2021 की हार से 2026 की जीत तक: RSS ने BJP के लिए कैसे बदला बंगाल का सियासी समीकरण

Pawan Modiya | May 04, 2026, 17:56 IST
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बंगाल में RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की सांस्कृतिक पकड़ दशकों पुरानी है। लेकिन BJP को यहां चुनावी सफलता मिलना हमेशा मुश्किल रहा है। 2026 विधानसभा चुनाव में RSS ने जमीनी मोर्चा संभाला और नतीजे उम्मीद से बेहतर दिखे। आइए जानें ये सब हुआ कैसे...

    समझें क्या है पूरा मामला

    • बंगाल में RSS की शाखाएं दशकों से चल रही हैं, पर BJP चुनाव जीतने में पिछड़ती रही है।
    • 2021 में BJP को सिर्फ 77 सीटें मिलीं, जबकि दावा 200 से ज्यादा का था।
    • 2026 चुनाव में RSS ने खुद मैदान में उतरकर घर-घर प्रचार किया।
    • RSS ने शाखाओं की संख्या 6,000 से बढ़ाकर 12,000 करने का लक्ष्य रखा।
    • आज मतगणना में BJP ने बहुमत हासिल कर लिया।

    बंगाल में RSS: सांस्कृतिक मजबूती

    पश्चिम बंगाल में RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की उपस्थिति कोई नई बात नहीं है। 2015 में ही राज्य में 1,492 शाखाएं सक्रिय थीं। संगठन ने यहां स्कूल, सेवा केंद्र और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए जड़ें जमाई हैं। RSS का मानना है कि उसका काम राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक है।

    लेकिन राजनीति की दुनिया में यह रेखा कभी इतनी साफ नहीं रही। BJP के नेता जे.पी. नड्डा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि RSS एक सांस्कृतिक संगठन है और BJP राजनीतिक। फिर भी चुनाव आते ही दोनों का तालमेल जगजाहिर हो जाता है।

    2021 में क्या हुआ था?

    2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने बड़े-बड़े दावे किए थे। तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह ने 200 से ज्यादा सीटें जीतने का वादा किया था। लेकिन पार्टी को सिर्फ 77 सीटें मिलीं। TMC (Trinamool Congress) ने 215 सीटें जीतकर ममता बनर्जी को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाया।

    इस हार के बाद RSS ने BJP से थोड़ी दूरी बना ली। संघ नेतृत्व मोदी और शाह की रणनीति से नाखुश था। बंगाली संस्कृति को नजरअंदाज करने और बाहरी नेताओं के हावी होने से मतदाता नाराज हुए थे।

    RSS ने बदली रणनीति

    2021 की हार से सबक लेते हुए RSS ने अपना तरीका बदला। संगठन ने करीब 1.75 लाख मतदाता जागरूकता बैठकें कीं। राज्य के 294 में से करीब 250 विधानसभा क्षेत्रों में ये बैठकें हुईं। निष्क्रिय स्वयंसेवकों को फिर से सक्रिय किया गया। वे घर-घर जाकर 'भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों' का संदेश देते रहे।

    RSS ने इस काम को अपने शताब्दी वर्ष (2025-2026) से जोड़ा। ग्रिहसम्पर्क (Grihasampark) यानी घर-घर संपर्क अभियान इसी का हिस्सा था। यह काम शोर-शराबे के बिना, चुपचाप चला। बंगाली मिजाज को समझते हुए RSS ने आक्रामक प्रचार की जगह सौम्य और सांस्कृतिक रास्ता चुना।

    शाखा नेटवर्क का विस्तार

    एक रिपोर्ट के अनुसार RSS ने बंगाल में शाखाओं की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा। मौजूदा 6,000 शाखाओं को 12,000 तक पहुंचाने की योजना थी। यह संख्या ही बताती है कि संघ ने इस चुनाव को कितनी गंभीरता से लिया।

    शाखाएं सिर्फ शारीरिक व्यायाम की जगह नहीं हैं। ये एक सामाजिक नेटवर्क हैं। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबको जोड़ा जाता है। बंगाल जैसे राज्य में जहां TMC का संगठन मजबूत है, RSS का यह काम BJP के लिए जमीन तैयार करता है।

    BJP और RSS: कहां है तनाव?

    RSS और BJP का रिश्ता हमेशा एकतरफा नहीं रहा। विशेषज्ञ धीरेंद्र के. झा, जो 'Shadow Armies' किताब के लेखक हैं, का कहना है कि RSS पारंपरिक रूप से BJP के साथ एक 'जानबूझकर की अस्पष्टता' बनाए रखता है। इससे उसे एक अराजनीतिक संगठन की छवि मिलती है।

    लेकिन जब BJP दस साल सत्ता में रही, तो यह अस्पष्टता कम होती गई। RSS का राजनीतिक पहलू सामने आने लगा। इससे संगठन विपक्ष के निशाने पर आ गया। बंगाल में यह समस्या और बड़ी है, क्योंकि TMC ने BJP को 'बाहरी' बताकर बंगाली अस्मिता का मुद्दा उठाया।

    2026 चुनाव: RSS का दांव

    BJP workers
    BJP workers


    2026 के चुनाव RSS के लिए एक बड़ी परीक्षा थे। संगठन ने BJP की तरफ से निर्णय लेने में ज्यादा हिस्सेदारी मांगी। NewsClick की रिपोर्ट के अनुसार RSS चाहता था कि BJP उसे ज्यादा अहमियत दे। इसके बदले RSS ने अपने स्वयंसेवक पूरी ताकत से झोंक दिए।

    2026 का चुनाव कई मुद्दों पर लड़ा गया। मतदाता सूची से करीब 90 लाख नाम हटाने का विवाद सबसे बड़ा मुद्दा रहा। इनमें से करीब 65 फीसदी नाम मुस्लिम मतदाताओं के थे। CAA (Citizenship Amendment Act) और सीमा सुरक्षा भी बड़े मुद्दे रहे। भ्रष्टाचार, नौकरी और महिला सुरक्षा पर भी जमकर बहस हुई।

    आज के नतीजे क्या कह रहे हैं?

