आखिर क्यों दूर्वा के बिना अधूरी है बप्पा की पूजा, कश्यप ऋषि से जुड़ा है राज
Kaushiki | Jun 26, 2026, 13:05 IST
ganesha durva ghas analasur story
सनातन धर्म में गणेश जी की पूजा में दूर्वा यानी दूब घास का विशेष महत्व है। पौराणिक कथा के मुताबिक, अनलासुर राक्षस को निगलने के बाद बप्पा के पेट में भयंकर जलन हुई थी, जिसे कश्यप ऋषि द्वारा दी गई दूर्वा से शांत किया गया था।
Lord Ganesha Durva Story: सनातन धर्म की पूजा में कई तरह की वनस्पतियों का उपयोग होता है। इन सभी पेड़-पौधों में दूब घास का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे सामान्य बोलचाल की भाषा में हम दूर्वा भी कहते हैं।
भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने की यह पवित्र परंपरा बहुत पुरानी है। ऐसा माना जाता है कि दूर्वा के बिना बप्पा कभी खुश नहीं होते। इसके बिना की गई पूजा का पूरा फल भक्तों को नहीं मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र में भी दूर्वा का बहुत बड़ा महत्व विस्तार से बताया गया है। बुधवार के पावन दिन इसे चढ़ाने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है। इससे व्यक्ति की बुद्धि बहुत तेज और निर्णय क्षमता बेहतर होती है।
![Lord Ganesha Durva Story]()
पौराणिक कथा के मुताबिक, पुराने समय में यमलोक में एक भयंकर राक्षस रहता था। उस बेहद बलशाली और क्रूर राक्षस का नाम अनलासुर था। वह दिखने में बहुत भयानक और अधर्मी था।
अनलासुर के बढ़ते आतंक से ऋषि-मुनि और सभी देवता बहुत ज्यादा परेशान थे। वह राक्षस गुस्से में आकर जीवित मनुष्यों और संतों को जिंदा ही निगल जाता था। चारों तरफ केवल चीख-पुकार मची हुई थी।
जब इंद्र सहित सभी देवता बेबस हो गए, तब वे महादेव की शरण में पहुंचे। शिव जी ने कहा कि इस संकट से केवल गणेश ही बचा सकते हैं। तब ऋषि-मुनियों की रक्षा के लिए भगवान गणेश आगे आए।
![आखिर क्यों दूर्वा के बिना मानी जाती है गणपति बप्पा की पूजा अधूरी? जानिए वजह और चढ़ाने के नियम - why ganpati bappa like durva grass-mobile]()
गणेश जी ने उस क्रूर राक्षस अनलासुर के अत्याचारों को रोकने का फैसला किया। बप्पा ने खेल ही खेल में उस दैत्य को अपने बड़े से पेट में डाल लिया। इस तरह उस पापी राक्षस का अंत हमेशा के लिए हो गया।
राक्षस को पेट में निगलने के बाद एक नई मुसीबत खड़ी हो गई। गणेश जी के पेट में अचानक बहुत तेज जलन होने लगी। उनके शरीर का तापमान और पेट की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी।
भगवान शिव, माता पार्वती और अन्य देवताओं ने बप्पा को बचाने के कई उपाय किए। उन्होंने बप्पा को कई तरह की ठंडी चीजें और ठंडे फल खाने को दिए। लेकिन पेट की आग शांत नहीं हो पा रही थी।
![ganesh chaturthi 2021, ganesh utsav 2021, ganesh puja vidhi, Offer Durva, Rose, Shami leaves to Lord Ganapati, but Tulsi should not be offered, why Ganesha has a broken tooth?]()
सभी देवता और माता पार्वती बप्पा के इस भयंकर कष्ट को देखकर रोने लगे। बप्पा को इस असहनीय दर्द से बाहर निकालना बहुत जरूरी था। हर कोई चुपचाप बैठकर कोई न कोई उपाय सोच रहा था।
तभी उस व्याकुल सभा में अचानक महान कश्यप ऋषि का आगमन हुआ। उन्होंने बप्पा की हालत देखकर तुरंत अपनी दिव्य दृष्टि से कारण जान लिया। ऋषि ने पास के मैदान से हरी-भरी दूब घास तोड़ी।
कश्यप ऋषि ने बहुत ही श्रद्धा से दूर्वा की 21 गांठें तैयार कीं। ऋषि ने वह 21 दूर्वा की गांठें गणेश जी को चबाकर खाने के लिए दीं। इसके बाद जो हुआ, वह किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं था।
जैसे ही गणेश जी ने कश्यप ऋषि की दी हुई दूर्वा खाई, चमत्कार हो गया। उनके पेट की जलन तुरंत और पूरी तरह से शांत हो गई। बप्पा का पूरा शरीर एकदम ठंडा और आनंदित हो गया।
इस चमत्कारी आराम के बाद गणेश जी बहुत ज्यादा प्रसन्न हुए। उन्होंने तुरंत सभी देवताओं के सामने एक बड़ी और ऐतिहासिक घोषणा की। बप्पा ने दूर्वा को संसार में अपनी सबसे प्रिय वस्तु घोषित कर दिया।
गणेश जी ने वरदान देते हुए कहा कि जो मुझे दूर्वा चढ़ाएगा, मैं हमेशा खुश रहूंगा। उस भक्त की जिंदगी के सारे संकट पल भर में दूर हो जाएंगे। उसे मनचाहा सुख और समृद्धि का फल मिलेगा।
क्या आप जानते हैं कि दूर्वा की उत्पत्ति कैसे हुई थी? समुद्र मंथन के समय जब अमृत कलश निकला, तो उसकी कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। जहां वो बूंदें गिरीं, वहीं पर इस पवित्र दूर्वा घास का जन्म हुआ था।
अमृत के प्रभाव के कारण दूर्वा कभी पूरी तरह नष्ट नहीं होती है। कितनी भी तेज गर्मी हो, यह घास दोबारा हरी हो जाती है। यह अमरता और वंश वृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
यही कारण है कि शादियों और शुभ कार्यों में दूल्हा-दुल्हन को दूर्वा का टीका लगाते हैं। इसके प्रयोग से घर में सुख-शांति आती है। साथ ही परिवार में आपसी प्रेम और संतानों की तरक्की होती है।
![Lord Ganesha Durva Story]()
भगवान गणेश को हमेशा साफ और शुद्ध जगह से तोड़कर ही दूर्वा चढ़ाएं। किसी गंदे स्थान या नाले के पास उगी घास का उपयोग बिल्कुल न करें। इसे घर लाकर सबसे पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
बप्पा को हमेशा जोड़ों में ही दूर्वा अर्पित करनी चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक, 11 या 21 के जोड़े बनाकर चढ़ाना सबसे अच्छा माना जाता है। दूर्वा का मुख हमेशा गणेश जी के पैरों की तरफ होना चाहिए।
दूर्वा चढ़ाते समय 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का लगातार जाप करें। पूरी श्रद्धा भाव से चढ़ाई गई दूर्वा आपकी बंद किस्मत के ताले खोल सकती है। इससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
![गणेश चतुर्थी 2018:गणपति पूजा में जरूर चढ़ाएं ये 1 खास चीज, लेकिन भूलकर ना करें तुलसी का इस्तेमाल - Ganesh Chaturthi 2018 Story Always Offer Durva Grass In Ganesh Puja But Never]()
दूर्वा केवल एक साधारण घास नहीं है, बल्कि यह बप्पा के शांत और सौम्य स्वभाव का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आएं, हमें हमेशा जमीन से जुड़े रहना चाहिए।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर हम बप्पा के इस संदेश को अपना लें, तो हमारे जीवन के कई तनाव अपने आप खत्म हो जाएंगे। बुधवार के दिन अपने बच्चों से भी बप्पा को दूर्वा जरूर चढ़वाएं।
गणेश पूजा की छोटी सी परंपरा से बच्चों में संस्कार और बुद्धि का विकास होता है। बप्पा का आशीर्वाद आपके पूरे परिवार पर हमेशा बना रहेगा। विघ्नहर्ता आपके जीवन के सभी विघ्नों को पल भर में दूर कर देंगे।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
30 जून से शुरू होगा आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
हिंदू धर्म में पूजा करते समय सही आसन पर बैठना क्यों है जरूरी, यहां जानें जरूरी नियम
गीता में कृष्ण ने क्यों कहा मैं वृक्षों में पीपल हूं, जानें पीपल पूजा के नियम
भोपाल में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर बोले- बिना तिलक पूजा स्वीकार नहीं होती
भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने की यह पवित्र परंपरा बहुत पुरानी है। ऐसा माना जाता है कि दूर्वा के बिना बप्पा कभी खुश नहीं होते। इसके बिना की गई पूजा का पूरा फल भक्तों को नहीं मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र में भी दूर्वा का बहुत बड़ा महत्व विस्तार से बताया गया है। बुधवार के पावन दिन इसे चढ़ाने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है। इससे व्यक्ति की बुद्धि बहुत तेज और निर्णय क्षमता बेहतर होती है।
Lord Ganesha Durva Story
अनलासुर राक्षस की पौराणिक कथा
अनलासुर के बढ़ते आतंक से ऋषि-मुनि और सभी देवता बहुत ज्यादा परेशान थे। वह राक्षस गुस्से में आकर जीवित मनुष्यों और संतों को जिंदा ही निगल जाता था। चारों तरफ केवल चीख-पुकार मची हुई थी।
जब इंद्र सहित सभी देवता बेबस हो गए, तब वे महादेव की शरण में पहुंचे। शिव जी ने कहा कि इस संकट से केवल गणेश ही बचा सकते हैं। तब ऋषि-मुनियों की रक्षा के लिए भगवान गणेश आगे आए।
आखिर क्यों दूर्वा के बिना मानी जाती है गणपति बप्पा की पूजा अधूरी? जानिए वजह और चढ़ाने के नियम - why ganpati bappa like durva grass-mobile
बप्पा ने जब राक्षस को जिंदा निगला
राक्षस को पेट में निगलने के बाद एक नई मुसीबत खड़ी हो गई। गणेश जी के पेट में अचानक बहुत तेज जलन होने लगी। उनके शरीर का तापमान और पेट की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी।
भगवान शिव, माता पार्वती और अन्य देवताओं ने बप्पा को बचाने के कई उपाय किए। उन्होंने बप्पा को कई तरह की ठंडी चीजें और ठंडे फल खाने को दिए। लेकिन पेट की आग शांत नहीं हो पा रही थी।
ganesh chaturthi 2021, ganesh utsav 2021, ganesh puja vidhi, Offer Durva, Rose, Shami leaves to Lord Ganapati, but Tulsi should not be offered, why Ganesha has a broken tooth?
कश्यप ऋषि का वो अद्भुत चमत्कार
तभी उस व्याकुल सभा में अचानक महान कश्यप ऋषि का आगमन हुआ। उन्होंने बप्पा की हालत देखकर तुरंत अपनी दिव्य दृष्टि से कारण जान लिया। ऋषि ने पास के मैदान से हरी-भरी दूब घास तोड़ी।
कश्यप ऋषि ने बहुत ही श्रद्धा से दूर्वा की 21 गांठें तैयार कीं। ऋषि ने वह 21 दूर्वा की गांठें गणेश जी को चबाकर खाने के लिए दीं। इसके बाद जो हुआ, वह किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं था।
शांत हुई पेट की भयंकर अग्नि
इस चमत्कारी आराम के बाद गणेश जी बहुत ज्यादा प्रसन्न हुए। उन्होंने तुरंत सभी देवताओं के सामने एक बड़ी और ऐतिहासिक घोषणा की। बप्पा ने दूर्वा को संसार में अपनी सबसे प्रिय वस्तु घोषित कर दिया।
गणेश जी ने वरदान देते हुए कहा कि जो मुझे दूर्वा चढ़ाएगा, मैं हमेशा खुश रहूंगा। उस भक्त की जिंदगी के सारे संकट पल भर में दूर हो जाएंगे। उसे मनचाहा सुख और समृद्धि का फल मिलेगा।
दूर्वा से जुड़ी कुछ अन्य खास बातें
