LPG संकट की मार: सूरत के रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का सैलाब, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
Sanjay Dhiman | Apr 19, 2026, 23:11 IST
Photograph: (the sootr)
सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ और एलपीजी संकट के कारण अफरा-तफरी मच गई। गर्मियों की छुट्टियों और फैक्ट्रियों के बंद होने से हजारों मजदूर घर लौटने के लिए उमड़े। स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
अमेरिका-ईरान युद्ध और एलपीजी संकट के कारण भारत के अलग-अलग इलाकों में समस्याएं बढ़ने लगी हैं। इस संकट के कारण सूरत स्थित उधना रेलवे स्टेशन पर हालात बेकाबू हो गए। रविवार को गर्मियों की छुट्टियों के दौरान और फैक्ट्रियों के बंद होने से हजारों प्रवासी मजदूर अपने घरों की ओर वापस जाने के लिए रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। यह स्थिति और भी गंभीर हो गई क्योंकि उत्तर भारत के लिए यहां केवल दो ही ट्रेने मौजूद थी।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टेशन पर लगभग 7,000 से अधिक यात्री जमा हो गए थे, जिनमें यूपी और बिहार जाने वाले यात्री अधिक थे। लेकिन उनके लिए केवल दो ट्रेनें उपलब्ध थीं। इससे स्टेशन के बाहर तीन किलोमीटर लंबी कतारें लग गई। भीड़ के बढ़ने के साथ, कुछ लोग लाइन तोड़ने की कोशिश करने लगे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
इस दौरान यात्रियों को गर्मी के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। कतार में खड़े दो यात्री बेहोश हो गए। पानी की भारी किल्लत के चलते, जब पानी की बोतलें बांटी गईं, तो यात्री आपस में छीना-झपटी करने लगे। इससे भीड़ में और अफरा-तफरी मच गई।
रेलवे अधिकारी अनुभव सक्सेना के मुताबिक, दोपहर तक 6 ट्रेनों के जरिए 21,000 से ज्यादा यात्री रवाना किए जा चुके थे, लेकिन भीड़ इतनी अधिक थी कि व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो गया। यात्रियों से बार-बार कतार में बने रहने की अपील की गई, लेकिन अव्यवस्था के कारण पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े।
यह स्थिति सिर्फ समर वेकेशन की वजह से नहीं हुई है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से एलपीजी संकट के कारण कामगारों का पलायन जारी है। समर सीजन और एलपीजी संकट के कारण सूरत से लौटने वाले मजदूरों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे रेलवे की व्यवस्थाएं पूरी तरह से फेल हो गईं।
एलपीजी संकट का असर सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। सूरत की वीविंग इंडस्ट्री को प्रतिदिन 15,000 गैस सिलेंडर की आवश्यकता है, लेकिन सप्लाई धीमी होने के कारण उद्योग में उत्पादन में भारी गिरावट आई है। यह उद्योग पहले 6.5 करोड़ मीटर कपड़ा प्रतिदिन उत्पादन करता था, लेकिन अब यह घटकर 4.5 करोड़ मीटर रह गया है। इस कारण लगभग 3 लाख मजदूर सूरत छोड़ चुके हैं, और स्थिति सुधारने के कोई संकेत नहीं हैं।
अगर जल्द ही इस संकट का समाधान नहीं हुआ, तो और मजदूरों के पलायन और उद्योग के नुकसान का खतरा बना हुआ है।
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रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़
पानी की किल्लत और बेहोशी के मामले
रेलवे द्वारा राहत कार्य
एलपीजी संकट और पलायन का असर
गैस संकट से सूरत की वीविंग इंडस्ट्री पर असर
अगर जल्द ही इस संकट का समाधान नहीं हुआ, तो और मजदूरों के पलायन और उद्योग के नुकसान का खतरा बना हुआ है।
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