Thesootr prime: UGC का नया नियम क्यों बन रहे जनरल वर्ग में गुस्से की वजह?
CHAKRESH | Jan 25, 2026, 16:12 IST
ugc new rules general category reaction
UGC के नए नियम, 2026 के तहत सभी कॉलेजों में इक्विटी कमेटी बनाने का आदेश दिया गया है। यह नियम SC, ST, OBC, और महिलाओं के लिए भेदभाव की शिकायतें सुनने के लिए है। वहीं, जनरल वर्ग इसे अपने खिलाफ मान रहा है। पढ़िए thesootr Prime की यह विशेष रिपोर्ट…
इन दिनों UGC Promotion of Equity Regulations, 2026 को लेकर चर्चा गर्म है। मामला जनरल कास्ट वर्सेस अदर हो गया है। विरोध में एक तबका सड़क पर है तो दूसरा मुखर है। विवाद में जिस कमेटी का बार-बार जिक्र हो रहा है, वह इक्विटी कमेटी (Equity Committee) है, जिसे अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। thesootr prime में आज हम समझेंगे कि पूरा मामला आखिर क्या है…
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। इस नियम का मकसद कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकना और सभी वर्गों के लिए समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना बताया गया है। (UGC Regulations 2026 का राजपत्र देखिए)
जीसी ने नए नियमों का पालन नहीं करने वाले कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को कड़ी चेतावनी दी है। अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें UGC की योजनाओं से बाहर करना, कोर्स बंद करना, ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन पर रोक लगाना, और संस्थान की मान्यता रद्द करना शामिल है।
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यूजीसी ने जातिगत भेदभाव की शिकायत करने के तरीके भी बताए हैं। यदि कोई छात्र, शिक्षक, या कर्मचारी भेदभाव का शिकार होता है, तो वह हेल्पलाइन, ईमेल या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कर सकता है। लिखित शिकायत भी दी जा सकती है। अगर मामला गंभीर होता है, तो उसे पुलिस के पास भेजा जाएगा।
अगर शिकायतकर्ता इक्विटी कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होता, तो वह एक महीने के अंदर कॉलेज या विश्वविद्यालय में बनाए गए ऑम्बड्समैन के पास अपील कर सकता है। वहां तय समय में निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, यूजीसी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा और रैंडम इंस्पेक्शन करके यह सुनिश्चित करेगा कि नियम सही तरीके से लागू हो रहे हैं।
यह नियम संसद की शिक्षा, महिला, बाल और युवा मामलों की संसदीय समिति की सिफारिश पर लागू हुआ है। इस समिति ने 8 दिसंबर 2025 को यूजीसी के ड्राफ्ट रेगुलेशंस की समीक्षा करने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। समिति के चेयरमैन, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह हैं। इसी समिति ने यूजीसी को कुछ सिफारिशें दीं, जिसके आधार पर भेदभाव वाले नियम में ओबीसी को भी जाति आधारित डिस्क्रिमिनेशन में शामिल किया गया।
इससे पहले ओबीसी जातियों को यूजीसी के ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया था। इसके अलावा, इस समिति ने सिफारिश की कि Equity Committee में SC/ST/OBC से आधे से ज्यादा प्रतिनिधि होने चाहिए। इन सिफारिशों के बाद यूजीसी ने जनवरी 2026 में फाइनल रेगुलेशंस में बदलाव करते हुए इसे नोटिफाई किया, जिसमें ओबीसी को शामिल किया गया और झूठी शिकायत पर जुर्माने का प्रावधान हटा दिया गया।
UGC नियमों को तैयार करने वाली संसदीय समिति के केंद्र में दिग्विजय सिंह (अध्यक्ष, कांग्रेस) प्रमुख नाम हैं, जबकि विवादित गाइडलाइंस से जुड़े इस पैनल में अन्य प्रभावशाली सांसद भी मौजूद हैं। कुल 30 सदस्यों वाली यह स्थायी समिति शिक्षा, महिला, बच्चों, युवा और खेल मामलों पर केंद्रित है, जिसमें BJP का दबदबा साफ दिखता है - 16 सदस्य उनके पास।
राज्यसभा से दिग्विजय सिंह (कांग्रेस, MP) के साथ भीम सिंह (BJP, बिहार), बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM, पश्चिम बंगाल), घनश्याम तिवाड़ी (BJP, राजस्थान), रेखा शर्मा (BJP, हरियाणा), सी. सदानंदन मास्टर (केरल BJP), सिकंदर कुमार (BJP, हिमाचल प्रदेश), सुनेत्रा पवार (NCP अजीत गुट, महाराष्ट्र) और स्वाती मालीवाल (पूर्व AAP, दिल्ली) जैसे चेहरे हैं।
