RBI का नया प्रस्ताव: अब 10 महीने नहीं, 3 महीने में मिलेगा सस्ते लोन का फायदा!
Aman Vaishnav | Aug 14, 2026, 15:40 IST
RBI का नया प्रस्ताव
RBI जब ब्याज दरें घटाता है, तो बैंकों द्वारा ग्राहकों का लोन सस्ता करने में कई महीने लग जाते हैं। केंद्रीय बैंक ने अब इस देरी को खत्म करने के लिए 3 महीने की समय सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जब रेपो रेट घटाता है, तो ग्राहकों को उम्मीद रहती है कि उनकी लोन की किस्त भी जल्दी घटेगी लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता।
होम लोन जैसे कई कर्ज में ब्याज दर घटने का फायदा महीनों बाद मिलता है। अब रिजर्व बैंक ने इस देरी को खत्म करने की योजना बनाई है।
बता दें कि रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है, तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता हो जाता है। उम्मीद होती है कि बैंक भी ग्राहकों को सस्ता लोन दें लेकिन अभी यह प्रक्रिया धीमी रहती है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने एक नया ड्राफ्ट जारी किया है। इसका नाम RBI (लोन और एडवांस पर ब्याज दरें) डायरेक्शन 2026 है। इसके मुताबिक बैंकों को ब्याज दर बदलाव का फायदा अधिकतम तीन महीने में ग्राहकों तक पहुंचाना होगा। अभी इसके लिए कोई तय समय सीमा नहीं थी।
जो लोन एमसीएलआर (MCLR – Marginal Cost of Funds based Lending Rate) से जुड़े हैं, उनमें फायदा मिलने में 6 से 12 महीने लगते हैं।
सिर्फ रेपो रेट से जुड़े लोन में फायदा तुरंत मिलता है। यही वजह है कि कई ग्राहक ऊंची ब्याज दर चुकाते रहते हैं, जबकि RBI दरें घटा चुका होता है।
इस देरी का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ता है। महीनों तक पुरानी दर पर ब्याज चुकाना पड़ता है। नया नियम इसी अंतर को कम करने की कोशिश है।
RBI ने इस ड्राफ्ट पर सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं। सुझाव भेजने की आखिरी तारीख 11 सितंबर है। सुझावों पर विचार के बाद नए नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रस्ताव है कि नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू हों।
बता दें कि पिछले कई सालों में लोन की ब्याज दर तय करने का तरीका कई बार बदला है। हर बदलाव के साथ एक नया बेंचमार्क आया।
साल 2003 से जून 2010 तक लोन बीपीएलआर से जुड़े थे। 1 जुलाई 2010 से 1 अप्रैल 2016 तक ज्यादातर लोन बेस रेट पर मिले।
इसके बाद 1 अप्रैल 2016 से 1 अक्टूबर 2019 तक एमसीएलआर का दौर रहा। 2019 से अब तक नए लोन ईबीएलआर (EBLR – External Benchmark Linked Rate) और आरएलएलआर (RLLR – Repo Linked Lending Rate) पर मिल रहे हैं।
एनबीएफसी (NBFC – Non-Banking Financial Company) और सरकारी बैंकों को अभी इस नियम से छूट मिली हुई है।
नए नियम लागू होने के बाद पुराने बेंचमार्क से जुड़े लोन धीरे-धीरे नए सिस्टम में लाए जाएंगे। इसके लिए दो साल का समय दिया गया है।
यानी 1 अप्रैल 2027 से 1 अप्रैल 2029 तक यह बदलाव पूरा करना होगा। ग्राहकों से इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बता दें कि अगर यह नियम लागू होता है तो ब्याज दर घटने का फायदा जल्दी मिलेगा। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों को राहत मिल सकती है।
खासकर उन ग्राहकों को फायदा होगा जिनका लोन अभी भी पुराने बेंचमार्क से जुड़ा है। EMI का बोझ कम समय में हल्का हो सकता है।
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होम लोन जैसे कई कर्ज में ब्याज दर घटने का फायदा महीनों बाद मिलता है। अब रिजर्व बैंक ने इस देरी को खत्म करने की योजना बनाई है।
बता दें कि रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है, तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता हो जाता है। उम्मीद होती है कि बैंक भी ग्राहकों को सस्ता लोन दें लेकिन अभी यह प्रक्रिया धीमी रहती है।
क्या है RBI का प्रस्ताव
अभी क्यों होती है देरी
सिर्फ रेपो रेट से जुड़े लोन में फायदा तुरंत मिलता है। यही वजह है कि कई ग्राहक ऊंची ब्याज दर चुकाते रहते हैं, जबकि RBI दरें घटा चुका होता है।
इस देरी का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ता है। महीनों तक पुरानी दर पर ब्याज चुकाना पड़ता है। नया नियम इसी अंतर को कम करने की कोशिश है।
कब तक मांगे गए सुझाव
लोन बेंचमार्क का इतिहास
साल 2003 से जून 2010 तक लोन बीपीएलआर से जुड़े थे। 1 जुलाई 2010 से 1 अप्रैल 2016 तक ज्यादातर लोन बेस रेट पर मिले।
इसके बाद 1 अप्रैल 2016 से 1 अक्टूबर 2019 तक एमसीएलआर का दौर रहा। 2019 से अब तक नए लोन ईबीएलआर (EBLR – External Benchmark Linked Rate) और आरएलएलआर (RLLR – Repo Linked Lending Rate) पर मिल रहे हैं।
एनबीएफसी को छूट
पुराने लोन का क्या होगा
यानी 1 अप्रैल 2027 से 1 अप्रैल 2029 तक यह बदलाव पूरा करना होगा। ग्राहकों से इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
ग्राहकों को क्या फायदा होगा
खासकर उन ग्राहकों को फायदा होगा जिनका लोन अभी भी पुराने बेंचमार्क से जुड़ा है। EMI का बोझ कम समय में हल्का हो सकता है।
FAQ
- RBI के नए प्रस्ताव में क्या बदलाव है?
बैंकों को ब्याज दर घटने का फायदा अब अधिकतम 3 महीने में ग्राहकों तक पहुंचाना होगा। अभी कई लोन में यह प्रक्रिया 6 से 12 महीने तक लेती है। नया नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू हो सकता है। - RBI का नया नियम कब से लागू होगा?
RBI ने प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की बात कही है। इससे पहले सभी पक्षों से 11 सितंबर तक सुझाव मांगे गए हैं। सुझावों पर विचार के बाद अंतिम नियम तय होगा।
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