UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, 19 मार्च को होगी अगली सुनवाई
Amresh Kushwaha | Jan 29, 2026, 13:24 IST
supreme court imposes stay ugc new rules
UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह मामला देशभर में विरोध का कारण बन गया है। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि इन नियमों की भाषा में साफ-सफाई नहीं है। इसलिए इनकी जांच जरूरी है, ताकि नियमों की भाषा ठीक की जा सके और उनका दुरुपयोग न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इन नियमों को फिर से बनाने को कहा है और तब तक इन पर रोक लगी रहेगी। इसके अलावा, कोर्ट ने केंद्र से जवाब भी तलब किया है। इसे लेकर एक कमेटी भी गठित करने को कहा गया है।साथ ही, कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल 2012 में नोटिफाई किए गए UGC रेगुलेशन ही लागू रहेंगे। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई में हो रही है। इस दौरान कोर्ट ने कई तीखे सवाल भी पूछे हैं। सीजेआई ने सवाल किया कि आजादी के 75 साल बाद भी हम जातियों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। क्या यह नया कानून हमें पीछे ले जाएगा?
वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने अमेरिका की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उम्मीद है हम उस स्थिति तक नहीं पहुंचेंगे, जहां कभी अश्वेत और श्वेत बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में पढ़ाया जाता था।
सीजेआई सूर्यकांत ने एसजी तुषार मेहता से कहा कि एक कमेटी बनाने पर विचार किया जाए। कमेटी में कुछ प्रतिष्ठित लोग हो सकते हैं। यह कमेटी इस मुद्दे की समीक्षा करेगी। ताकि समाज बिना किसी विभाजन के आगे बढ़ सकेगा। साथ ही, सभी मिलकर विकास कर सकेंगे।
![UGC Promotion of Equity Regulations 2026]()
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। इस नियम का मकसद कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकना और सभी वर्गों के लिए समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना बताया गया है। (UGC Regulations 2026 का राजपत्र देखिए)
जीसी ने नए नियमों का पालन नहीं करने वाले कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को कड़ी चेतावनी दी है। अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें UGC की योजनाओं से बाहर करना, कोर्स बंद करना, ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन पर रोक लगाना, और संस्थान की मान्यता रद्द करना शामिल है।
इन नियमों में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) की जातियों से आने वाले छात्रों को भी शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी से आने छात्रों के साथ भेदभाव बताया जा रहा है। विरोध करने वालों का मानना है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है। सिर्फ जनरल कैटेगरी भर के होने से ही वो दोषी हो जाएंगे।
जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4) का गठन किया है, ताकि रेगुलेशन के खिलाफ संगठित विरोध किया जा सके। दुविधा यह है कि अब तक सरकार की ओर से कोई बड़ा नेता इस मसले पर बोलने को तैयार नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं और जिस UGC ने इस नियम को लागू किया है, उसके चेयरमैन विनीत जोशी हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इन नियमों को फिर से बनाने को कहा है और तब तक इन पर रोक लगी रहेगी। इसके अलावा, कोर्ट ने केंद्र से जवाब भी तलब किया है। इसे लेकर एक कमेटी भी गठित करने को कहा गया है।साथ ही, कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल 2012 में नोटिफाई किए गए UGC रेगुलेशन ही लागू रहेंगे। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने की तीखी टिप्पणी
वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने अमेरिका की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उम्मीद है हम उस स्थिति तक नहीं पहुंचेंगे, जहां कभी अश्वेत और श्वेत बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में पढ़ाया जाता था।
एक कमेटी बनाने पर हो विचार- CJI
ग्राफिक्स से समझिए UGC के नियम को लेकर जनरल तबके की चिंता
UGC Promotion of Equity Regulations 2026
UGC Regulations 2026 आखिर क्या है?
क्या है UGC और उसका नया रेगुलेशन?
सख्त कार्रवाई का डर
क्या है विरोध के पीछे की असली वजह?
जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4) का गठन किया है, ताकि रेगुलेशन के खिलाफ संगठित विरोध किया जा सके। दुविधा यह है कि अब तक सरकार की ओर से कोई बड़ा नेता इस मसले पर बोलने को तैयार नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं और जिस UGC ने इस नियम को लागू किया है, उसके चेयरमैन विनीत जोशी हैं।
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