राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई का कार्यकाल समाप्त: 6 साल में न पूछा कोई सवाल, केवल एक बहस में लिया हिस्सा
Pawan Modiya | Mar 16, 2026, 19:12 IST
Photograph: (the sootr)
पूर्व CJI रंजन गोगोई का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त। 6 वर्षों में केवल एक बहस में हिस्सा और कोई प्रश्न नहीं पूछने पर चर्चा तेज। उनके कार्यकाल की समीक्षा करने पर यह भी सामने आया कि राज्यसभा में उनकी सक्रियता सीमित रही।
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) का राज्यसभा में नामित सदस्य के रूप में छह वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो गया है। सोमवार को जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) ने उन्हें औपचारिक विदाई दी और उनके योगदान की सराहना की।
सभापति ने कहा कि एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता के रूप में गोगोई ने सदन में अपने कानूनी अनुभव और समझ के आधार पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। हालांकि उनके पूरे कार्यकाल की समीक्षा करने पर यह भी सामने आया कि राज्यसभा में उनकी सक्रियता (Rajya Sabha Participation) सीमित रही।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Former Chief Justice of India) को 16 मार्च 2020 को केंद्र सरकार ने राज्यसभा के लिए नामित किया था। यह नियुक्ति उनके CJI पद से सेवानिवृत्त होने के मात्र चार महीने बाद हुई थी।
इस निर्णय ने उस समय देश में व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया था। कई आलोचकों ने इसे “क्विड प्रो क्वो” (Quid Pro Quo) का मामला बताया, यानी सरकार के पक्ष में दिए गए फैसलों के बदले यह पद दिया गया।
हालांकि, उस समय बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council of India) के अध्यक्ष ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा था कि गोगोई न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच एक सेतु (Bridge between Judiciary and Executive) का काम कर सकते हैं।
एक्सीडेंट में सिर्फ ड्राइवर नहीं… गलत लाइसेंस, गड्ढे और खराब सड़क बनाने वालों पर भी सवाल
यूपीएससी टॉपर्स के पास कितनी प्रॉपर्टी, जानिए टीना डाबी, कनिष्क कटारिया और गौरव अग्रवाल का पूरा विवरण
पीआरएस (PRS Legislative Research) के आंकड़ों के अनुसार रंजन गोगोई की राज्यसभा उपस्थिति (Rajya Sabha Attendance) लगभग 53 प्रतिशत रही। राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि छह वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने केवल एक बार बहस में भाग लिया। यह बहस अगस्त 2023 में दिल्ली सेवा विधेयक (Delhi Services Bill) से संबंधित थी।
इस दौरान उन्होंने बेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत (Basic Structure Doctrine) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस सिद्धांत की न्यायशास्त्रीय आधारशिला विवादास्पद है और इसे लेकर अलग-अलग मत हैं। यह टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि अपने ही एक पुराने फैसले में (जब वे मुख्य न्यायाधीश थे) उन्होंने रोजर मैथ्यू केस (Roger Mathew Case) में इसी सिद्धांत का समर्थन किया था।
रोजर मैथ्यू मामले में गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने ट्रिब्यूनल नियम 2017 (Tribunal Rules 2017) को रद्द कर दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि यह नियम न्यायिक स्वतंत्रता (Judicial Independence) को कमजोर करते हैं। लेकिन राज्यसभा में दिए गए उनके बयान ने इस मुद्दे पर नई बहस को जन्म दिया क्योंकि यह उनके पुराने निर्णय से अलग प्रतीत हुआ।
गोगोई के कार्यकाल के दौरान संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:
ममता कालिया की जीते जी इलाहाबाद को साहित्य अकादमी 2025 पुरस्कार
अर्धसैनिक बलों में 93 हजार से ज्यादा पद खाली, सरकार ने संसद में खोला आंकड़ों का पिटारा