लोकसभा खेमे में अभिजित गंगोपाध्याय (BJP, पश्चिम बंगाल), रविशंकर प्रसाद (BJP, पटना साहिब), संबित पात्रा (BJP, पुरी ओडिशा), बांसुरी स्वराज (BJP, नई दिल्ली), बृजमोहन अग्रवाल (BJP, रायपुर छत्तीसगढ़), दग्गुबाती पूरनदेश्वरी (BJP, राजमुंद्र आंध्र), दर्शन सिंह चौधरी (BJP, होशंगाबाद MP), हेमांग जोशी (BJP, वडोदरा गुजरात), अमर शरदराव काले (NCP शरद गुट), अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (कांग्रेस, मणिपुर) शामिल हैं।
शेष सदस्यों में डीएन कुरियाकोसे (कांग्रेस, इडुक्की केरल), वर्षा गायकवाड़ (कांग्रेस, मुंबई उत्तर-मध्य), जितेंद्र दोहरे (SP, इटावा UP), जियाउर्रहमान बर्क (SP, संभल UP), राजीव राय (SP, घोसी UP), कालिपाड़ा सरेन खेरवाल (TMC, झारग्राम WB), कामाख्या प्रसाद तासा (BJP, काजीरंगा असम), करण भूषण सिंह (BJP, कैसरगंज UP), रचना बनर्जी (TMC, हुगली WB), शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया (BJP, साबरकांठा गुजरात) और थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि (DMK, चेन्नई दक्षिण) के नाम दर्ज हैं।
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इन नियमों में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) की जातियों से आने वाले छात्रों को भी शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी से आने छात्रों के साथ भेदभाव बताया जा रहा है। विरोध करने वालों का मानना है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है। सिर्फ जनरल कैटेगरी भर के होने से ही वो दोषी हो जाएंगे।
जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4) का गठन किया है, ताकि रेगुलेशन के खिलाफ संगठित विरोध किया जा सके। दुविधा यह है कि अब तक सरकार की ओर से कोई बड़ा नेता इस मसले पर बोलने को तैयार नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं और जिस UGC ने इस नियम को लागू किया है, उसके चेयरमैन विनीत जोशी हैं।
विवाद का मुख्य कारण इस कमेटी की संरचना है। सोशल मीडिया और जनरल कैटेगरी के कुछ समूहों का आरोप है कि इस कमेटी में आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य किया गया है, लेकिन जनरल कैटेगरी के लिए ऐसी कोई स्पष्ट अनिवार्यता नहीं लिखी गई है। इससे जनरल कैटेगरी को आशंका है कि उनकी सुनवाई निष्पक्ष नहीं होगी। आइए इसे बिंदुवार समझते हैं…
यूजीसी के नए 2026 के नियमों के अनुसार, हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी को भेदभाव की शिकायतों (जाति, धर्म, लिंग आदि) को सुनने के लिए एक कमेटी बनानी होगी। इसमें निम्नलिखित लोग अनिवार्य रूप से शामिल होने चाहिए। जैसे,
अध्यक्ष (Chairperson): संस्थान का प्रमुख (जैसे वाइस चांसलर या प्रिंसिपल)।
सदस्य (Members): नियमों के मुताबिक, कमेटी में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व होना ही चाहिए:
इन नियमों को लागू करवाने के लिए यूजीसी राष्ट्रीय स्तर पर भी एक कमेटी बनाएगी। इसमें ये लोग होंगे:
इस विवाद के संदर्भ में केंद्रीय स्तर पर मुख्य रूप से दो कमेटियों की भूमिका है। पहली वह जो यूजीसी का संचालन करती है (UGC Commission) और जिसने इन नियमों को मंजूरी दी है। दूसरी वह राष्ट्रीय निगरानी समिति जो नए नियमों के तहत अब बनाई जाएगी। चूंकि राष्ट्रीय निगरानी समिति अभी हाल ही में (जनवरी 2026) अधिसूचित हुई है, इसलिए उसके सभी सदस्यों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
विवाद का बिंदु: आलोचकों का कहना है कि जैसे कॉलेजों की कमेटी में जनरल (General) कैटेगरी के लिए सीट सुरक्षित नहीं है, वैसे ही इस राष्ट्रीय कमेटी में भी सिविल सोसाइटी के नाम पर किसी विशेष विचारधारा के लोगों को भरा जा सकता है, जो निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
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पहले समझते हैं UGC Regulations 2026 आखिर क्या है?
