सबरीमाला मंदिर विवाद : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, क्या छूने से भगवान अपवित्र हो जाते हैं?

Sanjay Dhiman | Apr 21, 2026, 20:54 IST
Share
sabrimala-temple-case-supreme-court-hearing
Photograph: (the sootr)

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर सुनवाई हो रही है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि देवी-देवता को छूने से उन्हें अपवित्र क्यों माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई में अहम सवाल उठाए गए हैं। कोर्ट ने पूछा, ‘क्या एक भक्त को, जो केवल अपने वंश और जन्म के कारण, देवता को छूने से रोका जाता है, क्या संविधान उसकी मदद के लिए आगे नहीं आएगा?’ यह सवाल सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े धार्मिक विवाद को लेकर था।

महिलाओं की एंट्री पर विवाद

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर विवाद काफी समय से चल रहा है। 1991 में केरल हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाई थी, जिसमें 10 से 50 साल तक की महिलाओं की एंट्री को मना किया गया था। फिर, सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इस बैन को हटा दिया था। इसके बाद से कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं, जो अब तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विचाराधीन हैं।

1991 से 2026: आखिर क्या है इस विवाद की पूरी टाइमलाइन?

सबरीमाला की ये कहानी बहुत पुरानी है और इसमें कई मोड़ आए हैं। चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं:

  • साल 1991: केरल हाईकोर्ट ने 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी।
  • साल 2018: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में इस पुराने बैन को पूरी तरह हटा दिया था।
  • पुनर्विचार याचिकाएं: 2018 के फैसले के खिलाफ दर्जनों याचिकाएं दायर की गईं, जिन पर अब सुनवाई हो रही है।
  • वर्तमान स्थिति: अब 9 जजों की बेंच इस पर अंतिम फैसला सुनाने की तैयारी में बैठी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट का सवाल: छूने से देवता अपवित्र होते हैं?

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इस मामले में यह सवाल उठाया कि आखिर देवता को छूने से अपवित्र क्यों माना जाता है। एक मंदिर के रिवाज उस धर्म का हिस्सा होते हैं, लेकिन क्या उन्हें इस आधार पर बदला जा सकता है कि कोई व्यक्ति अपनी पंथ या जाति के कारण किसी विशेष जगह को छूने से रोक दिया जाए?

सबरीमाला के वकील का जवाब

इस पर सबरीमाला के वकील, एडवोकेट वी. गिरी ने कहा, “हर मंदिर की अपनी विशेष पूजा विधि होती है और यह उस मंदिर के देवता के स्वरूप के अनुरूप होती है।” उन्होंने आगे बताया कि भगवान अयप्पा ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ हैं, इसलिए उनके मंदिर में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग धार्मिक नियम निर्धारित किए गए हैं। उनका कहना था कि पूजा की विधि इस बात का पालन करती है कि देवता के रूप में क्या निर्धारित किया गया है।

न्यायिक बेंच की सुनवाई और जल्द फैसला

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संवैधानिक बेंच सुनवाई कर रही है। इस सुनवाई में 66 अन्य धार्मिक मामलों को भी जोड़ा गया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले का फैसला जल्द ही आने की संभावना है।

महिला प्रवेश का विरोध

मंदिर प्रशासन ने महिला प्रवेश के विरोध में अपनी दलीलें दीं। सरकार ने यह कहा था कि देश के कई अन्य देवी मंदिरों में भी पुरुषों की एंट्री बैन है, और इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें

सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारतीय समाज और धार्मिक परंपराओं के दृष्टिकोण से बेहद अहम है। यह मामला सिर्फ सबरीमाला मंदिर के भीतर महिलाओं के प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता और समानता पर व्यापक प्रभाव डालने वाला होगा।

यह खबरें भी पढ़ें...

सबरीमाला मंदिर विवाद: महिलाओं की एंट्री पर SC में बहस, आस्था vs अधिकार का बड़ा सवाल

यहां पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं देवी की पूजा, होता है 16 शृंगार, सबरीमाला विवाद के बीच चर्चा में केरलम का मंदिर

सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धर्म तब मजबूत होगा जब मंदिरों में सब आएंगे

सबरीमाला मंदिर का वो सच जो महिलाओं पर पड़ गया फीका, जानें इस मंदिर का इतिहास



Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • सरकार
  • विवाद
  • केरल हाईकोर्ट
  • सबरीमाला मंदिर
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज