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रंगभरी एकादशी: हिंदू धर्म में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहते हैं। इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल ये पावन तिथि 27 फरवरी को पड़ रही है। यह दिन भगवान विष्णु और शिवजी की कृपा के साथ-साथ हारे के सहारे खाटू श्याम जी को समर्पित है।
इस दिन खाटू श्याम जी के भक्त बहुत खुश होते हैं। सीकर के खाटू धाम में फाग उत्सव शुरू हो जाता है। इसी दिन महान योद्धा बर्बरीक ने श्रीकृष्ण के कहने पर अपना शीश दान किया था।
रंगभरी एकादशी शुभ मुहूर्त
इस साल यह व्रत 27 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। पूजा के लिए दोपहर का अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ है। व्रत का पारण 28 फरवरी की सुबह है।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:16 बजे से 1:02 बजे तक। इस समय पूजा करना बहुत फलदायी माना जाता है।
इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करना फलदायी है। इससे पुराने पापों से मुक्ति और सुख-शांति मिलती है। साफ पीले कपड़े जरूर पहनें। भगवान को पीले फूल, बेलपत्र और गुलाल अर्पित करें। जरूरतमंद लोगों को अन्न या वस्त्र का दान दें। व्रत के दौरान गुस्सा और बुराई करने से बचें। सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होंगी।
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रंगभरी एकादशी की कहानी
रंगभरी एकादशी का सीधा संबंध भगवान श्रीकृष्ण और बर्बरीक से है। पौराणिक कथा के मुताबिक, बर्बरीक घटोत्कच के पुत्र और बहुत शक्तिशाली योद्धा थे। महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक ने हिस्सा लेना चाहा।
श्रीकृष्ण जानते थे कि उनकी शक्ति युद्ध को बदल देगी। उन्होंने बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने हंसते हुए अपना शीश कृष्ण को सौंप दिया। श्रीकृष्ण उनकी इस महान भक्ति से बहुत प्रसन्न हुए।
बर्बरीक ने फाल्गुन शुक्ल एकादशी को ही यह बलिदान दिया था। प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को अपना श्याम नाम प्रदान किया। प्रभु ने कहा कि तुम कलियुग में पूजनीय रहोगे। जब तक सूर्य-चंद्रमा रहेंगे, दुनिया तुम्हें पूजेगी। कृष्ण ने उन्हें कलियुग का सबसे बड़ा देव बनाया।
तभी से इस दिन खाटू में बड़ा उत्सव होता है। भक्त बाबा श्याम के साथ रंगों की होली खेलते हैं। इस दिन बाबा का बहुत भव्य श्रृंगार होता है। लाखों श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेने खाटू धाम पहुंचते हैं। इसीलिए इस एकादशी को श्याम से जोड़ा जाता है।
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चार शुभ संयोग में पूजा का विशेष महत्व
हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल रंगभरी एकादशी पर चार अद्भुत संयोग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग इसमें शामिल हैं। आयुष्मान और सौभाग्य योग भी इस दिन मौजूद रहेंगे। इन योगों में पूजा करने से पुण्य फल मिलता है।
भगवान विष्णु और शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होगी। काशी में इस दिन शिव-गौरी की पूजा होती है। भक्त बाबा विश्वनाथ को अबीर और गुलाल चढ़ाते हैं।
माना जाता है कि शिव-पार्वती का मिलन हुआ था। खाटू धाम में भी गुलाल से होली खेली जाएगी। लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन करने सीकर पहुंचेंगे।
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महाभारत युद्ध के साक्षी बने बर्बरीक का मस्तक
बर्बरीक ने श्रीकृष्ण से पूरा युद्ध देखने की इच्छा जताई। कृष्ण ने उनके शीश को पर्वत शिखर पर रख दिया। वहां से उन्होंने पूरे अठारह दिन का युद्ध देखा। युद्ध के बाद पांडवों में जीत का श्रेय लेने की होड़ लगी। लेकिन बर्बरीक ने बताया कि केवल कृष्ण का चक्र चल रहा था।
आज भी बर्बरीक का शीश खाटू में पूजा जाता है। यहां आने वाले भक्त हार का सहारा ढूंढते हैं। बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है। मान्यता के मुताबिक, एकादशी के दिन व्रत रखने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं। जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
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रंगभरी एकादशी पूजन विधि
- श्रद्धालु सुबह उठकर भगवान विष्णु और आंवले की पूजा करें।
- व्रत का पारण 28 फरवरी की सुबह करना चाहिए।
- पारण का समय सुबह 6:47 से 9:06 तक है।
- नवनिवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत बहुत शुभ है।
- इससे वैवाहिक जीवन में खुशियां और प्रेम बढ़ता है।
- घर में लड्डू गोपाल की सेवा जरूर करें।
- गरीबों को दान देने से अक्षय पुण्य मिलता है।
- भगवान की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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