अमृत के प्रभाव के कारण दूर्वा कभी पूरी तरह नष्ट नहीं होती है। कितनी भी तेज गर्मी हो, यह घास दोबारा हरी हो जाती है। यह अमरता और वंश वृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
यही कारण है कि शादियों और शुभ कार्यों में दूल्हा-दुल्हन को दूर्वा का टीका लगाते हैं। इसके प्रयोग से घर में सुख-शांति आती है। साथ ही परिवार में आपसी प्रेम और संतानों की तरक्की होती है।
Lord Ganesha Durva Story
पूजा में दूर्वा चढ़ाने के सही नियम
बप्पा को हमेशा जोड़ों में ही दूर्वा अर्पित करनी चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक, 11 या 21 के जोड़े बनाकर चढ़ाना सबसे अच्छा माना जाता है। दूर्वा का मुख हमेशा गणेश जी के पैरों की तरफ होना चाहिए।
दूर्वा चढ़ाते समय 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का लगातार जाप करें। पूरी श्रद्धा भाव से चढ़ाई गई दूर्वा आपकी बंद किस्मत के ताले खोल सकती है। इससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
गणेश चतुर्थी 2018:गणपति पूजा में जरूर चढ़ाएं ये 1 खास चीज, लेकिन भूलकर ना करें तुलसी का इस्तेमाल - Ganesh Chaturthi 2018 Story Always Offer Durva Grass In Ganesh Puja But Never
उपसंहार और आज का संदेश
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर हम बप्पा के इस संदेश को अपना लें, तो हमारे जीवन के कई तनाव अपने आप खत्म हो जाएंगे। बुधवार के दिन अपने बच्चों से भी बप्पा को दूर्वा जरूर चढ़वाएं।
गणेश पूजा की छोटी सी परंपरा से बच्चों में संस्कार और बुद्धि का विकास होता है। बप्पा का आशीर्वाद आपके पूरे परिवार पर हमेशा बना रहेगा। विघ्नहर्ता आपके जीवन के सभी विघ्नों को पल भर में दूर कर देंगे।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- गणेश जी को दूर्वा की कितनी गांठें चढ़ानी चाहिए और क्यों?
गणेश जी को हमेशा 21 दूर्वा की गांठें चढ़ानी चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार, जब कश्यप ऋषि ने बप्पा को 21 दूर्वा की गांठें खिलाई थीं, तभी उनके पेट की जलन शांत हुई थी। इसलिए यह संख्या सबसे शुभ और फलदायी मानी जाती है। - बुधवार के दिन गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से क्या लाभ होता है?
बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुद्धिमत्ता के कारक बुध ग्रह को समर्पित है। इस दिन बप्पा को हरी दूर्वा चढ़ाने से कुंडली में बुध दोष शांत होता है, बुद्धि तेज होती है और व्यापार व शिक्षा के क्षेत्र में अपार सफलता मिलती है। - क्या दूर्वा चढ़ाते समय कोई विशेष सावधानी रखनी चाहिए?
हां, दूर्वा हमेशा किसी साफ सुथरे स्थान से ही तोड़नी चाहिए। पैरों के नीचे आने वाली या अशुद्ध जगह की घास बप्पा को न चढ़ाएं। दूर्वा को हमेशा साफ पानी से धोकर, जोड़ों (11 या 21) के रूप में ही गणेश जी के चरणों में अर्पित करना चाहिए।
30 जून से शुरू होगा आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
हिंदू धर्म में पूजा करते समय सही आसन पर बैठना क्यों है जरूरी, यहां जानें जरूरी नियम
गीता में कृष्ण ने क्यों कहा मैं वृक्षों में पीपल हूं, जानें पीपल पूजा के नियम
भोपाल में कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर बोले- बिना तिलक पूजा स्वीकार नहीं होती
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari