UPSC रिजल्ट में 7 झूठे दावे, UP में फर्जी IAS का खेल
Jitendra Shrivastava | Mar 15, 2026, 17:46 IST
Photograph: (THESOOTR)
UPSC 2025 रिजल्ट के बाद उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 7 अभ्यर्थियों ने फर्जी सफलता का दावा किया। नेताओं ने बधाई दी, मिठाई बंटी, लेकिन 24 घंटे में सारे झूठ उजागर हो गए।
5 प्वॉइंट में समझें क्या है पूरा मामला...
- UPSC 2025 का रिजल्ट 6 मार्च को आया और उसी दिन से झूठे दावों का सिलसिला शुरू हो गया।
- उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में 7 लोगों ने फर्जी सफलता का दावा किया।
- नेताओं, अधिकारियों और परिवार ने बिना जांचे इन्हें बधाई दी और सम्मान किया।
- सभी सात मामलों में असली चयनित उम्मीदवार दूसरे राज्यों के निकले।
- जांच में पता चला कि ज्यादातर आरोपी तो UPSC की प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाए थे।
जब मिठाई बंटी और ढोल बजे, पर सच कुछ और था
1- शिखा रानी का झूठ और दादा के आंसू
SHIKHA
बुलंदशहर की शिखा रानी ने दावा किया कि UPSC में उनकी 113वीं रैंक आई है। यह सुनकर उनके दादा, जो एक इंटर कॉलेज में चपरासी हैं, कैमरे के सामने फूट-फूटकर रो पड़े। वह भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। हर चैनल पर खबर चली कि चपरासी की पोती IAS बन गई। शिखा टीवी पर इंटरव्यू दे रही थीं, रात-दिन की मेहनत की कहानियां सुना रही थीं। पूरे बुलंदशहर में उनके नाम के पोस्टर और होर्डिंग लग गए।
लेकिन दिल्ली की असली शिखा ने यह सब देखा और तुरंत UPSC को ईमेल किया। दिल्ली वाली शिखा पहले से ही रोहतक में तैनात अधिकारी हैं। जांच बैठी तो पता चला कि बुलंदशहर की शिखा रानी ने मुख्य परीक्षा भी नहीं दी थी। सच सामने आया तो शिखा ने माफी मांग ली। उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ नाम देखा था, रोल नंबर नहीं देखा। इस भावनात्मक नाटक ने प्रशासन का बहुत कीमती समय बर्बाद किया।
2- इंस्पेक्टर प्रियंका ने खुद पर किया भरोसा तोड़ा
PRIYANKA
गाजीपुर की प्रियंका चौधरी पहले से ही प्रयागराज में GST इंस्पेक्टर हैं। उन्होंने अपने पिता को फोन करके 79वीं रैंक का दावा किया। पूरे गांव में मिठाई बंटी और ढोल-नगाड़े बजे। लोगों ने सरकारी पद पर होने के कारण उन पर पूरा भरोसा किया। लेकिन 24 घंटे में पता चला कि असली प्रियंका चौधरी राजस्थान के बीकानेर की हैं। उनके पति मुकेश पहले से ही IAS अधिकारी हैं और हिमाचल के चंबा में डिप्टी कमिश्नर हैं।
जब सच सामने आया तो गाजीपुर वाली प्रियंका ने सारा दोष अपने पिता की गलतफहमी पर डाल दिया। जांच में पता चला कि वह प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं। सरकारी पद पर रहते हुए ऐसा झूठ बोलना किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता।
3- बागपत की दिव्या और प्रिंसिपल का सम्मान समारोह
DIVYA
बागपत की दिव्या तंवर ने 182वीं रैंक का दावा किया। उनके पुराने स्कूल के प्रिंसिपल रणवीर सिंह ने सम्मान समारोह की तैयारी शुरू कर दी। अगले दिन स्थानीय अखबारों में दिव्या की फोटो भी छप गई। लेकिन जल्द ही पता चला कि 182वीं रैंक दिव्या गहलावत की है, जो हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं।
सच उजागर होते ही बागपत की दिव्या और उनका परिवार मीडिया से छिप गए। स्कूल का सम्मान समारोह रद्द हो गया और स्थानीय नेताओं ने अपनी फेसबुक पोस्ट हटा लीं। जांच में यह भी सामने आया कि दिव्या तंवर प्रीलिम्स में ही फेल थीं।
4- सतना और बिहार में नाम का खेल
YASHVARDHAN
मध्य प्रदेश के सतना के यशवर्धन सिंह ने 212वीं रैंक का दावा किया। टीवी पर उन्होंने कहा कि वे रैंक से संतुष्ट नहीं हैं और अगली बार बेहतर करेंगे। लेकिन रोल नंबर और कैटेगरी ने उनका झूठ तुरंत पकड़ लिया। सतना वाले यशवर्धन सामान्य कैटेगरी के हैं, जबकि चयनित यशवर्धन OBC कैटेगरी के उम्मीदवार हैं और उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से हैं। हमीरपुर वाले यशवर्धन ने लखनऊ के KGMU से MBBS किया है और यह उनका तीसरा सफल प्रयास था।
