एक चोर से धन के देवता कैसे बने कुबेर देव, जानें इनके पूर्वजन्म की कहानी
Kaushiki | Jun 12, 2026, 13:30 IST
how lord kuber became god of wealth
हिंदू मान्यताओं में कुबेर देव को धन का अधिपति माना जाता है। स्कंद पुराण की पौराणिक कथा के अनुसार, पूर्वजन्म में गुणनिधि नाम के एक चोर द्वारा अनजाने में शिव मंदिर के दीपक को बुझने से बचाने पर महादेव ने उन्हें धन का देवता बना दिया।
हिंदू धर्म में कुबेर देव का नाम बहुत ही आदर से लिया जाता है। उन्हें धन, वैभव और समृद्धि का साक्षात देवता माना जाता है। हर साल धनतेरस और दीपावली पर लक्ष्मी-कुबेर पूजा की जाती है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से घर की दरिद्रता दूर होती है। इंसान के जीवन से पैसों की हर तंगी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।
![Lord Kuber Story]()
पौराणिक ग्रंथों में कुबेर देव के परिवार का भी जिक्र मिलता है। वे लंकापति राजा रावण के सौतेले भाई माने जाते हैं। इसके साथ ही कुबेर की पहचान यक्षों के राजा के रूप में भी है। वे ब्रह्मांड के उत्तर दिशा के दिक्पाल और लोकपाल भी कहे जाते हैं। उन्हें संसार की नौ निधियों का परम स्वामी और रक्षक माना गया है।
पौराणिक कथाएं मेंकुबेर देव के पिता का नाम महर्षि विश्रवा था। उनकी माता का नाम देववर्णिणी था। कुबेर देव बचपन से ही महादेव के बहुत बड़े भक्त थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें यह धनपति का पद कैसे मिला? इसके पीछे पुराणों में एक बेहद दिलचस्प और अनोखी कहानी बताई गई है।
![worship lord kuber in this way wealth and health will be together permanently - Prabhasakshi latest news in hindi]()
स्कंद पुराण में कुबेर देव के पिछले जन्म की बड़ी रोचक कथा है। इसके मुताबिक, पूर्वजन्म में कुबेर देव एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। तब उनका नाम गुणनिधि रखा गया था। गुणनिधि पढ़ा-लिखा तो था पर उसमें एक बहुत बड़ा अवगुण था। वह बुरी संगति में पड़कर चोरी-चकारी करने लगा था।
जब इस बात की खबर उसके सीधे-साधे पिता को लगी तो वे दुखी हुए। उन्होंने गुस्से में आकर गुणनिधि को अपने घर से बाहर निकाल दिया। घर से निकलने के बाद गुणनिधि दाने-दाने को तरसने लगा। वह भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकने लगा।
भटकते हुए वह एक शिव मंदिर के पास पहुंच गया। रात का समय था और मंदिर में बहुत अंधेरा था। वहां कुछ लोग भगवान शिव को भोग लगाने आए थे। गुणनिधि ने उस स्वादिष्ट प्रसाद को चुराने का एक बड़ा प्लान बनाया। वह चुपके से मंदिर के गर्भगृह के अंदर घुस गया।
![क्या सच में कुबेर पहले चोर थे? जानिए स्कंद पुराण की रहस्यमयी कहानी, जिसने बदल दी उनकी पूरी किस्मत - News18 हिंदी]()
उस समय शिव मंदिर के अंदर एक पुजारी सो रहा था। पुजारी की नजर से बचने के लिए गुणनिधि बहुत सावधानी से बढ़ा। मंदिर का मुख्य दीपक उस समय धीरे-धीरे बुझने की कगार पर था।
दीपक की रोशनी बहुत कम हो गई थी जिससे अंधेरा बढ़ रहा था। गुणनिधि को डर था कि अंधेरे में वह पकड़ा न जाए। इसलिए उसने दीपक की लौ को तेज करने की कोशिश की। उसने दीपक के सामने अपना एक साफ तौलिया फैला दिया।
इससे हवा रुक गई और बुझता हुआ दीपक फिर से चमक उठा। तभी अचानक पुजारी की आंख खुल गई और उसने उसे देख लिया। वहां चोर-चोर का शोर मच गया। मंदिर से भागते समय हुई हाथापाई में गुणनिधि की मौत हो गई। उसकी मौत के बाद यमराज के दूत उसकी आत्मा को लेने आए।
![Kuber Dev: कुबेर कैसे बने धन के देवता? जानें इनके पिछले जन्म की कथा | Kubera Dev how did he become the god of wealth? discover his past life story]()
तभी वहां पर भगवान शिव के गण भी पहुंच गए। शिव के गणों ने यमदूतों को रोक दिया। वे गुणनिधि की आत्मा को सीधे भोलेनाथ के सामने ले गए। भगवान शिव ने गुणनिधि के केवल अच्छे काम को देखा।
महादेव को लगा कि गुणनिधि ने उनके लिए जलते दीपक की रक्षा की है। उसने हवा से दीपक को बुझने से बचाने के लिए कपड़ा बिछाया था। भले ही उसका इरादा चोरी का था पर उसने शिव की ज्योति बचाई थी। इसी एक पुण्य काम से भोलेनाथ बेहद प्रसन्न हो गए।
शिव जी ने गुणनिधि के पिछले सारे पाप माफ कर दिए। उन्होंने गुणनिधि को अगले जन्म में कुबेर की बड़ी उपाधि दे दी। साथ ही उन्हें देवताओं का मुख्य खजांची और धनपति बना दिया।
इस तरह एक चोर भगवान शिव की कृपा से धन का स्वामी बन गया। कुबेर देवता की यह कहानी आज भी करोड़ों भक्तों को प्रेरणा देती है। सच्चे मन से की गई पूजा कभी भी खाली नहीं जाती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
