मांसाहार पर कितना खर्च करते हैं भारतीय? आंकड़े आपको हैरान कर देंगे

भारत में लगभग सभी समुदाय शाकाहार की बात करते हैं। तो दूसरी ओर, कौन क्या खाएगा, इसे व्यक्तिगत अधिकार या च्वाइस भी माना जाता है। इस बहस का सच यह है कि देश में लगातार मांस, अंडे और मछली का सेवन बढ़ा है। पढ़िए thesootr Prime की यह विशेष रिपोर्ट…

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News In Short

  • भारत में 10 में से 8 लोग मांस, अंडे और मछली खाते हैं। यानी करीब 80 फीसदी

  • मांस सेवन का प्रतिशत पुरुषों में 87% और महिलाओं में 75% है।

  • निम्न आय समूहों में मांस का सेवन अधिक है।

  • भारतीयों का मांस सेवन पैटर्न धार्मिक और सामाजिक समूहों के आधार पर बदलता है।

  • मांस पर खर्च औसतन 10% तक बढ़ चुका है, खासकर शहरी इलाकों में।

News In Detail

भारत में मांस सेवन के पैटर्न में बदलाव

भारत में मांस, अंडे और मछली का सेवन तेजी से बढ़ा है। Data for india की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में 80% भारतीय वयस्कों ने मांस का सेवन किया, जबकि 2006 में यह आंकड़ा 74% था। हालांकि इस वृद्धि के बावजूद, मांस सेवन का पैटर्न अभी भी धार्मिक और सामाजिक समूहों के आधार पर भिन्न है।

भारत में कौन खाता है मांस?

15 से 49 साल की उम्र के लगभग 10 में से 8 भारतीय किसी न किसी रूप में नॉनवेज (अंडा, मछली, चिकन या मांस) खाते हैं।

पुरुषों में यह हिस्सा ज्यादा है: लगभग 87% पुरुष मांसाहार करते हैं, जबकि महिलाओं में यह हिस्सा करीब 75% है।

2006 में जो हिस्सा 74% था, वह 2021 तक बढ़कर लगभग 80% हो गया, यानी समय के साथ मांस खाने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ी है।

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किस धर्म में मांसाहार का चलन सबसे ज्यादा?

धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो लगभग 99% मुस्लिम, 99% ईसाई और 97% बौद्ध/नव-बौद्ध मांस खाते हैं, जबकि हिंदू समुदाय में यह आंकड़ा 75% है। जैन और सिख समुदायों में मांसाहार कम है। इसमें केवल एक चौथाई जैन और आधे सिख ही कभी मांस खाते हैं।

मांस, अंडे और मछली का सेवन

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के अनुसार, अंडे सबसे ज्यादा खाए जाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 78% लोग अंडे खाते हैं। इसके बाद चिकन/मांस (75%) और मछली (72%) का सेवन होता है। मांस का सेवन केवल एक-दो दिन नहीं होता; अधिकतर लोग सप्ताह में मांस खाते हैं। शहरी इलाकों में यह आंकड़ा ज्यादा है, और यहां लोग मांस अधिक नियमित रूप से खाते हैं।

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मांस पर खर्च कितना करते हैं भारतीय

2023 में औसतन, एक व्यक्ति मांस पर महीने में 216 रुपए खर्च कर रहा था। यह कुल भारतीय खाद्य खर्च का 10% है। ग्रामीण इलाकों में यह खर्च करीब 200 रुपए था, जबकि शहरी इलाकों में यह बढ़कर 250 रुपए हो जाता है। यह आंकड़ा 1988 में 5% था, जो अब बढ़कर 10% हो गया है।

नॉर्थ ईस्ट राज्यों में मांस पर खर्च सबसे ज्यादा है, जहां लोग अपनी खाद्य बजट का 20-25% मांस पर खर्च करते हैं। केरल, गोवा और नागालैंड में भी मांस पर खर्च अत्यधिक है, जो सब्जियों पर खर्च से दोगुना है।

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आम तौर पर कौन ज्यादा मांस खाता है?

सबसे गरीब 20% लोगों में करीब 90% मांस खाते हैं। दूसरी ओर, सबसे अमीर 20% में यह हिस्सा लगभग 70% के आसपास है।

ग्रामीण इलाकों की अमीर महिलाओं में मांस खाने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी आधी से थोड़ा ज्यादा है, जबकि उसी वर्ग के पुरुषों में यह हिस्सा लगभग तीन-चौथाई तक पहुंच जाता है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में मांसाहार का स्तर अन्य समूहों के मुकाबले ज्यादा (लगभग 87–88%) है, जबकि अन्य सामाजिक समूहों में यह करीब 72% है।

लोग कौन‑सा नॉनवेज ज्यादा खाते हैं?

सर्वे के मुताबिक मांसाहारी चीजों को मुख्यतौर पर तीन हिस्सों में बांटा गया है: अंडा, मछली और चिकन/मांस।

इनमें अंडा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और 78% लोगों ने कभी न कभी इसे खाने की बात कही है। इसके बाद चिकन/मांस (75%) और फिर मछली (72%) का नंबर आता है।

रोजाना मांस खाने वाले लोगों की संख्या कम है। लगभग हर दस में से एक व्यक्ति ही रोज मांसाहार करता है, जबकि करीब छह लोग हफ्ते में कम से कम एक बार नॉनवेज लेते हैं।

सोर्स:

Data for india
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) 2023

FAQ

भारत में सबसे ज्यादा कौन सा मांस खाया जाता है?
सबसे ज्यादा मांस चिकन, अंडे और मछली खाए जाते हैं।
भारत में मांस पर खर्च कितना बढ़ा है?
मांस पर औसतन खर्च 1988 में 5% था, जो 2023 में बढ़कर 10% हो गया।
कौन से राज्य मांस पर सबसे ज्यादा खर्च करते हैं?
नॉर्थ ईस्ट राज्य जैसे केरल, गोवा और नागालैंड में मांस पर खर्च सबसे ज्यादा है।

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