रायबरेली वालों के लिए सोनिया ने लिखी चिट्ठी, जानिए क्या लिखा ?
Pratibha Rana | Feb 16, 2024, 11:17 IST
सोनिया गांधी
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने रायबरेली को अपना ससुराल बताते हुए लिखा, "मेरा परिवार दिल्ली में अधूरा है। यह परिवार रायबरेली आकर आप लोगों के साथ मिलकर पूरा होता है. यह नाता बहुत पुराना है और अपनी ससुराल से मुझे सौभाग्य की तरह मिला है।
BHOPAL. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी(Sonia Gandhi not contest Lok Sabha elections)। उनका रायबरेली से चुनावी रिश्ता खत्म हो गया है। राज्यसभा से नामांकन करने बाद उन्होंने वहां की जनता के लिए एक पत्र लिखा(Sonia Gandhi emotional letter) है। हालांकि उन्होंने ये संकेत भी दिया है आगे भी यहां से उनके परिवार का कोई सदस्य चुनावी मैदान में उतर सकता है।
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सोनिया गांधी ने पत्र में लिखा मेरा परिवार दिल्ली में अधूरा है। यह परिवार रायबरेली आकर आप लोगों के साथ मिलकर पूरा होता है। यह नाता बहुत पुराना है और अपनी ससुराल से मुझे सौभाग्य की तरह मिला है। रायबरेली के साथ हमारे परिवार के रिश्तों की जड़ें बहुत गहरी हैं। आजादी के बाद हुए पहले लोकसभा चुनाव में आपने मेरे ससुर फीरोज गांधी को यहां से जिताकर दिल्ली भेजा। उनके बाद मेरी सास इंदिरा गांधी को भी आपने अपना बना लिया. तब से अब तक, यह सिलसिला जिंदगी के उतार-चढ़ाव और मुश्किल भरी राह पर प्यार और जोश के साथ आगे बढ़ता गया और इस पर हमारी आस्था मजबूत होती चली गई। इसी रौशन रास्ते पर आपने मुझे भी चलने की जगह दी।
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सास और जीवनसाथी को हमेशा के लिए खोकर मैं आपके पास आई और आपने अपना आंचल मेरे लिए फैला दिया। पिछले दो चुनावों में भी आप एक चट्टान की तरह मेरे साथ खड़े रहे, मैं यह कभी भूल नहीं सकती. यह कहते हुए मुझे गर्व है कि आज मैं जो कुछ भी हूं, आपकी बदौलत हूं और मैंने इस भरोसे को निभाने की हरदम कोशिश की है।
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मैं स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते अगला लोकसभा चुनाव नहीं लडूंगी। इस निर्णय के बाद मुझे आपकी सीधी सेवा का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन यह तय है कि मेरा मन-प्राण हमेशा आपके पास रहेगा। मुझे मालूम है कि आप लोग हर मुश्किल में मुझे और मेरे परिवार को उसी तरह ही संभाल लेंगे, जैसे अब तक संभालते आए हैं. बड़ों को प्रणाम, छोटों को स्नेह, जल्द मिलने का वादा।
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सोनिया गांधी ने इमोशनल लैटर में खोला राज
सोनिया गांधी ने पत्र में लिखा मेरा परिवार दिल्ली में अधूरा है। यह परिवार रायबरेली आकर आप लोगों के साथ मिलकर पूरा होता है। यह नाता बहुत पुराना है और अपनी ससुराल से मुझे सौभाग्य की तरह मिला है। रायबरेली के साथ हमारे परिवार के रिश्तों की जड़ें बहुत गहरी हैं। आजादी के बाद हुए पहले लोकसभा चुनाव में आपने मेरे ससुर फीरोज गांधी को यहां से जिताकर दिल्ली भेजा। उनके बाद मेरी सास इंदिरा गांधी को भी आपने अपना बना लिया. तब से अब तक, यह सिलसिला जिंदगी के उतार-चढ़ाव और मुश्किल भरी राह पर प्यार और जोश के साथ आगे बढ़ता गया और इस पर हमारी आस्था मजबूत होती चली गई। इसी रौशन रास्ते पर आपने मुझे भी चलने की जगह दी।
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सास और जीवनसाथी खोकर आपके पास आई...
सास और जीवनसाथी को हमेशा के लिए खोकर मैं आपके पास आई और आपने अपना आंचल मेरे लिए फैला दिया। पिछले दो चुनावों में भी आप एक चट्टान की तरह मेरे साथ खड़े रहे, मैं यह कभी भूल नहीं सकती. यह कहते हुए मुझे गर्व है कि आज मैं जो कुछ भी हूं, आपकी बदौलत हूं और मैंने इस भरोसे को निभाने की हरदम कोशिश की है।
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स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर ये कहा
मैं स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते अगला लोकसभा चुनाव नहीं लडूंगी। इस निर्णय के बाद मुझे आपकी सीधी सेवा का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन यह तय है कि मेरा मन-प्राण हमेशा आपके पास रहेगा। मुझे मालूम है कि आप लोग हर मुश्किल में मुझे और मेरे परिवार को उसी तरह ही संभाल लेंगे, जैसे अब तक संभालते आए हैं. बड़ों को प्रणाम, छोटों को स्नेह, जल्द मिलने का वादा।
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