पूजा पाठ में क्यों जरूरी है चरणामृत चढ़ाना, जानें कैसे करें इसका सही तरीके से सेवन
Kaushiki | Jun 30, 2025, 18:57 IST
Rules for taking Charanamrit
चरणामृत हिंदू धर्म में पूजा के बाद दिया जाने वाला पवित्र जल है, जो भगवान के चरणों से प्राप्त होता है। जानिए इसके धार्मिक लाभ, महत्व, और इसे ग्रहण करने के नियम।
चरणामृत हिंदू धर्म में एक पवित्र परंपरा है, जिसमें भगवान के चरणों से गिरा जल लिया जाता है। यह जल विशेष रूप से अमृत माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक चरणामृत का उपयोग केवल जल के रूप में नहीं बल्कि पंचामृत के रूप में भी किया जा सकता है।
इसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर शामिल होते हैं। पूजा के समय भगवान की मूर्ति पर यह अमृत चढ़ाया जाता है और फिर भक्तों को चरणामृत के रूप में दिया जाता है, जो बहुत ही पवित्र माना जाता है।
ये खबर भी पढ़ें...आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से है, ग्रह दोष निवारण के लिए ऐसे करें माता की पूजा
चरणामृत भगवान के चरणों से प्राप्त जल होता है, जो बहुत पवित्र माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, भगवान विष्णु के चरणों से गंगा का पानी निकलता है, जिसे सभी तीर्थों से भी पवित्र माना जाता है।
इसी तरह, शिवपुराण में कहा गया है कि भगवान शिव के अभिषेक से मिले जल भी मोक्ष देने वाला होता है। इसलिए चरणामृत को पवित्रता, आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर की कृपा का प्रतीक माना जाता है। इसे विशेष सम्मान के साथ ग्रहण किया जाता है।
शास्त्रों में इस अमृत को पीने के कई लाभ कथित हैं:
समस्त तीर्थों का फल
शास्त्रों में कहा गया है कि चरणामृत पीने से वह पुण्य मिलता है, जो तीर्थयात्रा, गंगा स्नान या यज्ञ में भाग लेने से मिलता है। यह पुण्यदायक जल कम प्रयास में अधिक पुण्य देता है।
पापों का नाश
इस अमृत की शक्ति के बारे में कहा जाता है कि इसमें पापों को नष्ट करने की क्षमता होती है। "चरणामृतं पानं पावनं पापनाशनम्" इस श्लोक के मुताबिक, इस अमृत को पीने से सभी पाप नाश हो जाते हैं।
मन और शरीर की शुद्धि
इस अमृत के तत्व जैसे दूध, घी, शहद, दही और शक्कर, आयुर्वेद के दृष्टि से अत्यंत गुणकारी होते हैं। ये शरीर को पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मानसिक शांति और सात्त्विकता की अनुभूति कराते हैं।
ईश्वर कृपा की प्राप्ति
इस अमृत को श्रद्धा के साथ ग्रहण करने से भक्त के जीवन में ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्यक्ति की दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है।
घर में सुख-शांति का आगमन
यह माना जाता है कि जो घर नियमित रूप से चरणामृत का सेवन करते हैं, वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और अशांति, रोग और कलह का नाश होता है।
ये खबर भी पढ़ें...सर्वश्रेष्ठ शुभ योग के साथ शुरू हो रहा देवशयनी एकादशी 2025, भगवान विष्णु और शिव की पूजा का है महत्व
इस अमृत ग्रहण करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है:
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬
👩👦👨👩👧👧
पंचामृत बनाने का सही तरीका | भगवान विष्णु की पूजा | Lord Vishnu | worship of Lord Vishnu | धर्म ज्योतिष न्यूज
इसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर शामिल होते हैं। पूजा के समय भगवान की मूर्ति पर यह अमृत चढ़ाया जाता है और फिर भक्तों को चरणामृत के रूप में दिया जाता है, जो बहुत ही पवित्र माना जाता है।
ये खबर भी पढ़ें...आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से है, ग्रह दोष निवारण के लिए ऐसे करें माता की पूजा
चरणामृत की धार्मिक मान्यता
इसी तरह, शिवपुराण में कहा गया है कि भगवान शिव के अभिषेक से मिले जल भी मोक्ष देने वाला होता है। इसलिए चरणामृत को पवित्रता, आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर की कृपा का प्रतीक माना जाता है। इसे विशेष सम्मान के साथ ग्रहण किया जाता है।
इसे पीने के धार्मिक लाभ
समस्त तीर्थों का फल
शास्त्रों में कहा गया है कि चरणामृत पीने से वह पुण्य मिलता है, जो तीर्थयात्रा, गंगा स्नान या यज्ञ में भाग लेने से मिलता है। यह पुण्यदायक जल कम प्रयास में अधिक पुण्य देता है।
पापों का नाश
इस अमृत की शक्ति के बारे में कहा जाता है कि इसमें पापों को नष्ट करने की क्षमता होती है। "चरणामृतं पानं पावनं पापनाशनम्" इस श्लोक के मुताबिक, इस अमृत को पीने से सभी पाप नाश हो जाते हैं।
मन और शरीर की शुद्धि
इस अमृत के तत्व जैसे दूध, घी, शहद, दही और शक्कर, आयुर्वेद के दृष्टि से अत्यंत गुणकारी होते हैं। ये शरीर को पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मानसिक शांति और सात्त्विकता की अनुभूति कराते हैं।
ईश्वर कृपा की प्राप्ति
इस अमृत को श्रद्धा के साथ ग्रहण करने से भक्त के जीवन में ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्यक्ति की दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है।
घर में सुख-शांति का आगमन
यह माना जाता है कि जो घर नियमित रूप से चरणामृत का सेवन करते हैं, वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और अशांति, रोग और कलह का नाश होता है।
ये खबर भी पढ़ें...सर्वश्रेष्ठ शुभ योग के साथ शुरू हो रहा देवशयनी एकादशी 2025, भगवान विष्णु और शिव की पूजा का है महत्व
इसे ग्रहण करने के नियम
- स्नान या हाथ-पैर धोकर ग्रहण करें: इस अमृत को ग्रहण करने से पहले शुद्धता का ध्यान रखें। स्वच्छता बहुत ही जरूरी है।
- दाहिने हाथ से लें: हमेशा दाहिने हाथ से इस अमृत ग्रहण करें, क्योंकि यह शुभ और पवित्र माना जाता है।
- श्रद्धा के साथ पीएं: इसे श्रद्धा और भक्ति से ग्रहण करना चाहिए, न कि हल्के में।
- गिरे हुए पंचामृत को न लें: यदि ये गिर जाए तो उसे ग्रहण करना वर्जित माना जाता है, क्योंकि यह अशुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- ग्रहण के बाद मौन धारण करें: इसे ग्रहण करने के बाद कुछ समय तक मौन रहकर भगवान का स्मरण करना लाभकारी होता है। इससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬
👩👦👨👩👧👧
पंचामृत बनाने का सही तरीका | भगवान विष्णु की पूजा | Lord Vishnu | worship of Lord Vishnu | धर्म ज्योतिष न्यूज
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari