किसान परिवार से निकले IAS तुकाराम मुंढे की दुनिया में चर्चा, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया रॉक स्टार

Arohi Raj | Sootr Creatives | Oct 06, 2026, 12:58 IST
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मुंढे महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर और 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं।
मुंढे महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर और 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं।

महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे की चर्चा अब विदेशों तक पहुंच गई है। उन्हें न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने फ्रंट पेज पर जगह दी है। अखबार ने फूड सेफ्टी नियमों पर सख्ती के लिए उन्हें रॉक स्टार बताया है। वहीं, मुंढे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा गुड गवर्नेंस हेडलाइन बनाने के लिए नहीं, बदलाव लाने के लिए है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • न्यूयॉर्क टाइम्स ने तुकाराम मुंढे को अपने फ्रंट पेज पर जगह दी है।
  • फूड सेफ्टी नियम सख्ती से लागू करने के लिए उन्हें 'रॉक स्टार' बताया।
  • मुंढे महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर और 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं।
  • उन्होंने एक्स पर रिपोर्ट का जवाब देते हुए गुड गवर्नेंस पर अपनी बात रखी।
  • मुंढे ने NDTV YUVA-2026 के मंच पर भी अपनी बात रखी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन में मुंढे की चर्चा

यह रिपोर्ट एक दमदार हेडलाइन के साथ छापी गई है। अखबार के हेडलाइन में मुंढे को रॉक स्टार बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, वे नियमों को सख्ती से लागू करने की वजह से लोगों के हीरो बन गए हैं। अखबार में छपी आर्टिकल में मुंबई और महाराष्ट्र के छापेमार कार्रवाई का जिक्र है। ये छापे गंदे रेस्टोरेंट किचन, फूड प्रोसेसर और मशहूर खाने-पीने की जगहों पर पड़े हैं।

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पुलिस अब रिक्रूटर और सरगना तक पहुंचेगी; साइबर अपराधों पर लगाम लगाने की नई रणनीति
06 Oct 2026 ,
By Jyoti Mahender Bhardwaj
राजस्थान पुलिस ने म्यूल अकाउंट से जुड़े साइबर अपराधों की जांच के लिए नई एसओपी लागू की है। इस योजना के तहत अब जांच अधिकारियों को छह चरणों में 21 स्टेप्स पूरे करने होंगे। जांच का मुख्य उद्देश्य खाताधारक के अलावा रिक्रूटर और मुख्य सरगना तक पहुंचना है। इसके लिए डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच और कस्टडी चेन की जरुरत होगी।
राजस्थान पुलिस ने म्यूल अकाउंट से जुड़े साइबर अपराधों की जांच के लिए नई एसओपी लागू की है। इस योजना के तहत अब जांच अधिकारियों को छह चरणों में 21 स्टेप्स पूरे करने होंगे। जांच का मुख्य उद्देश्य खाताधारक के अलावा रिक्रूटर और मुख्य सरगना तक पहुंचना है। इसके लिए डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच और कस्टडी चेन की जरुरत होगी।

ग्राहक खुश, रेस्टोरेंट पर दबाव

रिपोर्ट में बताया गया है कि आम लोग और ग्राहक उनके सख्त रवैये की तारीफ करते हैं। दूसरी तरफ रेस्टोरेंट मालिक और लापरवाह संस्थान एक्शन से परेशान हैं। इसकी वजह मुंढे की सख्त जीरो-टॉलरेंस नीति बताई गई है। जीरो-टॉलरेंस यानी नियम तोड़ने पर तुरंत एक्शन ली जाती है।