    BJP workers 1
    BJP workers 1


    4 मई 2026 को मतगणना हो रही है। शाम 5 बजे तक की स्थिति में BJP 187 सीटों पर आगे चल रही थी। TMC 78 सीटों पर थी। अगर यह रुझान बरकरार रहा, तो यह BJP के लिए ऐतिहासिक जीत होगी। 2021 में जो पार्टी 77 सीटों पर सिमट गई थी, वह 2026 में सरकार बनाने की स्थिति में आ चुकी है।

    RSS के लिए यह उसकी सालों की मेहनत का नतीजा होगा। सांस्कृतिक काम से शुरू होकर घर-घर संपर्क तक, संगठन ने यह सिद्ध करने की कोशिश की कि बंगाल में भी हिंदुत्व की जमीन तैयार हो सकती है।

    बंगाली पहचान सबसे बड़ी चुनौती

    बंगाल का मतदाता अपनी अलग पहचान को लेकर बेहद संवेदनशील है। TMC ने हर चुनाव में इसी भावना को भुनाया। ममता बनर्जी ने BJP को 'बाहरी' साबित करने की पूरी कोशिश की। RSS इस चुनौती को समझता है। इसीलिए उसने बंगाली संस्कृति के साथ तालमेल बिठाते हुए काम किया। आक्रामकता की जगह सेवा और संस्कृति को आगे रखा।

    शिक्षाविद् और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 'राजनीतिक हिंदुत्व' और 'सांस्कृतिक हिंदुत्व' में फर्क करना जरूरी है। BJP चुनाव जीतने के लिए काम करती है। RSS समाज बदलने के लिए। बंगाल में RSS की जड़ें गहरी हो सकती हैं, लेकिन BJP की राजनीतिक सफलता हमेशा उतनी आसान नहीं रही। 2026 के नतीजे इस समीकरण को बदल सकते हैं।

    यह खबर क्यों जरूरी है?

    यह खबर भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है और यहां के चुनावी नतीजे राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करते हैं। RSS एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में काम करता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में उसकी भूमिका पर बहस होती रही है। यह खबर बताती है कि जनतांत्रिक प्रक्रिया में सांस्कृतिक संगठनों की भूमिका क्या होती है और राजनीतिक दल व सामाजिक संस्थाएं कैसे मिलकर काम करती हैं। यह डिजिटल और सामाजिक दृष्टि से भी प्रासंगिक है क्योंकि नागरिकों को पता होना चाहिए कि उनके वोट को प्रभावित करने वाले संगठन कैसे काम करते हैं। यह जानकारी भारतीय संविधान की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार की भावना के अनुरूप है।

    3 जरूरी FAQ

    प्रश्न 1: बंगाल में RSS इतना सक्रिय क्यों है?

    उत्तर: RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh) बंगाल में दशकों से सांस्कृतिक और सामाजिक काम कर रहा है। संगठन की शाखाएं राज्य में 1,400 से ज्यादा थीं। 2021 चुनाव में BJP की हार के बाद RSS ने अपनी गतिविधियां और बढ़ा दीं। घर-घर संपर्क, मतदाता जागरूकता बैठकें और शाखाओं का विस्तार इसी रणनीति का हिस्सा है। संगठन खुद को राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मानता है, लेकिन चुनावी मौसम में यह रेखा धुंधली पड़ जाती है।

    प्रश्न 2: 2026 बंगाल चुनाव में BJP की क्या स्थिति है?

    उत्तर: 2021 में BJP को सिर्फ 77 सीटें मिली थीं, जबकि उसका दावा 200 से ज्यादा का था। 2026 में पार्टी ने RSS के साथ तालमेल बनाकर बेहतर तैयारी की। 4 मई 2026 को मतगणना के दौरान दोपहर तक BJP 176 सीटों पर आगे चल रही थी और TMC 94 पर। अगर यह रुझान कायम रहा, तो BJP पहली बार बंगाल में सरकार बना सकती है।

    प्रश्न 3: RSS और BJP का आपस में क्या रिश्ता है?

    उत्तर: RSS BJP की वैचारिक जननी है। BJP की जड़ें RSS की ही एक शाखा भारतीय जनसंघ (Bharatiya Jana Sangh) में हैं, जो 1980 में BJP बनी। RSS खुद को अराजनीतिक बताता है, लेकिन चुनाव में वह BJP के लिए बूथ स्तर तक काम करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों के बीच जानबूझकर एक 'अस्पष्टता' बनाए रखी जाती है, जो RSS को सांस्कृतिक संगठन की छवि देती है।

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