क्यों आज भी अमरनाथ गुफा में जीवित दिखाई देता है कबूतरों का जोड़ा? जानिए सच
Kaushiki | Jun 27, 2026, 13:20 IST
Amarnath Yatra
पवित्र अमरनाथ यात्रा इस साल 3 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रही है। भगवान शिव ने इसी गुफा में माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी। इस दौरान वहां मौजूद कबूतरों का एक जोड़ा भी कथा सुनकर हमेशा के लिए अमर हो गया था।
Amarnath Yatra: हिंदू धर्म में अमरनाथ यात्रा को सबसे ज्यादा फलदायी और पवित्र माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यहां आते हैं। हिमालय की ठंडी और बर्फीली पहाड़ियों के बीच यह पवित्र गुफा स्थित है।
यहां बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्माण अपने आप होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस गुफा में एक चमत्कारी रहस्य भी छिपा हुआ है। यहां आज भी कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है।
इन कबूतरों को आम पक्षी नहीं बल्कि अमर पक्षी माना जाता है। इन्होंने भगवान शिव के मुख से अमर होने की कथा सुनी थी। शिव पुराण और स्कंद पुराण में इस कथा का बहुत सुंदर वर्णन मिलता है। भृंगीश संहिता में भी इस रहस्य के बारे में बताया गया है। आइए जानें अमरनाथ यात्रा का महत्व...
![amarnath gufa]()
पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार माता पार्वती के मन में विचार आया। उन्होंने भगवान शिव से अमरत्व का रहस्य जानने की इच्छा जताई।
भगवान शिव जानते थे कि यह कथा बहुत ज्यादा गोपनीय और शक्तिशाली है। जो भी इसे सुनेगा वह जीवन और मृत्यु से मुक्त हो जाएगा। इसलिए महादेव ने कथा सुनाने के लिए एक बेहद एकांत जगह चुनी। वह जगह आज की पवित्र और गुप्त अमरनाथ गुफा ही है।
गुफा में पहुंचकर भगवान शिव ने माता पार्वती को बिठाया और कहा। उन्होंने कहा कि कथा के दौरान यहां कोई तीसरा नहीं होना चाहिए।
महादेव ने जैसे ही कथा सुनाना शुरू किया माता पार्वती उसे सुनने लगीं। लेकिन कुछ समय बाद माता पार्वती को गहरी नींद आ गई। उसी समय गुफा में कबूतरों का एक जोड़ा भी चुपचाप बैठा हुआ था।
माता पार्वती के सोने के बाद कबूतरों ने हुंकार भरना शुरू किया। शिव जी को लगा कि पार्वती जी ही कथा सुन रही हैं। इस तरह कबूतरों के जोड़े ने पूरी अमर कथा ध्यान से सुन ली।
कथा समाप्त होने पर जब महादेव ने अपनी आंखें खोलीं तो हैरान रह गए। माता पार्वती सो रही थीं और कबूतर सामने बैठे थे। यह देखकर भगवान शिव को पहले तो बहुत तेज गुस्सा आ गया। वे कबूतरों को सजा देने के लिए आगे बढ़े।
तभी कबूतरों ने हाथ जोड़कर महादेव से एक बहुत बड़ी गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि प्रभु अब हम आपकी अमर कथा सुन चुके हैं। अगर आप हमें मार देंगे तो आपकी यह अमर कथा झूठी हो जाएगी।
कबूतरों की यह तर्कसंगत बात सुनकर महादेव का गुस्सा शांत हो गया। महादेव ने मुस्कुराते हुए उन दोनों कबूतरों को एक वरदान दिया। उन्होंने कहा कि तुम दोनों हमेशा के लिए अमर रहोगे। तुम दोनों इस गुफा में शिव और पार्वती के प्रतीक बनकर रहोगे। तब से वह जोड़ा इसी पवित्र गुफा में निवास करता है।
![Amarnath yatra 2022 How Shivling Constructed in Amarnath Cave Shivling Mythology | Explainer: अमरनाथ गुफा में ऐसे होता है पवित्र शिवलिंग का निर्माण, पढ़िए रोचक कहानी]()
श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने इस साल की अमरनाथ यात्रा का शेड्यूल जारी कर दी हैं। इस साल यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी। 3 जुलाई को आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पड़ रही है। इस बार बाबा बर्फानी की यह यात्रा पूरे 57 दिनों की होगी।
यात्रा का समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। इसी पावन दिन देश भर में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। श्रद्धालु काफी समय से इस यात्रा के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। अब प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए एडवांस रजिस्ट्रेशन कराना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए पंजीकरण की प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हो चुकी है।