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इंदौर में शोर मापने वाला यंत्र पुलिस ने 1.5 लाख में खरीदा, हाईकोर्ट में वकील ने बता दिया 3000 में मिल रहा
06 Oct 2026 ,
By Sanjay Gupta
Indore. इंदौर हाईकोर्ट में पुलिस की जमकर फजीहत हो गई। मामला शहर में लाउडस्पीकर और डीजे के चलते हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर जनहित याचिका का था। इसमें पुलिस ने एक यंत्र बताया और इसकी कीमत 1.5 लाख बताई है। वहीं, ऐसा यंत्र ऑनलाइन तीन हजार में मिल रहा है। इस पर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई।
Indore. इंदौर हाईकोर्ट में पुलिस की जमकर फजीहत हो गई। मामला शहर में लाउडस्पीकर और डीजे के चलते हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर जनहित याचिका का था। इसमें पुलिस ने एक यंत्र बताया और इसकी कीमत 1.5 लाख बताई है। वहीं, ऐसा यंत्र ऑनलाइन तीन हजार में मिल रहा है। इस पर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई।

तुकाराम मुंढे ने क्या जवाब दिया

न्यूयॉर्क टाइम्स की स्टोरी पर मुंढे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, गुड गवर्नेंस हेडलाइन बनाने के बारे में नहीं है। यह बदलाव लाने के बारे में है। फूड सेफ्टी का असल मकसद लोगों की सुरक्षा करना है। साथ ही स्टैंडर्ड बनाए रखना और जनता का भरोसा जीतना है।

उन्होंने आगे कहा कि जब नियम लागू करना निष्पक्ष, निडर और एक जैसा होता है। इससे संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ती है। लोगों को यकीन होने लगता है कि सिस्टम काम करता है। उनके मुताबिक, न्यूयॉर्क टाइम्स महाराष्ट्र की ऐसी ही एक कहानी पेश करता है।

कौन हैं तुकाराम मुंढे

तुकाराम मुंढे 2005 बैच के अधिकारी हैं। वे महाराष्ट्र के बीड जिले के एक छोटे किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने पिता के साथ खेतों में काम किया और बाजार में सब्जी भी बेची है। इसके बीच पढ़ाई करके वे IAS बने।

बताया जाता है कि करीब 20 साल के करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। इसके बावजूद उन्होंने अपने काम के तरीके में कोई बदलाव नहीं किया। उनकी पहचान बिना डरे काम करने की है।

NDTV YUVA-2026 के मंच पर क्या बोले मुंढे

NDTV YUVA-2026 के मंच से मुंढे ने अपने करियर से लेकर कार्रवाई तक कई मुद्दों पर बात की। उनसे पूछा गया कि नेताओं, अधिकारियों, पत्नी या ट्रांसफर ऑर्डर में किसका डर सबसे ज्यादा है।

मैं किसी से नहीं डरता। डर को दिमाग से निकाल दीजिए। अगर आप कुछ गलत करेंगे, तभी आपको डर लगेगा।
By: तुकाराम मुंढे

युवाओं को क्या सलाह दी

मुंढे ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी का मतलब पब्लिक सर्विस है, इससे ज्यादा या कम कुछ नहीं। इसे नौकरी की तरह नहीं, बल्कि एक रोल की तरह देखना होगा। अपना रोल समझना और उसे सराहना जरूरी है।

FAQs

    1. तुकाराम मुंढे को न्यूयॉर्क टाइम्स में क्यों 'रॉक स्टार' कहा गया है?
      तुकाराम मुंढे को न्यूयॉर्क टाइम्स में 'रॉक स्टार' बताया गया है क्योंकि उन्होंने खाद्य सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया है, जिससे वे लोगों के हीरो बन गए हैं।
    2. तुकाराम मुंढे की जीरो-टॉलरेंस नीति का क्या प्रभाव है?
      तुकाराम मुंढे की जीरो-टॉलरेंस नीति के कारण आम लोग और ग्राहक उनके सख्त रवैये को सराहते हैं, जबकि रेस्टोरेंट मालिक और लापरवाह संस्थान उनके कार्यों से परेशान हैं।
    3. तुकाराम मुंढे ने अपनी बातों में युवाओं को क्या सलाह दी है?
      तुकाराम मुंढे ने युवाओं को सलाह दी कि सरकारी नौकरी को पब्लिक सर्विस के रूप में देखें, ना कि सिर्फ एक नौकरी के रूप में, और अपने रोल को समझकर उसका सम्मान करें।
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    • तुकाराम मुंढे 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं
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