अमेरिका ने इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो समेत कई IT कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रोग्राम पर लगाई रोक, भारतीयों पर क्या होगा असर?
Kaushiki | Oct 09, 2026, 11:01 IST
अमेरिका में Infosys, TCS, Wipro के PERM पर रोक
अमेरिकी श्रम विभाग ने इंफोसिस, TCS, विप्रो और HCL जैसी कंपनियों के PERM प्रोग्राम को निलंबित किया है। इससे नए ग्रीन कार्ड आवेदन रुक गए हैं। इससे भारतीय IT कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड में देरी होगी। हालांकि उनके H-1B वीजा सुरक्षित हैं। यह कदम अमेरिकी श्रम हितों की रक्षा और इनरेगुलरिटीज की जांच के लिए उठाया गया है।
इन कंपनियों पर विदेशी कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड दिलाने की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करने के आरोप हैं। इससे अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की कोशिश कर रहे भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि इस कार्रवाई से कर्मचारियों के मौजूदा एच-1बी (H-1B) वीजा अपने आप रद्द नहीं होंगे।
किन आईटी कंपनियों पर लगाई गई रोक
- इंफोसिस (Infosys)
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
- विप्रो (Wipro)
- एचसीएल (HCL)
- कॉग्निजेंट (Cognizant) और
- कैपजेमिनी (Capgemini) शामिल हैं।
इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़े नियमों का गलत इस्तेमाल किया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी पेशेवरों की भर्ती के साथ अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना भी है।
हालांकि कंपनियों पर लगे आरोपों को अभी साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। कार्रवाई के चलते प्रभावित कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश कर रहे कर्मचारियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
क्या होता है ग्रीन कार्ड
अमेरिका में नौकरी करने वाले कई भारतीय कर्मचारी भी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं। इसके लिए परिवार, रोजगार और अन्य श्रेणियों के तहत अलग-अलग नियम हैं। रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने की कुछ श्रेणियों में कंपनी को पहले PERM प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
आखिर क्या है PERM प्रोग्राम
यह प्रक्रिया रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की कई प्रमुख श्रेणियों में जरूरी होती है। इस प्रक्रिया में कंपनी को साबित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए कोई योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहा है।
साथ ही विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से समान काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और काम की परिस्थितियों पर गलत असर नहीं पड़ना चाहिए। इन शर्तों को पूरा करने के बाद कंपनी आगे की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू कर सकती है। हालांकि अमेरिका में हर तरह के रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए पर्म सर्टिफिकेशन जरूरी नहीं होता।
क्या इंडियन एम्प्लाइज के H-1B वीजा रद्द होंगे
ऐसे में ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से कंपनियों को सस्पेंड करने की खबर ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि पर्म प्रोग्राम से सस्पेंशन का मतलब एच-1बी वीजा रद्द होना नहीं है। दोनों अलग प्रक्रियाएं हैं। एच-1बी वीजा विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में तय शर्तों के तहत काम करने की अनुमति देता है।
दूसरी तरफ पर्म प्रोग्राम स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसलिए कंपनियां मौजूदा एच-1बी कर्मचारियों को नौकरी पर बनाए रख सकती हैं। लेकिन जिन कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड आवेदन पर्म प्रक्रिया पर निर्भर है, उन्हें देरी का सामना करना पड़ सकता है।
नए ग्रीन कार्ड आवेदन नहीं कर सकेंगी कंपनियां
खासकर भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए यह परेशानी बढ़ाने वाला कदम हो सकता है। कई कर्मचारी लंबे समय से ग्रीन कार्ड मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में कंपनी की ओर से आवेदन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर उनका इंतजार और लंबा हो सकता है। हालांकि किसी कर्मचारी के मामले में वास्तविक असर आवेदन की स्थिति और संबंधित इमिग्रेशन नियमों पर निर्भर करेगा।
