SC की बड़ी टिप्पणी, UAPA में भी जमानत नियम और जेल अपवाद, उमर खालिद के फैसले पर उठाए सवाल
Aman Vaishnav | May 18, 2026, 12:41 IST
supreme court umar khalid bail uapa rules
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 मई, 2026) को अपने उस फैसले पर नाराजगी जताई, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं दी गई थी।
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को जमानत न मिलने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- अदालत ने कहा कि खालिद के मामले में बड़े फैसले की अनदेखी हुई।
- कोर्ट के मुताबिक यूएपीए (UAPA) कानून में भी जमानत एक सामान्य नियम है।
- जम्मू कश्मीर के एक आरोपी को इसी आधार पर जमानत दी गई है।
- कोर्ट ने माना कि बिना ट्रायल लंबे समय तक जेल में रखना ठीक नहीं है।
कोर्ट ने दोहराया कि बेल नियम है और जेल अपवाद है। यह नियम कड़े कानून UAPA में भी लागू होता है। अदालत ने पांच साल से नार्को-टेरर गतिविधियों में शामिल एक आरोपी को जमानत दी है।
क्या है मामला
UAPA और NDPS एक्ट के तहत केस झेल रहे अंद्राबी को जमानत देते समय सुप्रीम कोर्ट ने यह देखा कि वह बिना ट्रायल काफी लंबे समय से जेल में हैं। इसे ही आधार मानकर उन्हें रिहा किया।
कोर्ट ने कहा कि यूएपीए मामलों में भी बेल नियम है और जेल अपवाद का सिद्धांत लागू होता है। जनवरी में कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं दी थी। जबकि बाकी आरोपियों को रिहा कर दिया गया।
फैसले में जस्टिस नागरत्नाऔर जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि उमर खालिद और शरजील के मामले में दूसरी बेंच ने जिस नियम का पालन नहीं किया, वही नियम अंद्राबी को जमानत देने में लागू किया गया। आसान शब्दों में कहें तो जो सिद्धांत अंद्राबी पर लगाया गया उसे खालिद पर नहीं लगाया गया।
छोटी बेंच किसी बड़े फैसले को अनदेखा नहीं कर सकती
छोटी बेंच किसी बड़े फैसले को दरकिनार या अनदेखा नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी ट्रायल में बहुत देरी हो और आरोपी लंबे समय से जेल में है, तो संवैधानिक अदालतें उसे जमानत दे सकती हैं।
भले ही UAPA एक्टलागू हो। यदि कोई असहमति हो तो मामला सिर्फ CJI को बड़ी बेंच बनाने के लिए भेजा जा सकता है।
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