अब इशारों में मिलेगी ट्रेन की हर जानकारी, मूक-बधिर यात्रियों के लिए रेलवे का बड़ा कदम
Anjali Dwivedi | Jul 09, 2026, 13:00 IST
मूक-बधिर यात्रियों के लिए रेलवे का बड़ा कदम
स्टेशन के शोर में गुम सुम मुसाफिरों को अपनी भाषा मिली है। बादशाहनगर में AI आधारित देश का पहला सांकेतिक स्क्रीन लगा, जहां अब इशारों में ट्रेन की हर अपडेट मूक-बधिरों को गर्व से मुस्कुराएगी।
कल्पना कीजिए एक रेलवे स्टेशन की। चारों तरफ ट्रेनों की गड़गड़ाहट, कुलियों की आवाज, चाय-पानी के ठेले और लाउडस्पीकर पर गूंजती अनाउंसमेंट- कृपया ध्यान दें, गाड़ी संख्या...
एक आम मुसाफिर के लिए यह शोर सिर्फ सफर का हिस्सा है। लेकिन जरा ठहरिए... और सोचिए उस मूक-बधिर यात्री के बारे में, जिसके लिए यह कान फोड़ता शोर भी एक गहरी खामोशी जैसा है।
लाउडस्पीकर पर होने वाले हर बदलाव, प्लेटफॉर्म बदलने की घोषणा या ट्रेन के लेट होने की जानकारी से वह तब तक अनजान रहता है, जब तक कि वह किसी अजनबी के आगे हाथ फैलाकर लिख कर न पूछे। बता दें पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने इस खामोशी को अपनी आवाज दे दी है।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने नई पहल शुरू की है। बादशाहनगर स्टेशन पर सांकेतिक भाषा ट्रेन सूचना प्रणाली लागू हुई है। यह भारतीय रेलवे में पहली बार हो रहा है। मूक बधिर यात्रियों को अब स्क्रीन पर जानकारी मिलेगी। गोरखपुर में भी यह सिस्टम जल्द लगाया जाएगा।
![मूक-बधिर यात्रियों के लिए रेलवे का बड़ा कदम]()
रेलवे स्टेशनों पर रोज कई घोषणाएं होती हैं। ट्रेन के आने-जाने की जानकारी लाउडस्पीकर से दी जाती है। लेकिन मूक बधिर यात्री ये घोषणाएं सुन नहीं पाते। उन्हें अक्सर दूसरे यात्रियों से मदद लेनी पड़ती थी।
अब उनकी यह मुश्किल दूर हो गई है। बादशाहनगर स्टेशन पर लगी नई प्रणाली ने यह समस्या हल कर दी है। एलईडी (Light Emitting Diode) स्क्रीन पर अब सांकेतिक भाषा में सूचना दिखेगी। ट्रेन का आगमन, प्रस्थान और प्लेटफार्म बदलाव सब स्क्रीन पर दिखेगा।
यह प्रणाली एआई पर आधारित है। यह रेलवे की मौजूदा घोषणा व्यवस्था से जुड़ी हुई है। जैसे ही स्टेशन पर कोई घोषणा होती है, सिस्टम उसे तुरंत पहचानता है। फिर वह घोषणा को असली समय में सांकेतिक भाषा में बदल देता है।
इस पूरी प्रक्रिया में कोई देरी नहीं होती। यात्री को घोषणा के साथ ही स्क्रीन पर सांकेतिक भाषा दिख जाती है। इससे मूक बधिर यात्री अब दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे। वे खुद अपनी यात्रा की जानकारी समझ सकेंगे।
इस प्रणाली को लखनऊ मंडल के सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने बनाया है। मंडल रेल प्रबंधक गौरव अग्रवाल के मार्गदर्शन में यह काम हुआ। वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर वैभव श्रीवास्तव ने इसे दिशा दी। पूरी टीम ने महीनों मेहनत करके इसे तैयार किया।
जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्ता के मुताबिक इस तकनीक का लंबा परीक्षण हुआ। दो महीने तक इसकी जांच की गई। इस दौरान नोएडा की एक मूक बधिर संस्था के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। चार प्रमाणित सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स ने भी सिस्टम को परखा।