क्या है UGC और उसका नया रेगुलेशन?
सख्त कार्रवाई का डर
ग्राफिक्स से समझिए UGC के नियम को लेकर जनरल तबके की चिंता
UGC Promotion of Equity Regulations 2026
जातिगत भेदभाव की शिकायत कैसे करें
अगर शिकायतकर्ता इक्विटी कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होता, तो वह एक महीने के अंदर कॉलेज या विश्वविद्यालय में बनाए गए ऑम्बड्समैन के पास अपील कर सकता है। वहां तय समय में निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, यूजीसी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा और रैंडम इंस्पेक्शन करके यह सुनिश्चित करेगा कि नियम सही तरीके से लागू हो रहे हैं।
यह नियम किसकी सिफारिश पर लागू हुआ?
इससे पहले ओबीसी जातियों को यूजीसी के ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया था। इसके अलावा, इस समिति ने सिफारिश की कि Equity Committee में SC/ST/OBC से आधे से ज्यादा प्रतिनिधि होने चाहिए। इन सिफारिशों के बाद यूजीसी ने जनवरी 2026 में फाइनल रेगुलेशंस में बदलाव करते हुए इसे नोटिफाई किया, जिसमें ओबीसी को शामिल किया गया और झूठी शिकायत पर जुर्माने का प्रावधान हटा दिया गया।
UGC बनाने वालों में कौन कौन हैं शामिल
प्रमुख राज्यसभा सदस्य
लोकसभा के 21 सदस्य
अन्य उल्लेखनीय नाम
दलगत बंटवारा
- BJP: 16 सदस्य
- कांग्रेस: 4
- समाजवादी पार्टी: 3
- तृणमूल: 2
- अन्य (CPM, DMK, NCP अजीत/शरद गुट, AAP पूर्व): शेष
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यूजीसी की Equity Committee को लेकर जारी भारत का राजपत्र
ugc new rules general
ugc new rules
क्या है विरोध के पीछे की असली वजह?
जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4) का गठन किया है, ताकि रेगुलेशन के खिलाफ संगठित विरोध किया जा सके। दुविधा यह है कि अब तक सरकार की ओर से कोई बड़ा नेता इस मसले पर बोलने को तैयार नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं और जिस UGC ने इस नियम को लागू किया है, उसके चेयरमैन विनीत जोशी हैं।
कैसे बनाई जाएंगी कमेटी
1. इक्विटी कमेटी (Equity Committee) जिस पर विवाद है
अध्यक्ष (Chairperson): संस्थान का प्रमुख (जैसे वाइस चांसलर या प्रिंसिपल)।
सदस्य (Members): नियमों के मुताबिक, कमेटी में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व होना ही चाहिए:
- OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के सदस्य
- SC (अनुसूचित जाति) के सदस्य
- ST (अनुसूचित जनजाति) के सदस्य
- महिलाएं (Women)
- दिव्यांगजन (Persons with Disabilities)
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2. राष्ट्रीय निगरानी समिति (National Monitoring Committee)
- यूजीसी के प्रतिनिधि।
- वैधानिक परिषदों (जैसे AICTE, NMC) के प्रतिनिधि।
- सिविल सोसाइटी (नागरिक समाज) के सदस्य।
3. वह लोग जिन्होंने यह नियम बनाया (UGC Commission)
विवाद का बिंदु: आलोचकों का कहना है कि जैसे कॉलेजों की कमेटी में जनरल (General) कैटेगरी के लिए सीट सुरक्षित नहीं है, वैसे ही इस राष्ट्रीय कमेटी में भी सिविल सोसाइटी के नाम पर किसी विशेष विचारधारा के लोगों को भरा जा सकता है, जो निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
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