AI ने बताया दिल, जिगर और कैंसर का असली राज, थाइमस ग्रंथी है जान का तोता
Aman Vaishnav | Mar 20, 2026, 12:27 IST
thymus health cancer heart disease longevity research
नेचर जर्नल में छपी नई रिसर्च के मुताबिक थाइमस ग्रंथि की सेहत सीधे तौर पर उम्र, कैंसर और दिल की बीमारियों से जुड़ी है। 27 हजार 612 लोगों पर हुए इस अध्ययन में AI की मदद से यह बात साबित हुई।
News In Short
- नेचर जर्नल में 18 मार्च 2026 को एक बड़ी रिसर्च प्रकाशित हुई है।
- इस रिसर्च में थाइमस ग्रंथि की सेहत और इंसान की लंबी उम्र का सीधा संबंध बताया गया है।
- 27 हजार 612 लोगों के CT स्कैन डेटा पर Artificial Intelligence से यह अध्ययन किया गया है।
- जिनकी थाइमस ग्रंथि कमजोर थी, उनमें कैंसर और हृदय रोग से मृत्यु का खतरा काफी ज्यादा पाया गया है।
- धूम्रपान, मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि थाइमस को नुकसान पहुंचाते हैं।
थाइमस क्या है और क्यों जरूरी है?
वैज्ञानिक पहले मानते थे कि बड़े होने के बाद थाइमस की खास जरूरत नहीं रहती है, लेकिन यह नई रिसर्च इस पुरानी धारणा को पूरी तरह पलट देती है।
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27 हजार लोगों पर हुई रिसर्च
शोधकर्ताओं ने एक डीप लर्निंग (Deep Learning) सिस्टम बनाया। इस AI टूल ने CT स्कैन छवियों से थाइमस की सेहत का आकलन किया। हर व्यक्ति को लो एवरेज या हाई थाइमस हेल्थ की श्रेणी में रखा गया।
मौत का खतरा आधा हो जाता है
यह नतीजा धूम्रपान की आदत, उम्र और अन्य बीमारियों को ध्यान में रखने के बाद भी बना रहा। अलग-अलग तरीकों से विश्लेषण करने पर भी यह संबंध कायम रहा।
फेफड़े के कैंसर में भी बड़ा फर्क
कैंसर से मृत्यु के आंकड़े भी अलग थे। हाई थाइमस हेल्थ वालों में फेफड़े के कैंसर से मौत की दर 1.1 फीसद रही, जबकि लो थाइमस हेल्थ वालों में यह 2.0 फीसद थी। धूम्रपान करने वाले और पूर्व धूम्रपान करने वाले, दोनों में यह पैटर्न देखा गया था।
हृदय रोग से जुड़ा हैरान करने वाला डेटा
FHS समूह में तो फर्क और भी ज्यादा था। हाई थाइमस हेल्थ वालों में CVD (Cardiovascular Disease) यानी हृदय रोग से मृत्यु केवल 0.3 फीसद रही। जबकि लो थाइमस हेल्थ वालों में यह 3.9 फीसद थी। यानी 92 फीसद तक का फर्क। यह नतीजा उम्र, लिंग और धूम्रपान को ध्यान में रखने के बाद भी बना रहा।
अन्य बीमारियों पर भी असर
डायबिटीज (Diabetes Mellitus) समेत मेटाबॉलिक बीमारियों से मौत का खतरा हाई थाइमस हेल्थ वालों में 68 फीसद कम पाया गया था। लिवर, गॉल ब्लैडर और पैंक्रियास जैसी पाचन तंत्र की बीमारियों से मृत्यु भी हाई थाइमस हेल्थ वालों में 54 फीसद कम थी।
सूजन और मेटाबॉलिज्म का गहरा रिश्ता
IL-6 (Interleukin-6), IL-18 (Interleukin-18) और VEGFA (Vascular Endothelial Growth Factor A) जैसे प्रोटीन लो थाइमस हेल्थ वालों में ज्यादा मिले। इसके अलावा जिन लोगों में CRP (C-Reactive Protein) यानी सूजन मापने का तत्व लंबे समय तक ऊंचा रहा, उनकी थाइमस हेल्थ भी कमजोर पाई गई।
कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर के खराब स्तर भी कमजोर थाइमस से जुड़े पाए गए। वहीं अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी HDL (High-Density Lipoprotein) का स्तर ज्यादा होने पर थाइमस हेल्थ बेहतर देखी गई।
आपकी आदतें थाइमस को बनाती या बिगाड़ती हैं
जो लोग शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय थे, उनकी थाइमस हेल्थ बेहतर पाई गई। रिसर्च में यह भी पाया गया कि कम थाइमस हेल्थ वाले लोग ज्यादा थके हुए रहते थे और धीरे चलते थे।
शराब पीने का थाइमस पर कोई खास असर नहीं देखा गया। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थाइमस हेल्थ बेहतर पाई गई।
AI से होगी भविष्य में जांच
शोधकर्ताओं का कहना है कि आगे चलकर यह टूल रूटीन स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बन सकता है। इससे यह पहचानना आसान होगा कि किसे कैंसर या दिल की बीमारी का ज्यादा खतरा है।
क्या थाइमस को ठीक किया जा सकता है?
अमेरिका में ARPA-H (Advanced Research Projects Agency for Health) ने थाइमस को फिर से सक्रिय करने के लिए एक खास शोध कार्यक्रम भी शुरू किया है। यह रिसर्च दिखाती है कि थाइमस सिर्फ बचपन का अंग नहीं है, यह पूरी उम्र जरूरी रहता है।
FAQ
- प्रश्न 1: थाइमस ग्रंथि कमजोर होने के क्या लक्षण होते हैं?
थाइमस ग्रंथि के कमजोर होने के कोई सीधे और साफ लक्षण नहीं होते। यह धीरे-धीरे उम्र के साथ होता है। रिसर्च के मुताबिक कमजोर थाइमस वाले लोग जल्दी थकते हैं, धीरे चलते हैं और शारीरिक गतिविधि कम करते हैं। इनमें शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व ज्यादा होते हैं। खराब मेटाबॉलिज्म, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर और मोटापा भी कमजोर थाइमस के संकेत हो सकते हैं। CT स्कैन से AI की मदद से इसकी जांच संभव है, हालांकि अभी यह क्लिनिकल रूटीन का हिस्सा नहीं है। - प्रश्न 2: क्या जीवनशैली बदलकर थाइमस को ठीक किया जा सकता है?
हां, रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि कुछ आदतें थाइमस की सेहत पर सकारात्मक असर डाल सकती हैं। धूम्रपान छोड़ना सबसे जरूरी कदम है क्योंकि धूम्रपान की अवधि और मात्रा दोनों थाइमस को नुकसान पहुंचाते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन को नियंत्रित रखना और शरीर में सूजन कम करना भी थाइमस हेल्थ सुधारने में मदद कर सकता है। इसके अलावा एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं और थाइमस रीजनरेशन (Thymus Regeneration) पर शोध जारी है। हालांकि शोधकर्ता यह भी कहते हैं कि इस पर और अध्ययन की जरूरत है।
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