5- आकांक्षा सिंह की भी जोरदार कहानी
AKANKSHA
बिहार की आकांक्षा सिंह ने 301वीं रैंक का दावा किया। उनके दादा रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया रहे हैं। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बिना जांचे उन्हें बधाई दे दी। लेकिन गाजीपुर की असली आकांक्षा ने सोशल मीडिया पर सच सामने रखा। जांच में बिहार वाली आकांक्षा का एडमिट कार्ड भी फर्जी निकला और उसका QR कोड भी मैच नहीं कर रहा था।
6- रंजीत भागा और फैरूज की नौकरी खतरे में
RANJIT
बिहार के रंजीत कुमार यादव ने 440वीं रैंक का दावा किया। पूर्व विधायक विजय सम्राट काला ब्रीफकेस लेकर उनके घर पहुंचे, माला पहनाई और मिठाई खिलाई। पुलिस स्टेशन के इंचार्ज ने भी उन्हें सम्मानित किया। लेकिन दो दिन बाद पता चला कि असली रंजीत कर्नाटक के चिकबल्लापुर जिले के हैं। जब पुलिस ने बिहार वाले रंजीत को बुलाया तो वह मोबाइल बंद करके दिल्ली फरार हो गया। जांच में निकला कि उसने यूपीएससी की प्रीलिम्स भी नहीं दी थी और इससे पहले भी फर्जी दावे कर चुका था।
7- फैरूज फातिमा फोटो एडिट करके लगाई
FAIROOJ
उत्तराखंड की फैरूज फातिमा ने 708वीं रैंक का दावा किया। उन्होंने सनरूफ वाली कार में खड़े होकर रोड शो निकाला और UPSC दफ्तर के बाहर की फोटो एडिट करके लगाई। फैरूज फिलहाल RBI में डिप्टी मैनेजर के पद पर हैं। जांच में पता चला कि असली फैरूज फातिमा केरल की रहने वाली हैं। उन्होंने अपने एडमिट कार्ड पर रोल नंबर बदला था। अब RBI उनके पुराने दस्तावेजों की जांच कर रहा है और उनकी मौजूदा नौकरी पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
यह खेल नया नहीं है
2014 में रूबी चौधरी 6 महीने तक ट्रेनिंग एकेडमी में फर्जी IAS बनी रही। उसने गार्ड को झांसा देकर कमरा लिया और असली ट्रेनी अफसरों को धमकाती रही। पोल खुलने पर उसे जेल भेजा गया। 2022 में आयशा मकरानी ने 184वीं रैंक का दावा किया और एडमिट कार्ड बदला।
जांच में पता चला कि उसे प्रीलिम्स में सिर्फ 22 नंबर मिले थे, जबकि पास होने के लिए कम से कम 88 नंबर चाहिए थे। हरियाणा के तुषार कुमार ने भी 44वीं रैंक का दावा किया और जांच में निकला कि उन्हें प्रीलिम्स में माइनस नंबर मिले थे।
UPSC की व्यवस्था बहुत मजबूत है। हर रोल नंबर, हर कैटेगरी, हर QR कोड रिकॉर्ड में है। झूठ कितना भी बड़ा हो, 24 घंटे से ज्यादा नहीं टिक पाता।
FAQ
- UPSC 2025 रिजल्ट के बाद किन-किन लोगों ने फर्जी सफलता का दावा किया?
UPSC 2025 रिजल्ट के बाद सात लोगों के फर्जी दावे सामने आए। इनमें बुलंदशहर की शिखा रानी (113वीं रैंक), गाजीपुर की प्रियंका चौधरी (79वीं रैंक), बागपत की दिव्या तंवर (182वीं रैंक), सतना के यशवर्धन सिंह (212वीं रैंक), बिहार की आकांक्षा सिंह (301वीं रैंक), बिहार के रंजीत कुमार यादव (440वीं रैंक) और उत्तराखंड की फैरूज फातिमा (708वीं रैंक) शामिल हैं। जांच में इन सभी के दावे झूठे साबित हुए और ज्यादातर तो प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाए थे। - UPSC में फर्जी दावे कैसे पकड़े जाते हैं?
UPSC हर उम्मीदवार का रोल नंबर, कैटेगरी और QR कोड रिकॉर्ड में रखती है। जब कोई फर्जी दावा करता है तो असली चयनित उम्मीदवार या प्रशासन UPSC को सूचित करता है। रोल नंबर और कैटेगरी मिलाने पर झूठ तुरंत सामने आ जाता है। UPSC 2025 के सभी सात फर्जी दावे 24 से 48 घंटे के भीतर उजागर हो गए। एडमिट कार्ड का QR कोड भी एक मजबूत जांच का तरीका है। - UPSC में फर्जी दावा करने पर क्या कानूनी कार्रवाई होती है?
UPSC में फर्जी सफलता का दावा करना धोखाधड़ी और जालसाजी के दायरे में आता है। IPC की धारा 420 के तहत ऐसे मामलों में पुलिस केस दर्ज हो सकता है। अगर कोई सरकारी नौकरी में है और झूठा दावा करता है तो विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। 2014 में रूबी चौधरी को 6 महीने ट्रेनिंग एकेडमी में रहने के बाद जेल भेजा गया था। फैरूज फातिमा के मामले में RBI उनकी नौकरी के दस्तावेजों की जांच कर रहा है।
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