दिसंबर 2021 में एक साक्षात्कार के दौरान पत्रकार श्रीनिवासन जैन (Srinivasan Jain) ने उनसे उनकी कम उपस्थिति के बारे में सवाल पूछा था। इस पर गोगोई ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान सदन की बैठने की व्यवस्था उन्हें सहज नहीं लगती थी।
उन्होंने कहा:
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं और किसी पार्टी के व्हिप (Party Whip) से बंधे नहीं हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रंजन गोगोई का राज्यसभा कार्यकाल कई कारणों से चर्चा में रहा। एक ओर उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ। वहीं, दूसरी ओर उनकी सीमित सक्रियता ने भी कई सवाल खड़े किए। हालांकि समर्थकों का कहना है कि गोगोई जैसे विधिवेत्ता का संसद में होना अपने आप में महत्वपूर्ण है, भले ही वे नियमित रूप से बहस में भाग न लें।
सभापति ने कहा कि एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता के रूप में गोगोई ने सदन में अपने कानूनी अनुभव और समझ के आधार पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। हालांकि उनके पूरे कार्यकाल की समीक्षा करने पर यह भी सामने आया कि राज्यसभा में उनकी सक्रियता (Rajya Sabha Participation) सीमित रही।
रंजन गोगोई राज्यसभा नियुक्ति
सेवानिवृत्ति के चार महीने बाद मिला नामांकन
इस निर्णय ने उस समय देश में व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया था। कई आलोचकों ने इसे “क्विड प्रो क्वो” (Quid Pro Quo) का मामला बताया, यानी सरकार के पक्ष में दिए गए फैसलों के बदले यह पद दिया गया।
हालांकि, उस समय बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council of India) के अध्यक्ष ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा था कि गोगोई न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच एक सेतु (Bridge between Judiciary and Executive) का काम कर सकते हैं।
एक्सीडेंट में सिर्फ ड्राइवर नहीं… गलत लाइसेंस, गड्ढे और खराब सड़क बनाने वालों पर भी सवाल
यूपीएससी टॉपर्स के पास कितनी प्रॉपर्टी, जानिए टीना डाबी, कनिष्क कटारिया और गौरव अग्रवाल का पूरा विवरण
छह साल में केवल एक बहस में हिस्सा
इस दौरान उन्होंने बेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत (Basic Structure Doctrine) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस सिद्धांत की न्यायशास्त्रीय आधारशिला विवादास्पद है और इसे लेकर अलग-अलग मत हैं। यह टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि अपने ही एक पुराने फैसले में (जब वे मुख्य न्यायाधीश थे) उन्होंने रोजर मैथ्यू केस (Roger Mathew Case) में इसी सिद्धांत का समर्थन किया था।
पहले दिए फैसले से अलग बयान
रंजन गोगोई का राज्यसभा प्रदर्शन
- कुल कार्यकाल: 6 वर्ष
- उपस्थिति: लगभग 53%
- बहस में भागीदारी: 1 बार
- पूछे गए प्रश्न: 0
- निजी सदस्य विधेयक: 0
कई महत्वपूर्ण बहसों से दूरी
- कृषि कानून (Farm Laws)
- नए आपराधिक कानून (New Criminal Laws)
- ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम (Tribunal Reforms Act)
- वक्फ संशोधन अधिनियम (Waqf Amendment Bill)
- महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill)
ममता कालिया की जीते जी इलाहाबाद को साहित्य अकादमी 2025 पुरस्कार
अर्धसैनिक बलों में 93 हजार से ज्यादा पद खाली, सरकार ने संसद में खोला आंकड़ों का पिटारा
कम उपस्थिति पर गोगोई का जवाब
उन्होंने कहा:
मैं राज्यसभा तब जाता हूं जब मुझे लगता है कि वहां कोई महत्वपूर्ण मुद्दा है जिस पर मुझे बोलना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रंजन गोगोई का राज्यसभा कार्यकाल कई कारणों से चर्चा में रहा। एक ओर उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ। वहीं, दूसरी ओर उनकी सीमित सक्रियता ने भी कई सवाल खड़े किए। हालांकि समर्थकों का कहना है कि गोगोई जैसे विधिवेत्ता का संसद में होना अपने आप में महत्वपूर्ण है, भले ही वे नियमित रूप से बहस में भाग न लें।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari