Zepto से सामान मंगाना हुआ महंगा: फ्री डिलीवरी की लिमिट बढ़कर 199 रुपए हुई
Manya Jain | Aug 20, 2026, 15:55 IST
zepto zomato delivery charges hike
Zepto ने फ्री डिलीवरी के लिए मिनिमम ऑर्डर वैल्यू 149 रुपए से बढ़ाकर 199 रुपए कर दी है। पीक ऑवर्स में यह सीमा 299 रुपए तक पहुंच जाती है। वहीं Zomato पर सस्टेनेबल पैकेजिंग से खाना 30% तक महंगा हो सकता है।
समझें क्या है पूरा मामला
- क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने फ्री डिलीवरी के लिए मिनिमम ऑर्डर वैल्यू बढ़ा दी है।
- पहले यह सीमा 149 रुपए थी, जिसे अब बढ़ाकर 199 रुपए कर दिया गया है।
- भारी डिमांड वाले पीक ऑवर्स में यह सीमा और भी बढ़कर 299 रुपए तक हो जाती है।
- इस बदलाव के बाद Zepto, Blinkit और Instamart जैसी कंपनियों के बराबर आ गई है।
- वहीं Zomato पर सस्टेनेबल पैकेजिंग अपनाने से खाना मंगाना भी महंगा हो सकता है।
इस बढ़ोतरी के बाद Zepto का फ्री डिलीवरी बेस प्राइस Blinkit और Instamart जैसी अपनी दूसरी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बराबर आ गया है। इतना ही नहीं, भारी डिमांड वाले पीक ऑवर्स में मिनिमम ऑर्डर वैल्यू बढ़कर 299 रुपए तक हो जाती है।
कंपनी ने क्यों किया यह बदलाव
Zomato से खाना मंगाना भी हो सकता है महंगा
अभी ज्यादातर खाने की डिलीवरी प्लास्टिक के डिब्बों या प्लास्टिक रैपिंग मटीरियल में की जाती है। पैकेजिंग का खर्च आमतौर पर ऑर्डर की कुल कीमत का करीब 5 प्रतिशत होता है, जिसका बोझ ग्राहक को ही उठाना पड़ता है।
पर्यावरण और ग्राहकों की जेब, दोनों का रखा जा रहा ध्यान
एक्सपर्ट कोट्स
FAQ
- Zepto पर फ्री डिलीवरी के लिए अब कितना ऑर्डर करना जरूरी है?
Zepto ने फ्री डिलीवरी के लिए मिनिमम ऑर्डर वैल्यू 149 रुपए से बढ़ाकर 199 रुपए कर दी है। पीक ऑवर्स में यह सीमा बढ़कर 299 रुपए तक हो जाती है। यह बदलाव Blinkit और Instamart जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बराबर लाने के लिए किया गया है। - कंपनी ने यह बदलाव क्यों किया है?
कंपनी अब ऑर्डर की संख्या के बजाय एवरेज बास्केट वैल्यू बढ़ाने पर फोकस कर रही है। इससे हर डिलीवरी पर होने वाला खर्च कम करने की कोशिश की जा रही है। कम कीमत वाले ऑर्डर पर पैकेजिंग और डिलीवरी का खर्च निकालना मुश्किल होता है। - Zomato पर खाना क्यों महंगा हो सकता है?
अगर Zomato सस्टेनेबल और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग अपनाता है, तो खाना 10 से 30 प्रतिशत तक महंगा हो सकता है। अभी पैकेजिंग का खर्च कुल ऑर्डर कीमत का करीब 5 प्रतिशत होता है। यह फैसला पर्यावरण और ग्राहकों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है।
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