माइक्रोसॉफ्ट पर क्यों उठाए गए सबसे ज्यादा सवाल
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने आरोप लगाया कि माइक्रोसॉफ्ट ने वर्ष 2025 में करीब छह हजार अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। वेंस के मुताबिक कंपनी ने एक तरफ अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की। जबकि दूसरी तरफ उसे छह हजार से ज्यादा एच-1बी वीजा से जुड़ी मंजूरियां मिलीं।
इसके अलावा कंपनी ने तीन हजार 682 पर्म आवेदन भी दाखिल किए। उन्होंने दावा किया कि इनमें करीब एक हजार आवेदन ऐसे पदों से जुड़े थे, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया गया था। हालांकि इन आरोपों पर माइक्रोसॉफ्ट का पक्ष उपलब्ध रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने H-1B सिस्टम पर उठाए सवाल
वेंस ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियों ने इस व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर सवाल उठाए।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ऐसी प्रक्रियाओं की जांच जरूरी है, ताकि अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन से जुड़े हितों की रक्षा हो सके। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
हार्वर्ड और येल समेत नौ विश्वविद्यालय भी जांच के दायरे में
इन संस्थानों पर आरोप है कि विदेशी छात्रों और कर्मचारियों से जुड़ी भर्ती व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी वेतन पर दबाव डालने के लिए किया गया। अमेरिकी प्रशासन इन आरोपों की जांच कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो (Anthony D'Esposito) ने बताया कि इस मामले में कानूनी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। हालांकि विश्वविद्यालयों पर लगे आरोपों की पुष्टि या जांच के अंतिम नतीजे अभी सामने नहीं आए हैं।
भारतीय आईटी कर्मचारियों पर कितना असर पड़ेगा
ऐसे में पर्म प्रोग्राम से सस्पेंशन लंबे समय तक जारी रहा तो इन कर्मचारियों को स्थायी निवास पाने में देरी हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2023 के आंकड़ों का भी जिक्र किया गया है।
इसके मुताबिक उस वर्ष ग्रीन कार्ड पाने वाले भारतीयों में करीब 37 प्रतिशत रोजगार आधारित श्रेणियों से जुड़े थे। हालांकि सभी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियों में पर्म प्रक्रिया जरूरी नहीं होती। इसलिए यह कहना गलत होगा कि अमेरिका में सभी भारतीय कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड आवेदन रोक दिए गए हैं।
कंपनियों के लिए भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
इससे उनका कानूनी, प्रशासनिक और नियमों के पालन से जुड़ा खर्च बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा कंपनियों को अपने कर्मचारियों की स्थायी निवास संबंधी योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है।
जिन कर्मचारियों के आवेदन पहले से लंबित हैं, उन्हें भी आगे की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इस कार्रवाई का मतलब कंपनियों के कारोबार बंद होना या मौजूदा कर्मचारियों की नौकरी खत्म होना नहीं है।
क्या अमेरिका में ग्रीन कार्ड मिलने की प्रक्रिया बंद हो गई
दूसरी कंपनियों और पर्म से अलग रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियों की प्रक्रिया अपने नियमों के मुताबिक जारी रह सकती है। वहीं प्रभावित कर्मचारियों को अपनी कंपनी के इमिग्रेशन विभाग या एलिजिबल वकील से आवेदन की स्थिति समझनी चाहिए। फिलहाल ये साफ है कि पर्म प्रोग्राम से सस्पेंशन और एच-1बी वीजा रद्द होना दो अलग बातें हैं।
FAQs:
- अमेरिकी श्रम विभाग ने किन कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े पर्म प्रोग्राम से सस्पेंड किया है?
अमेरिकी श्रम विभाग ने इंफोसिस, TCS, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी जैसी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े पर्म प्रोग्राम से सस्पेंड किया है। - क्या इस सस्पेंशन का असर भारतीय कर्मचारियों के H-1B वीजा पर पड़ेगा?
नहीं, पर्म प्रोग्राम से सस्पेंशन का मतलब H-1B वीजा रद्द होना नहीं है। ये दोनों अलग प्रक्रियाएं हैं, और मौजूदा H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होंगे। - सस्पेंशन के दौरान प्रभावित कंपनियां ग्रीन कार्ड के लिए नए आवेदन कर सकेंगी?
नहीं, सस्पेंशन लागू रहने तक प्रभावित कंपनियां नए पर्म आवेदन दाखिल नहीं कर सकेंगी और पहले से लंबित आवेदन भी रोक दिए जाएंगे।
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