर था। अल्पसंख्यकों को 'मिया मुस्लिम' कहकर अपमानित किया गया।
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क्या है पूरा मामला ?
सुप्रीम कोर्ट ने 16 फरवरी को उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें मुख्यमंत्री सरमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिकाओं में एक वायरल वीडियो दिखाया गया था, जिसमें वह कथित तौर पर किसी विशेष समुदाय के लोगों को राइफल से निशाना साधते हुए दिखाई दे रहे थे। 'मिया' असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक शब्द है। गैर-बंगाली भाषी लोग उन्हें बांग्लादेशी आप्रवासी मानते हैं। हाल के वर्षों में, इस समुदाय के कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप यह शब्द अपनाया है।
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