RBI का बड़ा फैसला: बिना मर्जी ग्राहकों को बेची सर्विस तो लगेगा भारी जुर्माना
Amresh Kushwaha | Jun 22, 2026, 15:01 IST
बैंक अब नहीं बेच सकेंगे जबरन फाइनेंशियल सर्विस
RBI ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इसके तहत बैंक या NBFC अब बिना सहमति के कोई भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट नहीं बेच सकेंगे। मिस-सेलिंग साबित होने पर पूरा रिफंड देना होगा।
समझें क्या है पूरा मामला...
- RBI ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए नियम जारी किए हैं।
- ये नियम 01 जनवरी 2027 से देशभर में लागू होंगे।
- बिना ग्राहक की सहमति के कोई भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट नहीं बेचा जा सकेगा।
- मिस-सेलिंग साबित होने पर बैंक को पूरा पैसा वापस करना होगा।
- सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और डिजिटल एजेंट भी इन नियमों के दायरे में आएंगे।
अब नहीं चलेगी बैंकों की मनमानी
मिस-सेलिंग का मतलब क्या है
बिना स्पष्ट सहमति के प्रोडक्ट बेचना, अधूरी या भ्रामक जानकारी देना और किसी दूसरे प्रोडक्ट को जबरन साथ जोड़कर बेचना भी इसी श्रेणी में आता है। यानी बीमा पॉलिसी, इन्वेस्टमेंट स्कीम, क्रेडिट कार्ड या किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट को गलत तरीके से बेचना मिस-सेलिंग है।
मिस-सेलिंग साबित हुई तो पूरा पैसा वापस
हर प्रोडक्ट के लिए अलग से सहमति लेनी होगी
पहले से चुने गए विकल्प या यह मान लेना कि ग्राहक ने हां कर दी, अब मान्य नहीं होगा। हर अलग प्रोडक्ट के लिए अलग सहमति लेनी होगी। यानी एक बार हां कहने से बैंक कई प्रोडक्ट नहीं थोप सकेगा।
जबरन बंडलिंग पर सीधी रोक
इन्फ्लुएंसर और डिजिटल एजेंट भी जिम्मेदार
ग्राहक के लिए क्या बदलेगा
FAQ
- मिस-सेलिंग क्या होती है?
मिस-सेलिंग तब होती है जब कोई बैंक, NBFC या एजेंट किसी ग्राहक को ऐसा फाइनेंशियल प्रोडक्ट बेच देता है जो उसकी जरूरत, आय या जोखिम क्षमता के हिसाब से सही नहीं है।
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