चैत्र नवरात्रि पर पंचक का साया, इन 5 दिनों में भूलकर भी न करें ये काम
Kaushiki | Mar 12, 2026, 13:26 IST
raj-panchak
राज पंचक 16 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है। जानें पंचक का सही समय, वर्जित कार्य और चैत्र नवरात्रि घटस्थापना पर इसका प्रभाव। पूरी जानकारी यहां पढ़ें।
Chaitra Navratri: ज्योतिष शास्त्र में पंचक को बहुत संवेदनशील समय माना जाता है। मार्च 2026 में पंचक की शुरुआत 16 मार्च से हो रही है। सोमवार को शुरू होने वाले पंचक को राज पंचक कहते हैं।
राज पंचक को आमतौर पर शुभ कार्यों के लिए अच्छा मानते हैं। लेकिन कुछ विशेष कार्यों के लिए इसमें सख्त पाबंदी होती है। शास्त्रों के मुताबिक, इस दौरान पांच नक्षत्रों का प्रभाव रहता है। चंद्रमा की ऊर्जा इन दिनों बहुत अस्थिर और चंचल रहती है। इसलिए बड़े निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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ज्योतिष शास्त्र में इस साल राज पंचक 16 मार्च 2026 को शुरू होगा। इसकी शुरुआत सोमवार शाम 06:14 बजे से होने वाली है। ये पंचक 21 मार्च 2026 की सुबह तक चलेगा। शनिवार सुबह 02:27 बजे पंचक का प्रभाव समाप्त होगा।
इन पांच दिनों तक ग्रहों की स्थिति काफी विशेष रहेगी। धनिष्ठा से लेकर रेवती नक्षत्र तक चंद्रमा का भ्रमण रहेगा। इस दौरान किए गए कार्यों का फल पांच गुना मिलता है। इसीलिए अशुभ कार्यों से बचने की सख्त हिदायत दी जाती है।
पंचक ज्योतिष शास्त्र की एक ऐसी अवधि है, जब चंद्रमा पांच विशेष नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती) से होकर गुजरता है। इस दौरान ऊर्जा अस्थिर मानी जाती है, इसलिए कुछ कार्यों को करना वर्जित होता है।
यह काल कुल पांच दिनों का होता है, इसलिए इसे पंचक नाम दिया गया है। मान्यताओं के मुताबिक, इन पांच दिनों में कुछ विशेष काम करना वर्जित होता है। इस दौरान की गई गलती का बुरा प्रभाव पांच गुना बढ़ सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, पंचक मुख्य रूप से 5 तरह के होते हैं-
साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होगी। इस दिन नवरात्रि की घटस्थापना पंचक के साए में होगा। नवरात्रि के शुरुआती तीन दिन पंचक के भीतर रहेंगे। हालांकि, मान्यता के मुताबिक देवी पूजा में पंचक का कोई दोष नहीं होता।
माता की साधना और कलश स्थापना पूरी तरह शुभ है। धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पंचक बाधा नहीं बनता है। बस आपको कुछ सांसारिक और भारी कामों से बचना होगा। श्रद्धा के साथ की गई पूजा हमेशा सफल होती है।
ज्योतिष शास्त्र में राज पंचक को बाकी पंचकों से थोड़ा बेहतर मानते हैं। ये सरकारी कार्यों और संपत्ति के लिए फलदायी है। लेकिन निर्माण कार्यों में सावधानी रखना बहुत जरूरी है। वायु तत्व की अधिकता से कार्यों में बाधा आ सकती है।
ग्रहों के दोष दूर करने के लिए गायत्री मंत्र जपें। हनुमान चालीसा का पाठ भी पंचक दोष कम करता है। विद्वान ब्राह्मणों की सलाह लेकर ही बड़े काम करें। धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना हमेशा सुखद रहता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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19 मार्च से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि, कलश स्थापना के लिए ये समय है सबसे शुभ
राज पंचक को आमतौर पर शुभ कार्यों के लिए अच्छा मानते हैं। लेकिन कुछ विशेष कार्यों के लिए इसमें सख्त पाबंदी होती है। शास्त्रों के मुताबिक, इस दौरान पांच नक्षत्रों का प्रभाव रहता है। चंद्रमा की ऊर्जा इन दिनों बहुत अस्थिर और चंचल रहती है। इसलिए बड़े निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
Chaitra Navratri 2025:चैत्र नवरात्रि में कर रहे हैं नौ दिनों का उपवास, तो भूलकर भी न करें ये 6 काम - Chaitra Navratri 2025 If You Are Fasting For Nine Days Then
राज पंचक 2026 का समय
इन पांच दिनों तक ग्रहों की स्थिति काफी विशेष रहेगी। धनिष्ठा से लेकर रेवती नक्षत्र तक चंद्रमा का भ्रमण रहेगा। इस दौरान किए गए कार्यों का फल पांच गुना मिलता है। इसीलिए अशुभ कार्यों से बचने की सख्त हिदायत दी जाती है।
क्या होता है पंचक
यह काल कुल पांच दिनों का होता है, इसलिए इसे पंचक नाम दिया गया है। मान्यताओं के मुताबिक, इन पांच दिनों में कुछ विशेष काम करना वर्जित होता है। इस दौरान की गई गलती का बुरा प्रभाव पांच गुना बढ़ सकता है।
कितने तगह के होते हैं पंचक
- राज पंचक: सोमवार को शुरू होने वाला यह पंचक सरकारी कार्यों में सफलता दिलाता है।
- रोग पंचक: रविवार को शुरू होने वाला यह पंचक सेहत से जुड़ी समस्याएं दे सकता है।
- अग्नि पंचक: मंगलवार को शुरू होने वाला यह पंचक आग और मशीनों से नुकसान का डर पैदा करता है।
- मृत्यु पंचक: शनिवार को शुरू होने वाला यह पंचक सबसे घातक और कष्टकारी माना जाता है।
- चोर पंचक: शुक्रवार को शुरू होने वाला यह पंचक यात्रा और व्यापार में धन हानि का संकेत देता है।
चैत्र नवरात्रि में पंचक का खास संयोग
माता की साधना और कलश स्थापना पूरी तरह शुभ है। धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पंचक बाधा नहीं बनता है। बस आपको कुछ सांसारिक और भारी कामों से बचना होगा। श्रद्धा के साथ की गई पूजा हमेशा सफल होती है।
पंचक में न करें ये काम
- पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करना मना है।
- दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।
- इस समय घर की छत डलवाना भी अशुभ होता है।
- लकड़ी या घास इकट्ठा करना भी वर्जित माना गया है।
- पंचक काल में नई चारपाई या बेड न बनवाएं।
- विवाह के लिए रिश्ता देखना भी इन दिनों टालना चाहिए।
- नया व्यवसाय या बड़ा निवेश भी इस समय न करें।
- अंतिम संस्कार के लिए विशेष शांति पूजा जरूरी होती है।
- इन नियमों का पालन करने से संकट दूर रहते हैं।
राज पंचक का आध्यात्मिक महत्व
ग्रहों के दोष दूर करने के लिए गायत्री मंत्र जपें। हनुमान चालीसा का पाठ भी पंचक दोष कम करता है। विद्वान ब्राह्मणों की सलाह लेकर ही बड़े काम करें। धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना हमेशा सुखद रहता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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