सूर्य ग्रहण 2026: साल में लगेंगे दो बड़े ग्रहण, दिन में छा जाएगा अंधेरा, जानें भारत पर क्या होगा प्रभाव
पूजा की थाली से लेकर मन की शांति तक, जानें कपूर जलाने के फायदे
घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए कपूर आरती के साथ शामिल करें ये चीज, नेगेटिव एनर्जी रहेगी दूर
क्या आप जानते हैं फाल्गुन नहीं, इस महीने में हुआ था शिव और पार्वती का विवाह
Lord Kuber Story
पौराणिक ग्रंथों में कुबेर की कहानी
पौराणिक कथाएं मेंकुबेर देव के पिता का नाम महर्षि विश्रवा था। उनकी माता का नाम देववर्णिणी था। कुबेर देव बचपन से ही महादेव के बहुत बड़े भक्त थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें यह धनपति का पद कैसे मिला? इसके पीछे पुराणों में एक बेहद दिलचस्प और अनोखी कहानी बताई गई है।
worship lord kuber in this way wealth and health will be together permanently - Prabhasakshi latest news in hindi
स्कंद पुराण में कुबेर के पूर्वजन्म का इतिहास
जब इस बात की खबर उसके सीधे-साधे पिता को लगी तो वे दुखी हुए। उन्होंने गुस्से में आकर गुणनिधि को अपने घर से बाहर निकाल दिया। घर से निकलने के बाद गुणनिधि दाने-दाने को तरसने लगा। वह भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकने लगा।
भटकते हुए वह एक शिव मंदिर के पास पहुंच गया। रात का समय था और मंदिर में बहुत अंधेरा था। वहां कुछ लोग भगवान शिव को भोग लगाने आए थे। गुणनिधि ने उस स्वादिष्ट प्रसाद को चुराने का एक बड़ा प्लान बनाया। वह चुपके से मंदिर के गर्भगृह के अंदर घुस गया।
क्या सच में कुबेर पहले चोर थे? जानिए स्कंद पुराण की रहस्यमयी कहानी, जिसने बदल दी उनकी पूरी किस्मत - News18 हिंदी
अनजाने में किए किस काम से खुश हुए भोलेनाथ
दीपक की रोशनी बहुत कम हो गई थी जिससे अंधेरा बढ़ रहा था। गुणनिधि को डर था कि अंधेरे में वह पकड़ा न जाए। इसलिए उसने दीपक की लौ को तेज करने की कोशिश की। उसने दीपक के सामने अपना एक साफ तौलिया फैला दिया।
इससे हवा रुक गई और बुझता हुआ दीपक फिर से चमक उठा। तभी अचानक पुजारी की आंख खुल गई और उसने उसे देख लिया। वहां चोर-चोर का शोर मच गया। मंदिर से भागते समय हुई हाथापाई में गुणनिधि की मौत हो गई। उसकी मौत के बाद यमराज के दूत उसकी आत्मा को लेने आए।
Kuber Dev: कुबेर कैसे बने धन के देवता? जानें इनके पिछले जन्म की कथा | Kubera Dev how did he become the god of wealth? discover his past life story
चोर से देवताओं के खजांची बनने का अद्भुत सफर
महादेव को लगा कि गुणनिधि ने उनके लिए जलते दीपक की रक्षा की है। उसने हवा से दीपक को बुझने से बचाने के लिए कपड़ा बिछाया था। भले ही उसका इरादा चोरी का था पर उसने शिव की ज्योति बचाई थी। इसी एक पुण्य काम से भोलेनाथ बेहद प्रसन्न हो गए।
शिव जी ने गुणनिधि के पिछले सारे पाप माफ कर दिए। उन्होंने गुणनिधि को अगले जन्म में कुबेर की बड़ी उपाधि दे दी। साथ ही उन्हें देवताओं का मुख्य खजांची और धनपति बना दिया।
इस तरह एक चोर भगवान शिव की कृपा से धन का स्वामी बन गया। कुबेर देवता की यह कहानी आज भी करोड़ों भक्तों को प्रेरणा देती है। सच्चे मन से की गई पूजा कभी भी खाली नहीं जाती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- कुबेर देव का राजा रावण से क्या संबंध है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, धन के देवता कुबेर देव लंका के राजा रावण के सौतेले भाई हैं। कुबेर देव महर्षि विश्रवा के बड़े पुत्र हैं। - पूर्वजन्म में कुबेर देव का क्या नाम था और उनका स्वभाव कैसा था?
पूर्वजन्म में कुबेर देव का नाम गुणनिधि था। वे एक ब्राह्मण पुत्र थे लेकिन बुरी संगति के कारण वे चोरी करने लगे थे। - भगवान शिव ने कुबेर देव को धन का देवता क्यों बनाया?
गुणनिधि ने अनजाने में शिव मंदिर के बुझते दीपक को अपने कपड़े से बचाया था। इस सेवा से खुश होकर शिव जी ने उन्हें कुबेर की उपाधि दी।
सूर्य ग्रहण 2026: साल में लगेंगे दो बड़े ग्रहण, दिन में छा जाएगा अंधेरा, जानें भारत पर क्या होगा प्रभाव
पूजा की थाली से लेकर मन की शांति तक, जानें कपूर जलाने के फायदे
घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए कपूर आरती के साथ शामिल करें ये चीज, नेगेटिव एनर्जी रहेगी दूर
क्या आप जानते हैं फाल्गुन नहीं, इस महीने में हुआ था शिव और पार्वती का विवाह
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari