पितृ पक्ष की ये तीन तारीखें क्यों मानी जाती है सबसे खास, क्या है इसका खास महत्व
Kaushiki | Sept 27, 2026, 12:58 IST
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पितृ पक्ष 2026 में तीन तारीखें सबसे खास मानी जा रही हैं, महाभरणी श्राद्ध, मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या। जानें इन तीनों दिनों का महत्व और सही तारीख, ताकि पितरों का आशीर्वाद मिल सके।
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष हर साल अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति आभार जताने का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस साल पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। कहने को तो पूरे 15 दिन तर्पण और पिंडदान के लिए खास होते हैं, लेकिन इनमें तीन तिथियां ऐसी हैं जिन्हें बेहद शक्तिशाली और फलदायी माना गया है।
इन दिनों श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ये तिथियां खास इसलिए मानी जाती हैं क्योंकि उनका संबंध सीधे यमराज, मां और भूली-बिसरी आत्माओं से जुड़ा है। इन दिनों की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इनमें 29 सितंबर की महाभरणी श्राद्ध, 5 अक्टूबर की मातृ नवमी और 10 अक्टूबर की सर्वपितृ अमावस्या शामिल हैं।
मान्यता है कि इन खास दिनों में श्रद्धा से किया गया तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है और उनका विशेष आशीर्वाद पूरे परिवार को मिलता है। आइए जानें इन तीनों तिथियों का महत्व....
साल 2026 में महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर, मंगलवार को है। यह दिन तृतीया श्राद्ध के रूप में भी जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस दिन भरणी नक्षत्र होने की वजह से इसे महाभरणी कहा जाता है।
भरणी नक्षत्र के स्वामी देवता खुद यमराज माने जाते हैं। इस दिन श्राद्ध करने से यमराज बेहद प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इससे पितरों को यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है और उनकी आत्मा को आगे की यात्रा में आसानी होती है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, महाभरणी के दिन गया में पिंडदान करने का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु इस दिन खासतौर पर गया जाकर तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गया में किया गया पिंडदान पितरों को सीधे मोक्ष दिलाता है।
जो लोग गया नहीं जा पाते, वे घर पर भी विधि-विधान से पूजा करके यह पुण्य कमा सकते हैं। पंडित की सलाह पर तर्पण और पिंडदान करना बेहतर माना जाता है।
साल 2026 में मातृ नवमी 5 अक्टूबर, सोमवार को रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इसे नवमी श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन खासतौर पर परिवार की दिवंगत मां और सुहागिन महिलाओं को समर्पित होता है। इस दिन दादी, नानी या परिवार की किसी भी विवाहित महिला का श्राद्ध किया जा सकता है, भले ही उनकी मृत्यु किसी भी तिथि पर हुई हो।
मातृ नवमी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मृत्यु तिथि याद न होने पर भी श्राद्ध किया जा सकता है। कई बार परिवार में महिलाओं की सही मृत्यु तिथि याद नहीं रहती।
ऐसे में मातृ नवमी के दिन उनका श्राद्ध करने से भी वही फल मिलता है। यही वजह है कि इस दिन को महिलाओं के श्राद्ध के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। घर की महिलाएं भी इस दिन विशेष पूजा में शामिल होती हैं।
पितृपक्ष की आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण तारीख सर्वपितृ अमावस्या है। यह 10 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है।
इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि याद नहीं है। साथ ही जिनकी मृत्यु अमावस्या के दिन हुई हो, उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है। यह दिन पूरे पितृपक्ष का समापन दिवस भी माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, यदि किसी कारणवश पूरे पंद्रह दिनों तक तर्पण नहीं कर पाए हैं, तो सिर्फ इस एक दिन श्राद्ध करने से भी पितर संतुष्ट हो जाते हैं। इसीलिए इस दिन को बेहद खास माना गया है।
मान्यता है कि इस दिन पितृ धरती से विदा लेकर वापस अपने लोक लौट जाते हैं। इसीलिए इसे पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। बंगाल में इसी दिन से महालया मानकर दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, श्राद्ध पक्षमें पितरों का श्राद्ध के लिएसुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करना शुभ माना जाता है। पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर श्राद्ध जरूर करना चाहिए।
गरीबों को भोजन और दान देना भी पितृपक्ष में महत्वपूर्ण माना जाता है। कौआ, गाय और कुत्ते को भोजन खिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। श्राद्ध कर्म | पितृपक्ष में पिंडदान
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इन दिनों श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ये तिथियां खास इसलिए मानी जाती हैं क्योंकि उनका संबंध सीधे यमराज, मां और भूली-बिसरी आत्माओं से जुड़ा है। इन दिनों की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इनमें 29 सितंबर की महाभरणी श्राद्ध, 5 अक्टूबर की मातृ नवमी और 10 अक्टूबर की सर्वपितृ अमावस्या शामिल हैं।
मान्यता है कि इन खास दिनों में श्रद्धा से किया गया तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है और उनका विशेष आशीर्वाद पूरे परिवार को मिलता है। आइए जानें इन तीनों तिथियों का महत्व....
महाभरणी श्राद्ध कब है
भरणी नक्षत्र के स्वामी देवता खुद यमराज माने जाते हैं। इस दिन श्राद्ध करने से यमराज बेहद प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इससे पितरों को यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है और उनकी आत्मा को आगे की यात्रा में आसानी होती है।
महाभरणी का गया से खास संबंध
जो लोग गया नहीं जा पाते, वे घर पर भी विधि-विधान से पूजा करके यह पुण्य कमा सकते हैं। पंडित की सलाह पर तर्पण और पिंडदान करना बेहतर माना जाता है।
मातृ नवमी कब मनाई जाएगी
मातृ नवमी का महत्व क्यों है खास
ऐसे में मातृ नवमी के दिन उनका श्राद्ध करने से भी वही फल मिलता है। यही वजह है कि इस दिन को महिलाओं के श्राद्ध के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। घर की महिलाएं भी इस दिन विशेष पूजा में शामिल होती हैं।
सर्वपितृ अमावस्या कब है
इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि याद नहीं है। साथ ही जिनकी मृत्यु अमावस्या के दिन हुई हो, उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है। यह दिन पूरे पितृपक्ष का समापन दिवस भी माना जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
मान्यता है कि इस दिन पितृ धरती से विदा लेकर वापस अपने लोक लौट जाते हैं। इसीलिए इसे पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। बंगाल में इसी दिन से महालया मानकर दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
पितृपक्ष में क्या करना चाहिए
गरीबों को भोजन और दान देना भी पितृपक्ष में महत्वपूर्ण माना जाता है। कौआ, गाय और कुत्ते को भोजन खिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। श्राद्ध कर्म | पितृपक्ष में पिंडदान
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15 या 16... 2026 में कितने दिनों का होगा पितृ पक्ष, देखें पूरी तिथियों की लिस्ट
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