ट्रायल के हर चरण में बारीकी से जांच हुई। सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के अधिकारी भी लगातार निगरानी करते रहे। परीक्षण सफल रहने के बाद ही इसे स्टेशन पर लागू किया गया।
गोरखपुर स्टेशन पर भी यह सिस्टम जल्द लगाया जाएगा। रेलवे इसे धीरे-धीरे अन्य बड़े स्टेशनों तक भी ले जा सकता है। यह पहल दिव्यांग यात्रियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
रेलवे का कहना है कि हर यात्री को बराबर सुविधा मिलनी चाहिए। यह प्रणाली उसी सोच का हिस्सा है। तकनीक के जरिए यात्रा को सबके लिए आसान बनाने की कोशिश जारी है।
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एक आम मुसाफिर के लिए यह शोर सिर्फ सफर का हिस्सा है। लेकिन जरा ठहरिए... और सोचिए उस मूक-बधिर यात्री के बारे में, जिसके लिए यह कान फोड़ता शोर भी एक गहरी खामोशी जैसा है।
लाउडस्पीकर पर होने वाले हर बदलाव, प्लेटफॉर्म बदलने की घोषणा या ट्रेन के लेट होने की जानकारी से वह तब तक अनजान रहता है, जब तक कि वह किसी अजनबी के आगे हाथ फैलाकर लिख कर न पूछे। बता दें पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने इस खामोशी को अपनी आवाज दे दी है।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने नई पहल शुरू की है। बादशाहनगर स्टेशन पर सांकेतिक भाषा ट्रेन सूचना प्रणाली लागू हुई है। यह भारतीय रेलवे में पहली बार हो रहा है। मूक बधिर यात्रियों को अब स्क्रीन पर जानकारी मिलेगी। गोरखपुर में भी यह सिस्टम जल्द लगाया जाएगा।
मूक-बधिर यात्रियों के लिए रेलवे का बड़ा कदम
मूक बधिर यात्रियों के लिए राहत
अब उनकी यह मुश्किल दूर हो गई है। बादशाहनगर स्टेशन पर लगी नई प्रणाली ने यह समस्या हल कर दी है। एलईडी (Light Emitting Diode) स्क्रीन पर अब सांकेतिक भाषा में सूचना दिखेगी। ट्रेन का आगमन, प्रस्थान और प्लेटफार्म बदलाव सब स्क्रीन पर दिखेगा।
कैसे काम करती है यह तकनीक
इस पूरी प्रक्रिया में कोई देरी नहीं होती। यात्री को घोषणा के साथ ही स्क्रीन पर सांकेतिक भाषा दिख जाती है। इससे मूक बधिर यात्री अब दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे। वे खुद अपनी यात्रा की जानकारी समझ सकेंगे।
किसने किया तैयार
दो महीने चला ट्रायल
ट्रायल के हर चरण में बारीकी से जांच हुई। सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के अधिकारी भी लगातार निगरानी करते रहे। परीक्षण सफल रहने के बाद ही इसे स्टेशन पर लागू किया गया।
आगे की योजना
रेलवे का कहना है कि हर यात्री को बराबर सुविधा मिलनी चाहिए। यह प्रणाली उसी सोच का हिस्सा है। तकनीक के जरिए यात्रा को सबके लिए आसान बनाने की कोशिश जारी है।
FAQ
- सांकेतिक भाषा ट्रेन सूचना प्रणाली क्या है?
यह एक एआई आधारित तकनीक है। यह ट्रेन घोषणाओं को सांकेतिक भाषा में बदलती है। यह स्क्रीन पर मूक बधिर यात्रियों को दिखाई जाती है। - यह प्रणाली सबसे पहले कहां शुरू हुई?
सांकेतिक भाषा ट्रेन प्रणाली सबसे पहले बादशाहनगर स्टेशन पर शुरू हुई है। यह पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में स्थित है। यह भारतीय रेलवे में पहली बार लागू हुई है। - क्या यह सुविधा अन्य स्टेशनों पर भी मिलेगी?
हां, गोरखपुर स्टेशन पर भी यह सिस्टम लगाने की तैयारी है। रेलवे इसे आगे और स्टेशनों तक बढ़ा सकता है। फिलहाल यह केवल बादशाहनगर में उपलब्ध है।
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