श्रद्धालु श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा बैंकों के जरिए भी रजिस्ट्रेशन हो रहा है। देश भर में भारतीय स्टेट बैंक सहित 550 बैंक शाखाएं अधिकृत की गई हैं।
यहां पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर परमिट मिलते हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का दूसरा चरण 3 जुलाई से दोबारा शुरू होने जा रहा है। यह प्रक्रिया आने वाले 12 अगस्त तक लगातार चलती रहेगी।
अमरनाथ की पवित्र गुफा करीब 14 हजार 800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए पहाड़ों पर कठिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।
खराब मौसम और चढ़ाई को देखते हुए उम्र सीमा तय की गई है। यात्रा में केवल 13 साल से 70 साल के लोग जा सकते हैं। इससे कम या ज्यादा उम्र के लोगों को यात्रा की परमिट नहीं मिलेगी।
सभी यात्रियों के लिए हेल्थ गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है। यात्रियों को किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टर से अपना हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाना होगा। यह सर्टिफिकेट 8 अप्रैल 2026 के बाद का होना चाहिए।
अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए प्रशासन ने दो मार्ग बनाए हैं। पहला मार्ग पहलगाम रूट है और दूसरा बालटाल रूट कहलाता है। पहलगाम रूट की कुल लंबाई करीब 48 किलोमीटर की है। यह रास्ता थोड़ा लंबा है लेकिन इसकी चढ़ाई काफी आसान मानी जाती है।
दूसरा बालटाल रूट केवल 14 किलोमीटर का ही छोटा रास्ता है। लेकिन इस मार्ग पर बहुत ही सीधी और कठिन चढ़ाई पार करनी होती है। शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट लोग ही बालटाल रूट का चयन करते हैं। दोनों ही रास्तों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद यात्रियों को आरएफआईडी कार्ड दिया जाएगा। इस कार्ड की मदद से प्रशासन यात्रियों को आसानी से ट्रैक कर सकेगा।
आपात स्थिति में यह कार्ड यात्रियों की सुरक्षा के लिए बहुत काम आता है। इस बार यात्रियों को 10 लाख रुपए का बीमा भी मिलेगा। जो लोग पैदल चढ़ाई नहीं कर सकते उनके लिए हेलीकॉप्टर की सुविधा है।
इसकी एडवांस बुकिंग श्राइन बोर्ड की वेबसाइट से की जा सकती है। महिला यात्रियों को साड़ी के बजाय ट्रैक सूट या सलवार-कमीज पहननी चाहिए। रास्ते में चप्पल बिल्कुल न पहनें और सिर्फ अच्छे जूते पहनें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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यहां बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्माण अपने आप होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस गुफा में एक चमत्कारी रहस्य भी छिपा हुआ है। यहां आज भी कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है।
इन कबूतरों को आम पक्षी नहीं बल्कि अमर पक्षी माना जाता है। इन्होंने भगवान शिव के मुख से अमर होने की कथा सुनी थी। शिव पुराण और स्कंद पुराण में इस कथा का बहुत सुंदर वर्णन मिलता है। भृंगीश संहिता में भी इस रहस्य के बारे में बताया गया है। आइए जानें अमरनाथ यात्रा का महत्व...
amarnath gufa
कैसे अमर हुआ कबूतरों का जोड़ा
भगवान शिव जानते थे कि यह कथा बहुत ज्यादा गोपनीय और शक्तिशाली है। जो भी इसे सुनेगा वह जीवन और मृत्यु से मुक्त हो जाएगा। इसलिए महादेव ने कथा सुनाने के लिए एक बेहद एकांत जगह चुनी। वह जगह आज की पवित्र और गुप्त अमरनाथ गुफा ही है।
गुफा में पहुंचकर भगवान शिव ने माता पार्वती को बिठाया और कहा। उन्होंने कहा कि कथा के दौरान यहां कोई तीसरा नहीं होना चाहिए।
महादेव ने जैसे ही कथा सुनाना शुरू किया माता पार्वती उसे सुनने लगीं। लेकिन कुछ समय बाद माता पार्वती को गहरी नींद आ गई। उसी समय गुफा में कबूतरों का एक जोड़ा भी चुपचाप बैठा हुआ था।
कबूतरों के जोड़े ने सुनी अमर कथा
कथा समाप्त होने पर जब महादेव ने अपनी आंखें खोलीं तो हैरान रह गए। माता पार्वती सो रही थीं और कबूतर सामने बैठे थे। यह देखकर भगवान शिव को पहले तो बहुत तेज गुस्सा आ गया। वे कबूतरों को सजा देने के लिए आगे बढ़े।
तभी कबूतरों ने हाथ जोड़कर महादेव से एक बहुत बड़ी गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि प्रभु अब हम आपकी अमर कथा सुन चुके हैं। अगर आप हमें मार देंगे तो आपकी यह अमर कथा झूठी हो जाएगी।
कबूतरों की यह तर्कसंगत बात सुनकर महादेव का गुस्सा शांत हो गया। महादेव ने मुस्कुराते हुए उन दोनों कबूतरों को एक वरदान दिया। उन्होंने कहा कि तुम दोनों हमेशा के लिए अमर रहोगे। तुम दोनों इस गुफा में शिव और पार्वती के प्रतीक बनकर रहोगे। तब से वह जोड़ा इसी पवित्र गुफा में निवास करता है।
Amarnath yatra 2022 How Shivling Constructed in Amarnath Cave Shivling Mythology | Explainer: अमरनाथ गुफा में ऐसे होता है पवित्र शिवलिंग का निर्माण, पढ़िए रोचक कहानी
अमरनाथ यात्रा 2026 का शेड्यूल
यात्रा का समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। इसी पावन दिन देश भर में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। श्रद्धालु काफी समय से इस यात्रा के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। अब प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया जानें
श्रद्धालु श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा बैंकों के जरिए भी रजिस्ट्रेशन हो रहा है। देश भर में भारतीय स्टेट बैंक सहित 550 बैंक शाखाएं अधिकृत की गई हैं।
यहां पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर परमिट मिलते हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का दूसरा चरण 3 जुलाई से दोबारा शुरू होने जा रहा है। यह प्रक्रिया आने वाले 12 अगस्त तक लगातार चलती रहेगी।
उम्र सीमा और जरूरी नियम
खराब मौसम और चढ़ाई को देखते हुए उम्र सीमा तय की गई है। यात्रा में केवल 13 साल से 70 साल के लोग जा सकते हैं। इससे कम या ज्यादा उम्र के लोगों को यात्रा की परमिट नहीं मिलेगी।
सभी यात्रियों के लिए हेल्थ गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है। यात्रियों को किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टर से अपना हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाना होगा। यह सर्टिफिकेट 8 अप्रैल 2026 के बाद का होना चाहिए।
बालटाल और पहलगाम दो रूट
दूसरा बालटाल रूट केवल 14 किलोमीटर का ही छोटा रास्ता है। लेकिन इस मार्ग पर बहुत ही सीधी और कठिन चढ़ाई पार करनी होती है। शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट लोग ही बालटाल रूट का चयन करते हैं। दोनों ही रास्तों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं
आपात स्थिति में यह कार्ड यात्रियों की सुरक्षा के लिए बहुत काम आता है। इस बार यात्रियों को 10 लाख रुपए का बीमा भी मिलेगा। जो लोग पैदल चढ़ाई नहीं कर सकते उनके लिए हेलीकॉप्टर की सुविधा है।
इसकी एडवांस बुकिंग श्राइन बोर्ड की वेबसाइट से की जा सकती है। महिला यात्रियों को साड़ी के बजाय ट्रैक सूट या सलवार-कमीज पहननी चाहिए। रास्ते में चप्पल बिल्कुल न पहनें और सिर्फ अच्छे जूते पहनें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- अमरनाथ गुफा में कबूतर का जोड़ा कैसे अमर हो गया?
भगवान शिव जब माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुना रहे थे, तब माता पार्वती सो गईं। उस समय गुफा में मौजूद कबूतरों के जोड़े ने पूरी कथा सुन ली, जिससे वे हमेशा के लिए अमर हो गए। - साल 2026 में अमरनाथ यात्रा कब से शुरू और समाप्त होगी?
साल 2026 में अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई दिन शुक्रवार से होने जा रही है। इस 57 दिनों की पवित्र यात्रा का समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा। - अमरनाथ यात्रा के लिए उम्र सीमा और हेल्थ नियम क्या हैं? ृ
इस कठिन यात्रा में 13 साल से लेकर 70 साल तक के लोग ही शामिल हो सकते हैं। सभी यात्रियों के लिए 8 अप्रैल 2026 के बाद का वैध अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र देना जरूरी है।
30 जून से शुरू होगा आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
आखिर क्यों दूर्वा के बिना अधूरी है बप्पा की पूजा, कश्यप ऋषि से जुड़ा है राज
हिंदू धर्म में पूजा करते समय सही आसन पर बैठना क्यों है जरूरी, यहां जानें जरूरी नियम
भोपाल में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर बोले- बिना तिलक पूजा स्वीकार नहीं होती
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